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मौत के बाद पता चला कोरोना+ था सैफ, तब तक हो गई थी भारी चूक: बिहार में सामुदायिक संक्रमण का खतरा

पटना एम्स लाए जाने से पहले सैफ को इलाज के लिए एक प्राइवेट अस्पताल ले जाया गया था। वहॉं के दो कर्मचारी भी उसके संपर्क में आए थे। इसके बाद ये अलग-अलग जगहों पर कई लोगों के संपर्क में आए। इनमें से एक ने तो एक शादी समारोह में भी शिरकत की थी।

बिहार के मुंगेर जिले के 38 वर्षीय व्यक्ति सैफ की 21 मार्च को कोरोना वायरस संक्रमण के चलते पटना के एम्स में मौत हो गई थी। वह कतर से लौटा था। इस मामले में अब जो जानकारी सामने आई है उसके अनुसार सैफ के परिवार के 2 सदस्य और पटना के जिस प्राइवेट अस्पताल में इसका इलाज हो रहा था, वहाँ के दो कर्मचारी भी कोरोना संक्रमित पाए गए हैं। इस नए घटनाक्रम के बाद आशंका जताई जा रही है कि बड़ी संख्या में ऐसे लोग संक्रमित हो सकते हैं, जो मृतक के परिवार के इन दो सदस्यों अथवा प्राइवेट अस्पताल के उन दो कर्मचारियों के संपर्क में आए थे। इसके कारण बिहार में सामुदायिक संक्रमण की आशंका पैदा हो गई है।

रिपोर्ट के अनुसार कोरोना संक्रमित मरीज के संपर्क में आने के बावजूद भी अस्पताल के इन दोनों कर्मचारियों ने भयानक लापरवाही दिखाई। इन दोनों में से एक लैब टेक्नीशियन अलग-अलग जगहों पर जहाँ करीब 50 लोगों के संपर्क में आया था, वहीं वार्ड बॉय ने पटना में एक शादी समारोह में शिरकत की थी जिसमें करीब 80 लोग शामिल हुए थे।

इन 130 लोगों में से 110 लोग आइसोलेशन में रखे गए हैं, जबकि कोरोना संक्रमित व्यक्तियों के संपर्क में आने की आशंका वाले लोगों की पहचान और निगरानी के प्रयास जारी हैं। शरणम् अस्पताल में काम करने वाले डॉक्टरों, नर्सों तथा अन्य मेडिकल स्टॉफ को भी आइसोलेशन में रखा गया है। अस्पताल ने अब तक किसी और कोरोना पॉजिटिव केस पाए जाने की जानकारी नहीं दी है। इनके अलावा सैफ परिवार के अन्य सदस्य व रिश्तेदार भी संक्रमण के खतरे से बाहर नहीं हैं, क्योंकि एम्स पटना ने जाँच रिपोर्ट आने से पहले ही उसका शव अंत्येष्टि के लिए परिवार को सौंप दिया था।

पटना के एक डॉक्टर ने बताया कि बिहार के ये चार COVID-19 मामले इस तरफ संकेत करते हैं कि बिहार में वायरस का सामुदायिक संक्रमण हुआ है, जो क्वारन्टाइन कदम उठाने के लिए प्रशासन को पर्याप्त वजह देता है। आशंका है कि कोरोना संक्रमित मामलों में वृद्धि हो सकती है। कोरोना से मरने वाले इस व्यक्ति को पहले मुंगेर के अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। उसके बाद उसे पटना के शरणम अस्पताल लाया गया। तबीयत और बिगड़ने पर उसे 20 मार्च को पटना के एम्स में भर्ती करवाया गया था, जहाँ 21 मार्च को उसकी मौत हो गई थी।

सैफ पहले से ही किडनी की गंभीर बीमारी से जूझ रहा था, इसलिए एम्स में उसकी डायलिसिस की जा रही थी। बाद में मेडिकल स्टॉफ ने उसमें श्वसन संबंधी दिक्क्तों को भी नोटिस किया और उसकी ट्रैवल हिस्ट्री को देखते हुए, जाँच के लिए नमूनों को 20 मार्च को भेजा। लेकिन इन टेस्ट्स के अंतिम परिणाम आने से पहले ही इसकी मृत्यु हो गई। अस्पताल प्रशासन ने लापरवाही का परिचय देते हुए सैफ का शव उसके परिवार को सौंप दिया जो उसको पटना से मुंगेर अंत्येष्टि के लिए ले गए। इस लापरवाही का खामियाजा किस हद तक भुगतना होगा यह आने वाले दिनों में साफ़ हो सकेगा।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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