Homeदेश-समाजकोरोना के शक में परिवार के नाम चिट्ठी लिखकर खुद को लगाई फाँसी, पोस्टमॉर्टम...

कोरोना के शक में परिवार के नाम चिट्ठी लिखकर खुद को लगाई फाँसी, पोस्टमॉर्टम में निकला निगेटिव

कोरोना को लेकर लोगों के मन में डर किस हद तक घर कर सकता है, ये कर्नाटक में उडुपी जिले में हुई एक घटना से समझ सकते हैं। यहाँ एक शख्स ने कोरोना संक्रमण होने की आशंका के चलते खुदकुशी कर ली।

कोरोना को लेकर लोगों के मन में डर किस हद तक घर कर सकता है, ये कर्नाटक में उडुपी जिले में हुई एक घटना से समझ सकते हैं। यहाँ एक शख्स ने कोरोना संक्रमण होने की आशंका के चलते खुदकुशी कर ली। हालाँकि बाद में यह बात सामने आई कि वह संक्रमित नहीं था, उसकी रिपोर्ट निगेटिव आई है। 

इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार, उडुपी में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने कहा कि पोस्टमॉर्टम टेस्ट रिपोर्ट से पता चला है कि शख्स कोरोना वायरस से संक्रमित नहीं था। साथ ही उस इलाके में रह रहे लोगों से कहा है कि उन्हें घबराने की जरुरत नहीं है। गोपालकृष्ण मड़ीवाला (56) ने खुद को फाँसी लगा ली थी क्योंकि उन्हें यह शक था कि वह कोरोना वायरस की चपेट में आ गए हैं। मरने से पहले उन्होंने एक चिट्ठी भी लिखी है, जिसमें उन्होंने अपने परिवार से सुरक्षित रहने के लिए कहा है।

गौरतलब है कि दुनिया भर में अब तक छह लाख से ज़्यादा लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके हैं जबकी मरने वालों की संख्या 30,000 के पार हो चुकी है। वहीं, भारत में कोविड-19 के मामलों की संख्या 979 से अधिक हो चुकी है और वायरस के संक्रमण के कारण अब तक 25 लोगों को अपनी जान गँवानी पड़ी है।

भारत में 22 राज्यों के 75 ज़िलों में कोरोना वायरस के संक्रमण की पुष्टि हुई है, जिनमें से महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल, दिल्ली-एनसीआर और उत्तर प्रदेश सबसे अधिक प्रभावित हैं। फिलहाल कोरोवा वायरस के प्रसार को कम करने के लिए सरकार ने पूरे देश में लॉकडाउन कर दिया है ताकि, ये राज्यों में तेजी से ना फैल सके। 

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

बेचे जाने और लीज पर देने का अंतर भूल बैठे हैं अखिलेश यादव, JPNIC ‘बिक गया’ या सिर्फ लीज पर गया? सपा प्रमुख के...

JPNIC विवाद में अखिलेश यादव के ‘बेचने’ के आरोप की पड़ताल पर जानिए योगी सरकार का लीज मॉडल, CAG की आपत्तियां और 265 करोड़ से 865 करोड़ तक कैसे पहुँचा प्रोजेक्ट।

UP में तेजी से बढ़ रही है ‘गो-इकोनॉमी’, दूध के साथ-साथ गोमूत्र भी बन रहा है रोजगार का साधन: शैम्पू, साबुन और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर...

सवाल उनसे है जो गाय, गोबर और गौमूत्र का नाम सुनते ही मजाक बनाने लगते हैं- जब यही व्यवस्था किसान का खर्च घटाकर उसकी आय बढ़ा रही है और तो उपहास किस बात का है?
- विज्ञापन -