Sunday, December 6, 2020
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1992 अजमेर रेपकांड और ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती के अपमान का आरोप: ‘सत्य सनातन’ के अंकुर आर्य पर FIR की कहानी

"मेरे वीडियो के साथ छेड़छाड़ कर के उसे पेश किया गया है। मैंने अजमेर में 1992 में हुए रेपकांड की बात की, जिसे ख्वाजा का अपमान बता दिया गया। ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह ने उस सलीम चिश्ती की दुआ कबूल की है, जिसने 200 से भी ज्यादा लड़कियों का बलात्कार किया।"

देश में एक सिलसिला सा चल पड़ा है। इसके तहत विपक्ष द्वारा शासित राज्यों में उन लोगों पर FIR कर दी जा रही है, जिनके विचार से वहाँ की सरकार या सरकार में प्रभाव रखने वाले लोग असहमत हों। ऐसी ही एक FIR ‘सत्य सनातन’ नामक यूट्यूब चलाने वाले आचार्य अंकुर आर्य के खिलाफ राजस्थान के अजमेर में हुई है। राजस्थान में अशोक गहलोत के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस की सरकार चल रही है।

ऑपइंडिया ने इस सम्बन्ध में अंकुर आर्य से बातचीत की। उन्होंने इस FIR को लेकर अपनी बात रखी। दरअसल, अजमेर स्थित ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती दरगाह के अफसान चिश्ती ने एक ट्वीट किया था, जिसमें उन्होंने अंकुर पर कई आरोप लगाए थे। वहाँ उन्हें कुछ लोगों ने सलाह दी कि वो इस मामले में अंकुर पर FIR कर सकते हैं। बस फिर क्या? कॉन्ग्रेसी सरकार की मशीनरी में उन्होंने तुरंत ही ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती के अपमान का मामला दर्ज करा दिया।

अब यहाँ राजनीति समझें। पहले अफसान ने राजस्थान के मुख्यमंत्री कार्यालय से दरख्वास्त की थी कि अंकुर के खिलाफ मामला दर्ज किया जाए। उन्होंने अपनी शिकायत में कहा था कि अजमेर दरगाह को बदनाम करने और ख्वाजा मोईनुद्दीन का अपमान करने के लिए अंकुर ने एक वीडियो शूट किया है, इसलिए उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। शिकायत में वो एक यूट्यूब वीडियो की बात कर रहे थे, जो अंकुर के चैनल पर था। इसके बाद दिल्ली के पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा सहित देश भर से अंकुर के समर्थन में लोगों ने ट्रेंड चलाया।

सोशल मीडिया में काफी देर तक ‘वी सपोर्ट अंकुर आर्य’ नंबर एक पर ट्रेंड होता रहा। अब बात करते हैं, उस वीडियो की, जिसे लेकर बवाल मचा हुआ है। इस वीडियो में यति नरसिंहानन्द सरस्वती भी थे। इसलिए उनके खिलाफ भी FIR दर्ज करवा दी गई है। उन पर भी ख्वाजा और अजमेर दरगाह के अपमान का आरोप लगा है। साथ ही अंकुर के अप्रैल 2019 के एक वीडियो के आधार पर दावा किया गया कि उन्होंने ख्वाजा का अपमान किया है।

शिकायत में यति नरसिंहानंद सरस्वती पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती को किन्नर बताया है। बता दें कि अजमेरशरीफ का दरगाह उनके नाम पर ही है, जहाँ हिन्दू भी चादर चढ़ाने जाते रहे हैं। अक्सर बॉलीवुड सेलेब्स को वहाँ देखा जाता है। जब हमने अंकुर से पूछा कि क्या ये सच है तो उन्होंने बताया कि वीडियो को गलत सन्दर्भ में पेश किया गया है। उनकी नज़र में वीडियो को एडिट कर के उससे छेड़छाड़ की गई है।

