Tuesday, August 3, 2021
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केरल में विकराल होती नई समस्या: आत्महत्याओं का सिलसिला जारी, कोरोना ने 1 तो शराबबंदी ने लिए 9 जान

शुक्रवार को त्रिशूर के सनोज और कोच्चि के मुरली ने शराब न मिलने से पैदा हुए अवसाद के कारण आत्महत्या कर ली थी। दारू न मिलने के कारण प्रदेश में शुरू हुआ आत्महत्याओं का दौर इन्हीं दो दुर्भाग्यपूर्ण मौतों के साथ शुरू हुआ। जिसके बाद शनिवार को कन्नूर के विजिल, कोल्लम के बीजू और सुरेश तथा कोच्चि के वासु के सुसाइड की खबर आई। जबकि तिरुवनंतपुरम के कृष्णनन कुट्टी ने रविवार को आत्महत्या कर ली।

कोरोना महामारी के चलते 21 दिनों के घोषित देशव्यापी लॉकडाउन ने केरल में एक दूसरी ही त्रासदी को जन्म दे दिया है, जहाँ शराब की दुकानें बंद होने के कारण होतीं आत्महत्याओं का सिलसिला थमने का नाम ही नहीं ले रहा। केरल में अब तक कोरोना संक्रमण के चलते जहाँ सिर्फ एक मौत हुई है वहीं शराब न मिलने के कारण नौ लोगों की जानें जा चुकीं हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इन नौ में से सात लोगों ने जहाँ आत्महत्या की है, तो एक-एक जान क्रमशः कार्डियक अरेस्ट और आफ्टर शेव लोशन पीने के कारण गई है। केरल में अब तक 234 COVID-19 केसेस में से सिर्फ एक की मौत हुई है। लेकिन हर तरह की शराब की दुकानों, बार, होटल्स, देशी दारु की दुकानों आदि को बंद किए जाने से राज्य एक अलग ही संकट में फँसता दिख रहा है। केरल में प्रति व्यक्ति अल्कोहल की खपत देश में सबसे ज्यादा है।

शुक्रवार को त्रिशूर के सनोज और कोच्चि के मुरली ने शराब न मिलने से पैदा हुए अवसाद के कारण आत्महत्या कर ली थी। दारू न मिलने के कारण प्रदेश में शुरू हुआ आत्महत्याओं का दौर इन्हीं दो दुर्भाग्यपूर्ण मौतों के साथ शुरू हुआ। जिसके बाद शनिवार को कन्नूर के विजिल, कोल्लम के बीजू और सुरेश तथा कोच्चि के वासु के सुसाइड की खबर आई। जबकि तिरुवनंतपुरम के कृष्णनन कुट्टी ने रविवार को आत्महत्या कर ली।

शराब बंदी की जाए या नहीं, इस पर हफ्तों तक पशोपेश में रहने के बाद केरल की वामपंथी सरकार ने पिछले हफ्ते ही बार और राज्य सरकार से लाइसेंस प्राप्त शराब की दुकानों को बंद किया था। जिसके बाद राज्य के अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवा पर, जो कि पहले से ही कोरोना संक्रमण के चलते दबाव में है- आजकल शराब के लती लोगों में, शराब न मिल पाने के कारण आई मानसिक समस्याओं से भी जूझ रही है।

जिसके कारण पी.विजयन सरकार ने स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए कई गाइडलाइन्स जारी की हैं। जिनके अंतर्गत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को कहा गया है कि वे इस तरह शराब की लत से संबंधित अवसाद के ज्यादातर मामलों को देखें जिससे बड़े अस्पतालों में इनके कारण बोझ न बढ़े। इसके साथ-साथ राज्य के मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम की नोडल अधिकारी किरण पी.एस ने बताया कि प्रत्येक जिला अस्पताल में 10-20 बेड शराब की लत छुड़वाने के लिए आए मरीजों के लिए तैयार रखने होंगे।

इसके अलावा पी विजयन ने शनिवार को यह भी कहा है कि शराब के आदी लोगों को डॉक्टर के पर्चे पर सरकार दारू उपलब्ध करवाएगी।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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