गैंगरेप पीड़िता की अर्ध-नग्न लाश: टूटी उंगलियाँ, आँखें बाहर निकली हुईं – शाबोद्दीन, शेख बाबू, मकदूम ने कबूला जुर्म

"आरोपित उस गाँव से ताल्लुक रखते हैं, जो मुस्लिम बहुल है और गोंड भाषा को उर्दू के साथ मिला कर बोलते हैं। हम उनके लिए सार्वजनिक फाँसी से कम कुछ नहीं चाहते।"

हैदराबाद में 26 वर्षीय पशु चिकित्सक प्रीति रेड्डी (बदला हुआ नाम) के साथ गैंगरेप और फिर उनके शव को जला देने की ख़ौफ़नाक वारदात को अंजाम देने के तीन दिन पहले, उसी तेलंगाना में एक दलित महिला का बलात्कार किया गया था और बड़ी बेरहमी से पीड़िता की हत्या भी कर दी गई थी।

इस मामले में तीन आरोपितों को गिरफ़्तार किया गया है और उन्होंने अपने अपराध को क़बूल कर भी लिया है। वहीं, पीड़ित परिवार का कहना है कि पुलिस उन्हें पीड़िता की पोस्टमार्टम रिपोर्ट देने से मना कर रही है क्योंकि रिपोर्ट में कुछ ऐसा है, जिसे शायद छिपाने का प्रयास किया जा रहा है। जहाँ एक तरफ हैदराबाद गैंगरेप की घटना पूरे देश को पता है वहीं, यह इस घटना के बारे में शायद बहुत कम लोग ही जानते होंगे। ऐसा इसलिए क्योंकि इस घटना को मीडिया में बहुत कम कवरेज मिली है।

30 वर्षीय गीता (बदला हुआ नाम) का परिवार, निर्मल ज़िले के खानपुर मंडल के गोसम्पल्ली गाँव का रहने वाला है। लेकिन यह अपने पति-बच्चों के साथ यहाँ नहीं रहती थीं। ये खुद, इनके पति और दो बच्चे अपने गाँव से 100 किलोमीटर दूर एक किराए के मकान में रहते थे। आजीविका के लिए इनका परिवार जहाँ रहता था, वो आसिफाबाद ज़िले (पहले इस जिले का नाम आदिलाबाद था) के लिंगापुर मंडल में स्थित है।

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पीड़िता अपने पति (38 साल के) की तरह सड़क पर घूम-घूम कर गुब्बारे और महिलाओं के लिए कम दाम वाले साज-सज्जा का सामान बेचती थी। 25 नवंबर की सुबह, उनके पति टेकू गोपी को वो एकांत स्थान पर अर्ध-नग्न अवस्था में मृत मिलीं। शरीर पर कई चोट के निशान भी थे। इससे पहले रात में ही गोपी ने लिंगापुर पुलिस स्टेशन में अपनी पत्नी के लापता होने की शिक़ायत दर्ज कराई थी।

शव मिलने के बाद FIR किया गया। इसमें दर्ज गोपी के बयान के अनुसार वह और पीड़िता (उनकी पत्नी) अपने-अपने काम काम के लिए 24 नवंबर को सुबह 6 बजे घर से निकले थे।

गोपी ने बताया कि उन्होंने अपनी पत्नी को एलापेटार में ड्रॉप किया और खुद मोदीगुडा चले गए। हमेशा की तरह जब वो अपनी पत्नी को दोपहर 2 बजे लेने के लिए एलापेटार लौटे, तो वो वहाँ नहीं मिलीं। इस दौरान उनका मोबाइल भी स्विच ऑफ़ था। उन्होंने अपनी पत्नी की खोजबीन की, लेकिन कहीं कुछ पता नहीं चला। इसके बाद गोपी ने उसी रात, पुलिस में अपनी पत्नी के लापता होने की शिक़ायत दर्ज कराई।

अगली सुबह, वह और कुछ ग्रामीण फिर से तलाश में निकले। आख़िरकार उन्हें सुबह क़रीब 9 बजे लिंगनापुर मंडल के रामनायकटांडा और इलापार गाँवों के बीच उनका शव मिला। उनकी साड़ी घुटनों से ऊपर खींची हुई थी, ऊपरी शरीर पर कोई कपड़ा नहीं था, उनके सिर, गले और हाथों पर गंभीर चोट के निशान थे।

बयान में आगे कहा गया है कि गीता और गोपी बडगा जंगम (अनुसूचित जाति) से संबंध रखते हैं। गोपी को इस जघन्य अपराध के पीछे शाबोद्दीन, बाबू और मकदूम नाम के तीन लोगों पर शक था, क्योंकि ये तीनों भी उस दौरान अपने घरों से ग़ायब थे।

