Wednesday, April 1, 2020
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मेट्रो में मुफ्त सफर से लगेगा ₹1560 करोड़ का चूना, फ्री राइड का कानून में नहीं है कोई प्रावधान

DMRC ने दिल्ली सरकार को सौंपे अपने प्रस्ताव में कहा कि महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा को लागू करने से लगभग 1560 करोड़ रुपए का वार्षिक ख़र्च होगा, इसमें से 11 करोड़ रुपए का ख़र्च फीडर बसों पर आएगा।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

पिछले दिनों दिल्ली सरकार ने मेट्रो, डीटीसी बसों और क्लस्टर बसों में महिलाओं के लिए मुफ़्त सफर की घोषणा की थी। सरकार अब मेट्रो की फीडर बसों में भी महिलाओं के लिए मुफ़्त सफर की तैयारी में है। वर्तमान में, दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) के पास 174 फीडर बसे हैं और जल्द ही 905 फीडर बसों को जोड़े जाने की योजना है। भारतीय जनता पार्टी ने इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ आम आदमी पार्टी पर निशाना साधा है और कहा है कि इस योजना को आगामी विधानसभा चुनावों के लिए वोटर्स को लुभाने का प्रयास बताया है।

DMRC ने दिल्ली सरकार को सौंपे अपने प्रस्ताव में कहा कि महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा को लागू करने से लगभग 1560 करोड़ रुपए का वार्षिक ख़र्च होगा, इसमें से 11 करोड़ रुपए का ख़र्च फीडर बसों पर आएगा।

बुधवार (12 जून) को, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि दिल्ली सरकार द्वारा DMRC को इस रकम का भुगतान किया जाएगा। DMRC ने अपनी 8 पेज की रिपोर्ट में, इस बात का भी ज़िक्र किया कि महिलाओं को मुफ़्त सफर कराने वाली इस योजना का भविष्य में दुरुपयोग भी हो सकता है। DMRC ने क़ानूनी सलाहकार से भी चर्चा की और यह जानने का प्रयास किया कि क्या इस तरह की वित्तीय सब्सिडी या अनुदान राज्य सरकार द्वारा दिल्ली मेट्रो रेलवे (संचालन और रखरखाव) अधिनियम, 2002 के तहत यात्रियों के एक विशेष वर्ग को दी जा सकती है?

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लीगल टीम ने इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण अधिनियम 1988 और एयरपोर्ट इकोनॉमिक रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया एक्ट, 2008 जैसे क़ानूनों का भी विश्लेषण किया ताकि यह निष्कर्ष निकाला जा सके कि मेट्रो अधिनियम के तहत इस तरह का कोई प्रावधान मौजूद है कि नहीं? इस विश्लेषण से पता चला कि इस तरह का कोई प्रावधान नहीं है।

इससे पहले, DMRC ने सरकार के सामने मुफ़्त सफर की व्यवस्था को लागू करने के लिए दो प्रस्ताव रखे थे। इसमें से पहले प्रस्ताव में योजना को लंबे समय के लिए लागू करने के लिए तक़रीबन 12 महीने से अधिक समय लगने की बात कही गई थी, क्योंकि इस व्यवस्था को कार्यान्वित करने के लिए सॉफ्टवेयर बदलना पड़ेगा। वहीं, दूसरे प्रस्ताव में अस्थायी रूप से लागू करने के लिए गुलाबी टोकन व्यवस्था के ज़रिए 8 महीने का समय माँगा।

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