Tuesday, July 23, 2024
Homeदेश-समाजबचपन में पहुँच गया था गाँव से 1,700 किमी दूर, एक वीडियो कॉल से...

बचपन में पहुँच गया था गाँव से 1,700 किमी दूर, एक वीडियो कॉल से 13 साल बाद घर लौटा झारखंड का एक युवक

दीपक देहरी बीकानेर के एक बाल गृह में रहने लगा। वहाँ उसने अपने जीवन के 13 साल बिताए। अक्सर दीपक अपने घर को याद करता था लेकिन वह अपने घर के बारे में पुख्ता जानकारी नहीं दे पाता था। दीपक के 18 वर्ष के होने के बाद....

अपने घर से 1700 किमी दूर रह रहा एक युवक 13 सालों बाद अपने घर लौट सका और वो भी एक वीडियो कॉल की मदद से। हम बात कर रहे हैं झारखंड के रहने वाले 18 वर्षीय दीपक देहरी की जो 5 साल की उम्र में अपने घर से अलग हो गया था।

झारखंड के रानीश्वर थाना क्षेत्र बोड़ाबथान गाँव के रहने वाले दीपक के पिता गोकुल देहरी की मृत्यु तब हो गई थी जब दीपक मात्र पाँच साल का था। पिता की मौत के बाद दीपक मसानजोर थाना क्षेत्र के धावाडंगाल में रहने लगा। इसके बाद दीपक की माँ ने उसे छोड़ दिया और और दूसरी शादी कर ली। कुछ दिनों के बाद दीपक अपनी मौसी के साथ उत्तर प्रदेश के हरदोई में रहने लगा।

मसानजोर थाना प्रभारी चंद्रशेखर चौबे ने बताया कि घर की याद आने पर दीपक देहरी बिना बताए अपनी मौसी के घर से निकल गया। उसे अपने घर जाना था लेकिन वह जानकारी के अभाव में एक दूसरी ट्रेन में बैठ गया और बीकानेर पहुँच गया।

इसके बाद दीपक देहरी बीकानेर के एक बाल गृह में रहने लगा। वहाँ उसने अपने जीवन के 13 साल बिताए। अक्सर दीपक अपने घर को याद करता था लेकिन वह अपने घर के बारे में पुख्ता जानकारी नहीं दे पाता था। दीपक के 18 वर्ष के होने के बाद बाल गृह के इंचार्ज अरविन्द ने मसानजोर थाना प्रभारी चंद्रशेखर चौबे से संपर्क किया।

थाना प्रभारी चौबे ने दीपक के बताए गए स्थानों के विवरण के अनुसार वीडियो कॉल के माध्यम से उसे वो स्थान दिखाए। दीपक तुरंत ही मसानजोर बाँध और उसके आसपास के इलाके को पहचान लिया जहाँ उसके सगे-संबंधी रहा करते थे। दीपक के मामा ने भी उसे पहचान लिया।

बीकानेर से साथ आए दो पुलिसकर्मियों ने थाना प्रभारी चौबे और अन्य पुलिस अधिकारियों की उपस्थिति में दीपक को उसके परिजनों को सौंप दिया। दीपक अब गाँव में रहकर ही अपने लोगों के बीच अपनी आजीविका चलाना चाहता है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

20000 महिलाओं को रेप-मौत से बचाने के लिए जब कॉन्ग्रेसी मंत्री ने RSS से माँगी थी मदद: एक पत्र में दर्ज इतिहास, जिसे छिपा...

पत्र में कहा गया था कि आरएसएस 'फील्ड वर्क' के लिए लोगों को अत्यधिक प्रशिक्षित करेगा और संघ प्रमुख श्री गोलवरकर से परामर्श लिया जा सकता है।

कागज तो दिखाना ही पड़ेगा: अमर, अकबर या एंथनी… भोले के भक्तों को बेचना है खाना, तो जरूरी है कागज दिखाना – FSSAI अब...

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि कांवड़ रूट में नाम दिखने पर रोक लगाई जा रही है, लेकिन कागज दिखाने पर कोई रोक नहीं है।

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -