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दंगों को लेकर 48 FIR-106 गिरफ्तार, हेट स्पीच पर अभी एक्शन नहीं: HC में अब 13 अप्रैल को सुनवाई

हिंसा में अब तक 34 लोगों के मरने की पुष्टि हो चुकी है। परिजनों को शव के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। पुलिस-प्रशासन का कहना है कि पोस्टमॉर्टम के बाद ही बॉडी दी जाएगी। बोर्ड गठित नहीं होने से पोस्टमॉर्टम में देरी हो रही है।

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़की हिंसा को लेकर लगातार दूसरे दिन गुरुवार को दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। पुलिस ने अदालत को बताया कि अब तक इस मामले में 48 एफआईआर दर्ज किए जा चुके हैं। 106 गिरफ्तारियॉं हुई है। साथ ही पुलिस ने कहा कि मौजूदा हालात को देखते हुए भड़काऊ बयान को लेकर किसी पर केस नहीं दर्ज करने का फैसला लिया है।

दिल्ली पुलिस की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता ने केवल 3
भड़काऊ भाषणों का जिक्र किया है। ऐसे कई भाषण मौजूद हो सकते हैं। उन्होंने कोर्ट से हालात सामान्य होने तक हस्तक्षेप नहीं करने और केंद्र सरकार को भी पार्टी बनाने की गुजारिश की।

मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायाधीश सी हरि शंकर की पीठ ने केंद्र सरकार को पक्षकार बनाते हुए जवाब देने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। अगली सुनवाई 13 अप्रैल को होगी।

इससे पहले बुधवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने भड़काऊ भाषण को लेकर सख्त टिप्पणी की थी। अदालत में कपिल मिश्रा के बयान का विडियो भी चलाया गया था। याचिकाकर्ता ने भाजपा नेता मिश्रा, पार्टी सांसद प्रवेश वर्मा और केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर के बयानों का अदालत के सामने हवाला दिया था।

हिंसा में अब तक 34 लोगों के मरने की पुष्टि हो चुकी है। परिजनों को शव के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। पुलिस-प्रशासन का कहना है कि पोस्टमॉर्टम के बाद ही बॉडी दी जाएगी। बोर्ड गठित नहीं होने से पोस्टमॉर्टम में देरी हो रही है। इस मामले में वकील महमूद पारचा की याचिका पर शुक्रवार को कोर्ट में सुनवाई होगी।

यहाँ बता दें, उत्तर-पूर्वी में दिल्ली हिंसा के मद्देनजर अबतक 106 स्थानीय लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। ये गिरफ्तारी सीसीटीवी फुटेज के आधार पर हुई है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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