गोपी अपनी पत्नी के साथ हुए इस जघन्य अपराध के बाद से गोसांपल्ली में रह रहे हैं। उन्होंने स्वराज्य को बताया कि इस ख़ौफ़नाक वारदात को अंजाम देते वक़्त पीड़िता के चेहरे और उनके शरीर पर बुरी तरह से कई वार किए गए। उनकी आँखें उभरी हुई थीं, पत्थर से बार-बार वार के कारण शायद उनकी उंगलियाँ टूट गईं थी। गोपी ने यह भी बताया कि उनकी पत्नी के पैर भी अजीब तरीके से मुड़े हुए थे।

गोपी को घटना-स्थल पर प्लास्टिक के दस्ताने भी मिले। उन्होंने बताया,

“आरोपितों ने उनकी (पीड़िता) गला दबाकर हत्या कर दी, शायद उन्होंने प्लास्टिक के दस्तानों का इस्तेमाल इसलिए किया, जिससे उन्हें पकड़ा नहीं जा सकेगा।”

गोपी ने कहा, “केवल पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से ही उनकी मौत का कारण पता चल सकता है।” लेकिन, लिंगायत पुलिस स्टेशन में उन्होंने जब-जब पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बारे में पूछा तो उन्हें बार-बार वहाँ से भगा दिया गया।

इस मामले में गोसांपल्ली के सरपंच टेकू गंगाराम ने भी कहा कि पीड़िता की गर्दन में चोट के निशान थे, जिससे यह पता चलता है कि शायद उनकी गला घोंटकर हत्या कर दी गई है। लेकिन, वो इस बात की पुष्टि के लिए पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतज़ार कर रहे हैं।

समाचार पोर्टल द न्यूज मिनट की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि पुलिस के अनुसार, आरोपित- शेख बाबू (35), शेख शाबोद्दीन (30) और शेख मकदूम (40) ने बलात्कार और हत्या की बात क़बूल कर ली है। पुलिस ने उन पर हत्या और बलात्कार के साथ-साथ अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। तीनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

लिंगापुर के सब-इंस्पेक्टर ने बताया कि आरोपितों ने पीड़िता पर तब हमला किया, जब वो एक गाँव में अकेले घूम रही थीं। इसके बाद उन्होंने मिलकर बलात्कार और हत्या की वारदात को अंजाम दिया।

स्थानीय बडगा जंगम जाति के संगठन के महासचिव टेकु मधु ने स्वराज्य को बताया कि आरोपित एलापेटार गाँव से ताल्लुक रखते हैं, जो मुस्लिम बहुल है और गोंड भाषा को उर्दू के साथ मिला कर बोलते हैं। उन्होंने बताया, “हम उनके लिए सार्वजनिक फाँसी से कम कुछ नहीं चाहते।”

गोपी ने घटना के बारे में ज्यादा कुछ नहीं बताया। गंगाराम और अन्य ग्रामीणों ने कहा कि अपराध के एक दिन बाद, उन्होंने खुद पर मिट्टी का तेल डाला और ख़ुद को आग लगाने की कोशिश की, लेकिन पड़ोसियों ने समय रहते उन्हें बचा लिया।

एक महिला पड़ोसी ने गोपी के बारे में बताया, “उनकी स्थिति अभी भी स्थिर नहीं है। आत्महत्या करने की सोचने से पहले उन्होंने बच्चों के बारे में भी नहीं सोचा।” महिला ने कहा, “ऐसी त्रासदी भला कौन सहन कर सकता है? अब बच्चों का क्या होगा।” उन्होंने बताया कि उनका एक बच्चा आठ साल का है और दूसरा 10 साल का है।

पीड़िता के भाई ने कहा कि ग़रीब परिवार को एक बड़ा झटका लगा है और मीडिया के माध्यम से उन्होंने सरकार से वित्तीय सहायता की अपील की है। वहीं, एक अन्य पड़ोसी ने कहा, “सरकार की ओर से अब तक किसी ने भी हमसे मुलाक़ात नहीं की है।”

ग्रामीणों ने कहा कि उन्होंने लिंगापुर में दंपति के पड़ोसियों से सुना है कि आरोपित शराबी और नशेड़ी थे। एक आरोपित ने कहा कि उसकी शादी पिछले साल हुई थी और उसकी पत्नी सात महीने की गर्भवती थी।

गोसांपल्ली में महिलाओं ने कहा कि उन्हें घर से बाहर निकलने से बहुत डर लगता है। इनमें से कई महिलाएँ पीड़िता की ही तरह सड़क पर घूम-घूम कर काम करती हैं। एक महिला ने बताया कि पीड़िता बहुत सुंदर महिला थीं इसलिए आरोपितों की नज़र उनके ऊपर कई दिनों से थी। इस वारदात को योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया गया है।

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