Saturday, July 24, 2021
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नाश्ते में आर्सेनिक ट्राइऑक्साइड जहर देकर हुई थी मारने की कोशिश: ISRO के शीर्ष वैज्ञानिक तपन मिश्रा का खुलासा

इसरो के वैज्ञानिक को दो सालों तक साँस लेने में तकलीफ, त्वचा पर अजीब फोड़े-फुंसियाँ, शरीर की खाल का उतरना, हाथ-पाँव के नाखूनों का जाना, शरीर के हर बाहरी व आंतरिक हिस्से में फंगल इन्फेक्शन.. ये सब झेलना पड़ा।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO)के शीर्ष वैज्ञानिक तपन मिश्रा (Tapan Misra) ने मंगलवार (जनवरी 5, 2021) को खुलासा किया कि उन्हें तीन साल से अधिक समय पहले जहर देकर मारने की कोशिश हुई थी। अपने हालिया फेसबुक पोस्ट ‘लॉन्ग केप्ट सीक्रेट’ में उन्होंने इस बात का खुलासा किया कि मई 23, 2017 को बेंगलुरु में इसरो मुख्यालय में पदोन्नति साक्षात्कार के दौरान उन्हें घातक आर्सेनिक ट्राइऑक्साइड जहर देकर मारने की कोशिश की गई थी।

मिश्रा ने अंदेशा जताया कि उन्हें डोसे की चटनी में जहर देकर मारने की कोशिश हुई थी, जिसके बाद उन्हें तनाव और दर्द से उबरने में 2 साल लग गए। अपने पोस्ट में उन्होंने अपनी हत्या के प्रयासों में अमेरिका की संलिप्ता भी बताई। तपन ने लिखा कि साल 2019 में अचानक एक भारतीय अमेरिकी प्रोफेसर उनके कार्यालय में दिखाई दिया और उन्हें जहर देने की इस घटना पर चुप रहने को भी कहा गया। इससे पहले उन्हें ईमेल के जरिए भी सैंकड़ों धमकियाँ मिलती रहती थीं। वह बताते हैं कि कई बार सुरक्षा एजेंजजियों ने उन्हें आगाह करके बचाया था।

जहर दिए जाने के अपने आरोपों पर वैज्ञानिक तपन मिश्रा ने कहा, “कोई निश्चित रूप से भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) को कुछ नुकसान पहुँचाना चाहता था। एकमात्र उपाय अपराधी को पकड़ना और उन्हें दंडित करना है।”

अपने फेसबुक पोस्ट में मिश्रा ने उन सहकर्मियों के प्रति भी दुःख व्यक्त किया है, जो उन्हें इस हमले के बाद नकारने लगे थे। वह कहते हैं कि लाख प्रयासों के बाद उन्हें आज भी न्याय नहीं मिला है। उनके मुताबिक, ISRO के दो अध्यक्षों ने तो उनके विरोध पर आँख मूंद ली है और उन्हें न्याय नहीं मिल पा रहा।

फेसबुक पोस्ट का पहला हिस्सा

अपने पोस्ट की शुरुआत में उन्होंने कई वैज्ञानिकों की संदिग्ध मौत का उल्लेख किया। उन्होंने 1971 में प्रोफेसर विक्रम साराभाई, 1999 में डॉ एस श्रीनिवासन की आकस्मिक मौत और 1994 में नम्बी नारायण के साथ हुई साजिश का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने (तपन मिश्रा) कभी सोचा भी नहीं था कि वह इन रहस्यों का एक हिस्सा बनेंगे।

उन्होंने आशंका जताई कि उन्हें लगता है कि डोसे की चटनी में मिलाकर जहर दिया गया जिसके कारण वह असहनीय पीड़ा से गुजरे। उन्होंने मलद्वार से खून के रिसाव के कारण 30-40% खून का गँवाया। ISRO के वैज्ञानिक के मुताबिक, उन्हें दो सालों तक साँस लेने में तकलीफ, त्वचा पर अजीब फोड़े-फुंसियाँ, शरीर की खाल का उतरना, हाथ-पाँव के नाखूनों का जाना, शरीर के हर बाहरी व आंतरिक हिस्से में फंगल इन्फेक्शन.. ये सब झेलना पड़ा। उन्होंने बताया कि उनका इलाज टीएमएच मुंबई और दिल्ली एम्स में भी चला।