ये सब तब से शुरू हुआ, जब अंकुर ने देवी चित्रलेखा नामक कथावाचक द्वारा व्यास पीठ से नमाज का गुणगान करने का विरोध किया था। इसी तरह उन्होंने उन तमाम कथावाचकों के खिलाफ विरोध दर्ज कराया था, जिन्होंने कथा के नाम पर इस्लाम का गुणगान किया था। इस सम्बन्ध में उन्होंने यति सरस्वती के साथ एक वीडियो बनाया था, जिसमें सरस्वती ने भी अपनी राय रखी थी। देवी चित्रलेखा ने एक वीडियो शूट कर के इन आरोपों का जवाब दिया था और बदले में कई अन्य आरोप लगाए थे।

अंकुर स्वामी रामेदव के गुरुकुल से पढ़े हुए हैं। उन्होंने बताया कि अपने ही धर्म के कथावाचकों के ‘शुद्धिकरण’ के लिए उनके खिलाफ बोलना शुरू किया लेकिन व्यास पीठ से ‘अली मौला’ गाने वाले मोरारी बापू के वयोवृद्ध होने के कारण उन्होंने उन पर टिप्पणी नहीं की और यति नरसिंहानन्द सरस्वती से इस सम्बन्ध में राय ली और उनका वीडियो बनाया। इस वीडियो में यति सरस्वती ने बताया कि हमारा इतिहास ही भूलों से भरा पड़ा है।

उन्होंने ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती को दिल्ली में पहली बार इस्लामिक शासन के लिए जिम्मेदार ठहराया। बकौल यति नरसिंहानंद सरस्वती, वो ख्वाजा ही थे, जिन्होंने मोहम्मद गौरी को दिल्ली पर आक्रमण के लिए आमंत्रित किया था। बता दें कि शिकंजे में आने के बावजूद पृथ्वीराज चौहान ने गौरी को कई बार छोड़ दिया था लेकिन अंत में एक बार मोहम्मद गौरी विजयी रहा और उसने दिल्ली में इस्लामिक राज की स्थापना कर दी थी।

इसी का जिक्र करते हुए यति सरस्वती ने ‘ख्वाजा’ शब्द को लेकर टिप्पणी की। उन्होंने बताया कि फारसी में ख्वाजा शब्द का मतलब किन्नर होता है। साथ ही उन्होंने उन सब लोगों को अपना दुश्मन बताया, जो कथा के नाम पर इस्लामिक चीजों का महिमामंडन करते हैं।

अंकुर कहते हैं कि इन दोनों हिस्सों को अलग-अलग कर के प्रपंच फैलाया गया। यति सरस्वती ने अपने ही बिरादरी के कथावाचकों को अपना दुश्मन बताया था, लेकिन बकौल अंकुर, इसे ऐसे दिखाया गया- ‘ख्वाजा किन्नर है और यहाँ ये सभी मेरे दुश्मन हैं।’ ‘मरुधरा’ ने अपने वीडियो के जरिए ये प्रपंच फैलाया।

अंकुर का कहना है कि जो बात स्वामी यति ने कथावाचकों के लिए कहा था, उसे ऐसे दिखाया गया जैसे उन्होंने इसे समुदाय विशेष और ख्वाजा के लोगों के बारे में कहा था। यति सरस्वती खुद एक कथावाचक हैं और वो भागवत में दक्ष हैं। वो अक्सर भागवत कथा कहते हैं।

हमने अंकुर की बातों की तह तक जाने के लिए और सच्चाई जानने के लिए उस वीडियो को खोज निकाला, जिसमें उन्होंने और यति नरसिंहानंद सरस्वती ने इस सम्बन्ध में बातचीत की थी। हम वो वीडियो नीचे एम्बेड कर रहे हैं, जिसमें आप 13वें मिनट से लेकर 15वें मिनट तक वाला हिस्सा देख सकते हैं। कथावाचकों द्वारा अल्लाह का गुणगान और व्यास पीठ की मर्यादा पर बोलते हुए यति सरस्वती इसमें कहते हैं:

“व्यासपीठ पर अलग अल्लाह का ही नाम लेना है तो फिर राम की पूजा क्यों करें? अल्लाह की ही क्यों न करें सीधा? ये कथाएँ अल्लाह को सर्वोपरि बनाने के लिए हो रही है। मेरा सोचना है कि अल्लाह के नाम पर ही मेरे करोड़ों भाइयों-बहनों का खून बहाया गया। मैं उन सभी को अपना व्यक्तिगत दुश्मन मानता हूँ, जो उस अल्लाह को मानते हैं- चाहे वो मोरारी बापू हों या फिर कोई अन्य कथावाचक जो ऐसा करते हैं।”

अंकुर आर्य और स्वामी यति नरसिंहानंद सरस्वती की बातचीत

इस वीडियो को देखने से स्पष्ट पता चलता है कि यति नरसिंहानंद सरस्वती कथावाचकों से क्षुब्ध होकर उनके लिए बोल रहे थे, मजहब या दरगाह के लिए नहीं। हालाँकि, उन्होंने कई अन्य मुद्दों पर भी बात की थी लेकिन अगर ये वाला हिस्सा एडिट कर के बाहर निकाला जाए तो ऐसा ही लगेगा कि जैसे वो हर उस व्यक्ति के बारे में कह रहे हों, जो अल्लाह को मानता हो। जब सन्दर्भ देखें तो लगता है कि वो मोरारी बापू व अन्य कथावाचकों के लिए ऐसा बोल रहे थे।

अब आते हैं अंकुर के उस पुराने वीडियो पर, जिसे लेकर विवाद हुआ। ये मुद्दा अजमेर में हुए देश के सबसे जघन्य रेपकांड को लेकर था, जिसे चिश्ती के अपमान के रूप में दिखाया गया।

दरअसल, अजमेर में हुए रेपकांड का पूरा खेल वहाँ के कुछ कॉन्ग्रेस नेताओं और ख़ुद को चिश्ती का वंशज बताने वालों ने रचा था। स्थिति ये हो गई थी कि अजमेर की लड़की से शादी करने में लोग हिचकने लगे थे। 200 से भी ज्यादा लड़कियों को ब्लैकमेल कर के उनका बलात्कार किया गया। दोषियों को अब तक सजा नहीं मिल पाई है। कई बच गए। यहाँ तक कि पत्रकारों, फोटो स्टूडियो वालों और पुलिसकर्मियों तक ने ब्लैकमेल कर के लड़कियों का बलात्कार किया था, जिनमें अधिकतर स्कूल-कॉलेज जाने वाली छात्राएँ थीं।

कहते हैं, ये रेप स्कैंडल किसी बड़े परिवार के एक लड़के और 9वीं कक्षा की एक लड़की के बीच प्रेम संबंध से शुरू हुआ था। लड़के के दोस्तों ने उन दोनों की अश्लील तस्वीरें निकाल ली थीं और लड़की को अपने दोस्तों से जान-पहचान कराने को कहा था। फिर तो इसका सिलसिला ही चल पड़ा। बाद में तो पुलिस ने भी माना कि उन्होंने जानबूझ कर खादिमों के विरुद्ध लीगल एक्शन नहीं लिया। पुलिस को डर था कि इससे साम्प्रदायिक तनाव फैलेगा।

इसी मुद्दे को अंकुर ने अपने वीडियो के जरिए उठाया था। इसको लेकर अजमेर के चिश्तियों को बुरा लग गया और उन्हें प्रताड़ित करने के लिए उनके खिलाफ FIR दर्ज करा दी गई। अंकुर बताते हैं कि अजमेरशरीफ दरगाह पर आज भी ट्रांसजेंडरों का एक ‘उर्स’ लगता है, जो खुद को ख्वाजा से जोड़ कर देखते हैं। वो बताते हैं कि इस्लाम में LGBTQ समुदाय के लिए कोई जगह ही नहीं है, इस्लामिक पुस्तकों में उनका क़त्ल वाजिब माना गया है।

साथ ही अंकुर ये भी कहते हैं कि जिन मुल्कों से इस्लाम का प्रादुर्भाव हुआ, वहाँ तो मजार वगैरह का कोई कॉन्सेप्ट था ही नहीं, फिर ये यहाँ क्यों? राम मंदिर और मथुरा के साथ इन मजारों को जोड़ते हुए अंकुर का कहना है कि इन मजारों में से अधिकतर तो हिन्दू मंदिरों को ध्वस्त कर के बनाया गया है। उन्होंने दावा किया कि कई मजारों की आड़ में वेश्यावृत्ति से लेकर ड्रग्स तक के धंधे चल रहे हैं, क्योंकि उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करता। उन्होंने कहा:

“इस्लामिक मुल्कों में कब्रों को भी सामान्य माना जाता है। कब्रों को हटा भी दिया जाता है। पहली बात, मेरी वीडियो के साथ छेड़छाड़ कर के उसे पेश किया गया है। दूसरी बात, मैंने अजमेर में 1992 में हुए रेपकांड की बात की, जिसे ख्वाजा का अपमान बता दिया गया। तीसरा, ख्वाजा का अनुवाद किन्नर होता है। ऐसा हमने तो नहीं कहा? पारसी में ऐसा होता है। ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती के दरगाह ने उस सलीम चिश्ती की दुआ कबूल की है, जिसने 200 से भी ज्यादा लड़कियों का बलात्कार किया।”

ऑपइंडिया से बात करते हुए अंकुर आर्य ने पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी से पूछा कि अपनी सुविधा की हिसाब से वो किसी एक रेप का विरोध करते हैं लेकिन अपनी ही पार्टी के नेताओं और चिश्तियों द्वारा सीरीज में किए गए बलात्कार के खिलाफ क्या उन्होंने कभी कोई कैंडल मार्च निकाला या फिर क्या इसके खिलाफ कभी आवाज उठाई? उन्होंने कॉन्ग्रेस पर भी सवाल दागा कि अजमेर में हुए उस घिनौने अपराध के बारे में पार्टी क्यों कुछ नहीं बोलती?

अंकुर ने बताया कि ऐसे ही एक मजार की खुदाई की गई थी तो उसके नीचे से शिवलिंग निकला था। उन्होंने इसका वीडियो भी ट्वीट किया है। उन्होंने कहा कि वो हिन्दुओं से हमेशा अपील करते हैं कि जब भी वो किसी मजार के पास खड़े होते हैं तो ये ज़रूर सोचें कि वो किसी पवित्र हिन्दू प्रतीक चिह्नों पर पैर रख कर खड़े हैं। उन्होंने कहा कि ये उन्हीं लोगों के मजार होते हैं, जिन्होंने हिन्दुओं का क़त्ल किया है, हिन्दू महापुरुषों को मारा है।

उन्होंने एक मौलवी का भी वीडियो शेयर किया, जिसमें वो दावा कर रहा है कि ख्वाजा का मतलब किन्नर होता है और वहाँ ‘हिजड़ों’ का मेला भी लगता है। उस वीडियो में वो मौलवी अल्लाह की कसम खाते हुए कहता है कि सारे ‘हिजड़े’ ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती को अपना मानते हैं। ‘सत्य सनातन’ यूट्यूब चैनल के संस्थापक अंकुर आर्य ने ऑपइंडिया को बताया कि उन्होंने वही बात कही थी, जो कई मौलवी भी कहते रहे हैं, फिर इस पर हंगामा क्यों?

राजस्थान में कॉन्ग्रेस की सरकार है, ऐसे में इस FIR का क्या मतलब हो सकता है? इस सवाल पर अंकुर आर्य जवाब देते हैं कि ये सब डराने के लिए किया जा रहा है ताकि आगे चल कर कोई हिन्दू हितों के लिए आवाज़ ही न उठाए। उन्होंने कहा कि पुलिस ने अब तक उनसे संपर्क नहीं किया है, कानूनी प्रक्रिया के तहत वो अपना पक्ष रखेंगे। उन्होंने कहा कि वो अपने बयान पर अभी भी कायम हैं क्योंकि उनकी बातों को गलत सन्दर्भ में पेश किया गया है।

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अनुपम कुमार सिंहhttp://anupamkrsin.wordpress.com
चम्पारण से. हमेशा राइट. भारतीय इतिहास, राजनीति और संस्कृति की समझ. बीआईटी मेसरा से कंप्यूटर साइंस में स्नातक.

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