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डाटा ने लिबरल प्रोपेगेंडा को फिर किया धुआँ-धुआँ, बताया- दिवाली से नहीं प्रदूषित हुई दिल्ली की हवा: हर साल की तरह इस बार भी पराली जलाने से AQI बिगड़ा

विशेषज्ञ कहते हैं, पंजाब और हरियाणा में पराली जलाना और मौसम की स्थिति हवा को जहरीला बनाती है। 21 अक्टूबर को 268 पराली जलाने की घटनाएँ हुईं हैं।

दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) सालों से दिवाली के दौरान ‘बेहद खराब’ और ‘गंभीर’ श्रेणियों के बीच रहा, चाहे पटाखों पर पूरी तरह प्रतिबंध हो, सीमित अनुमति हो या इस साल की तरह ‘ग्रीन पटाखों’ की इजाजत हो।

लिबरल्स और प्रोपेगेंडा फैलाने वालों के लिए दिवाली ‘मजाक का पर्व’ बन गया है। हर साल वे हिंदुओं पर पटाखे जलाने का दोष लगाते हैं, कहते हैं कि इससे हवा की गुणवत्ता खराब होती है।

फूड शो से मशहूर हुए रॉकी सिंह नाम के यूजर ने लिखा, “दिल्ली में कल हवा का प्रदूषण खतरनाक स्तर पर था।”

फोटोग्राफर अतुल कासबेकर ने लिखा, “धर्म के नाम पर उत्तर भारत के लोग अपनी सेहत को जानबूझकर नष्ट कर रहे हैं।”

एक्स यूजर द प्रोटागोनिस्ट ने लिखा, “तुम सब बेवकूफों ने जिंदगी दूभर कर दी। जानकारी के लिए बता दूँ, भारत में दमा से होने वाली वैश्विक मौतों का लगभग 46% हिस्सा है और हर साल भारत में करीब 2 लाख लोग दमा से मरते हैं।” इसके साथ ही उसने अस्थमा इनहेलर की एक तस्वीर भी शेयर की।

एक्स यूजर जतिन गुप्ता ने लिखा, “दिल्ली मूर्खों और बेवकूफों से भरा शहर है। हवा अब साँस लेने लायक नहीं रही क्योंकि कुछ नासमझ लोग सोचते हैं कि पटाखे जलाना=दिवाली। बस बेवकूफी। साफ-साफ बेवकूफी।”

पटाखों पर प्रतिबंध के बावजूद AQI में कोई बदलाव नहीं: दिल्ली AQI डेटा

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के 21 अक्टूबर के बुलेटिन के अनुसार, दिल्ली का AQI 351 था, जबकि 20 अक्टूबर को यह 345 था। ऑपइंडिया ने 2021 से लेकर दिवाली के एक दिन पहले और अगले दिन के डेटा की जाँच की।

साल 2024 में दिवाली 31 अक्टूबर को मनाई गई। उस दिन AQI 328 था और अगले दिन यानी 1 नवंबर को AQI 339 था, जैसा कि CPCB के डेटा में है।

साल 2023 में दिवाली 12 नवंबर को मनाई गई। उस दिन AQI 218 था और अगले दिन यानी 13 नवंबर को AQI 358 था।

साल 2022 में दिवाली 24 अक्टूबर को मनाई गई। उस दिन AQI 312 था और अगले दिन यानी 25 अक्टूबर को AQI 302 था।

साल 2021 में दिवाली 4 नवंबर को मनाई गई। उस दिन AQI 382 था और अगले दिन यानी 5 नवंबर को AQI 462 था।

प्रतिबंधों में बदलाव के बावजूद डेटा में कोई खास सुधार नहीं दिखता, जो बताता है कि दिल्ली की जहरीली हवा के लिए दिवाली उत्सव से ज्यादा अन्य कारक जिम्मेदार हैं।

भाजपा ने AAP शासित पंजाब पर हवा खराब करने का आरोप लगाया

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 21 अक्टूबर 2025 को आम आदमी पार्टी (AAP) की पंजाब सरकार पर आरोप लगाया कि उसने पराली जलाने की अनियंत्रित घटनाओं से दिल्ली के प्रदूषण को और बढ़ाया। भाजपा के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने एक्स पर पोस्ट किया कि पंजाब के किसान दिवाली के दौरान अपनी पराली जलाते हैं ताकि इसे पटाखों का धुआँ समझा जाए और पुलिस कार्रवाई से बचा जाए।

मालवीय ने लिखा, “दिल्ली-एनसीआर की खराब हवा की गुणवत्ता के लिए दीपावली को दोष मत दो।” उन्होंने कहा कि AAP पराली जलाने को प्रोत्साहन देकर हिंदू पर्व को बदनाम कर रही है।

पराली जलाने के बारे में डेटा क्या कहता है?