फॉरेंसिक विशेषज्ञ ने उन्हें बताया कि उन्होंने अपने पूरे करियर में ऐसा हत्या का प्रयास नहीं देखा। वह अपने पोस्ट में उन साथियों का और गृह मंत्रालय की सुरक्षा एजेंसियों का आभार व्यक्त करते हैं जिन्होंने जहर के हमले को लेकर पहले ही चेतावनी दी थी। वह बताते हैं कि उनके मुताबिक उन्हें मॉलिक्यूलर लेवल सस्पेंशन पर जहर दिया गया, वो भी गरिष्ठ भोजन के ठीक बाद।

ऐसा सस्पेंशन रंगरहित, खुशबू रहित और स्वादरहित होता है, इसलिए इसे लेकर संदह नहीं किया जा सकता। ये पेट में जाता है और लाल रक्त कणिकाओं को नष्ट करता है, जो बाद में रक्त धमनियों में इकट्ठा होती है और व्यक्ति हार्ट अटैक से दो या तीन घंटे बाद मर जाता है। मिश्रा इसे अपनी खुशकिस्मती कहते हैं कि उन्होंने उस दिन लंच नहीं किया था। वह इस हमले को कोई जासूसी अटैक बताते हैं, जिनका मकसद एक ऐसे वैज्ञानिक को हटाना था, जिसने सैन्य और वाणिज्यिक महत्व के महत्वपूर्ण योगदान दिया हो।

फेसबुक पोस्ट का दूसरा हिस्सा

वह 3 मई, 2018 का जिक्र करते हैं और याद करते हैं कि कैसे सुरक्षा एजेंसियों के कारण उस दिन उनकी जान बच पाई और एक भयावह घटना में 100 करोड़ की लैब क्षतिग्रस्त हो गई। इसी तरह 19 जुलाई, 2019 को एक भारतीय अमेरिकी वैज्ञानिक ने उन्हें उनके कार्यालय में आकर भविष्य में इस सम्बन्ध में एक भी शब्द न बोलने को कहा। उसी साल 12 जुलाई, 2019 को उनकी सुरक्षा के साथ एक भारी खिलवाड़ हुआ और उन्हें हाइड्रोजन साइनाइड दिया गया। इस जहर का असर इतना भयावह था कि उन्हें मिर्गी आई, उनकी यादश्त चली गई। वह कहते हैं उस दिन बचे तो सिर्फ़ अपने PSO के कारण। उसने उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया और फौरन वहाँ उनका इलाज शुरू हुआ। उनके मुताबिक, शायद ये सब चंद्रयान 2 की लॉन्च डेट पर मौजूद रहने से रोकने के लिए हुआ।

फेसबुक पोस्ट का तीसरा हिस्सा

वह अपने पोस्ट में ऐसी ही कई चौंकाने वाली बातों का जिक्र करते हैं। वह लिखते हैं कि पिछले दो सालों में उन्होंने अपने क्वार्टर में कई बार कोबरा और क्रेट जैसे जहरीले साँपों को देखा है। जबकि कार्बोलिक एसिड वेंट्स को हर 10 फीट पर डाला जाता है, फिर भी साँप घुसने में कैसे कामयाब रहा? वह अपनी चार बिल्लियों और सिक्योरिटी स्टाफ के शुक्रगुजार हैं कि उनके कारण ये साँप हर बार पकड़ लिए गए। वह कहते हैं कि कुछ तीन महीने पहले उन्हें उस सुरंग का पता चला, जहाँ से साँप आ रहे थे जिसके बाद उन्होंने उसे बंद करवा दिया।

उन्होंने अपने पोस्ट में अपने बेटे पर सितंबर में हुए एक और हमले के प्रयास का जिक्र किया। उन्होंने अपने साथियों, बुद्धिजीवियों से उनकी आपबीती आगे तक पहुँचाने की अपील की और अपने व अपने परिवार की सुरक्षा की माँग की। मिश्रा अपने साथ हुई घटनाओं के मद्देनजर बताते हैं कि उन्हें विश्वास है कि ऐसे लोग हमारे सिस्टम में मौजूद हैं और वैज्ञानिकों की रहस्यमय मौतों व हमारे संस्थानों के विनाश के लिए जिम्मेदार हैं।

ऑपइंडिया की तपन मिश्रा से बातचीत

बता दें कि तपन मिश्रा भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के अहमदाबाद स्थित अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र के निदेशक के रूप में सेवा दे चुके हैं। ऑपइंडिया ने इस पोस्ट को देखने के बाद तपन मिश्रा से बात करने की कोशिश की, तो उन्होंने बातचीत करते हुए कहा, “सरकार और राजनीतिक तंत्र से मेरा निवेदन है कि जो लोग देश का निर्माण करते हैं, अगर हम उनकी रक्षा नहीं करते हैं, अगर हम अपनी संपत्ति की रक्षा नहीं करते हैं, तो कल हमारा देश नष्ट हो जाएगा।”

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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