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के CREAMS डेटा के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में पराली जलाने की घटनाएँ काफी बढ़ी हैं। 21 अक्टूबर को 268 पराली जलाने की घटनाएँ दर्ज की गईं, जिनमें से 62 पंजाब से और 103 उत्तर प्रदेश से थीं।

इसी तरह 20 अक्टूबर को 217 घटनाएँ थीं, जिनमें 45 पंजाब से और 77 उत्तर प्रदेश से थीं। 19 अक्टूबर को पंजाब में 67 और उत्तर प्रदेश में 12 घटनाएँ थीं। साफ है कि पराली जलाने की घटनाएँ बढ़ी हैं और पंजाब के अलावा उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों के किसानों ने भी हवा के प्रदूषण में बड़ा योगदान दिया है।

खास बात यह है कि पराली जलाने का पीक सीजन अभी शुरू हुआ है और अगर राज्य नियमों को लागू करने में नाकाम रहे तो आने वाले दिनों में स्थिति और खराब होगी।

हालाँकि इस साल पंजाब में उत्तर प्रदेश की तुलना में पराली जलाने की घटनाएँ कम हैं, लेकिन पिछले साल के डेटा से पता चलता है कि पंजाब इस मामले में शीर्ष राज्य था। इसके अलावा ‘पराली जलाने का सीजन’ अभी शुरू हुआ है और आने वाले दिनों में पंजाब उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों को पीछे छोड़ सकता है।

‘ग्रीन दिवाली’ का मिथक और AQI स्तरों में कोई बदलाव नहीं

सालों से डेटा साफ तस्वीर पेश करता है। जब कोर्ट ने पटाखों पर पाबंदी लगाई और दिल्ली ने ‘ग्रीन दिवाली’ को बढ़ावा दिया, तब भी प्रदूषण के स्तर में कोई खास बदलाव नहीं आया। AQI के आँकड़ों में बहुत कम अंतर दिखता है।

विशेषज्ञों ने बताया कि दिवाली का समय पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने के पीक सीजन के साथ मेल खाता है। फसल के अवशेषों की आग अक्टूबर और नवंबर में कम हवा की गति और तापमान उलटने की स्थिति के साथ मिलकर, प्रदूषकों को वातावरण में फंसाती है, जिससे दिल्ली की हवा और खराब होती है। दिवाली से पहले भी AQI ‘खराब’ श्रेणी में रहता है, जो दिखाता है कि शहर का प्रदूषण संकट सिर्फ पटाखों की वजह से नहीं है।

सोशल मीडिया पर सैकड़ों नहीं बल्कि हजारों संदेश हिंदुओं और दिवाली को खराब हवा की गुणवत्ता के लिए दोषी ठहराते हैं। लेकिन डेटा एक अलग कहानी कहता है। हिंदू पर्व को प्रदूषण के लिए दोष देने के बजाय राष्ट्रीय राजधानी में बढ़ते वायु प्रदूषण और हवा की गुणवत्ता गिरने के असली कारण की जाँच जरूरी है। दिल्ली सरकार ने 24 से 26 अक्टूबर के बीच क्लाउड सीडिंग करके प्रदूषण कम करने की योजना बनाई है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या आर्टिफिशियल बारिश उत्तर भारत में बढ़ती पराली जलाने की घटनाओं के बीच प्रदूषण को कम करने में मदद करेगी।

मूल रूप से ये रिपोर्ट अनुराग ने अंग्रेजी में लिखी है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

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Anurag
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Anurag is a Chief Sub Editor at OpIndia with over twenty one years of professional experience, including more than five years in journalism. He is known for deep dive, research driven reporting on national security, terrorism cases, judiciary and governance, backed by RTIs, court records and on-ground evidence. He also writes hard hitting op-eds that challenge distorted narratives. Beyond investigations, he explores history, fiction and visual storytelling. Email: [email protected]

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