Sunday, February 28, 2021
Home देश-समाज सियाचिन के परमवीर: ऑपरेशन मेघदूत से लेकर अब तक की कहानी

सियाचिन के परमवीर: ऑपरेशन मेघदूत से लेकर अब तक की कहानी

आज भारत विश्व शक्ति बनने की ओर अग्रसर है और हमारे वीर सैनिक सियाचिन पर काम करने के अभ्यस्त हो चुके हैं। आज हमें विश्व की सबसे ऊँचे युद्धस्थल पर सामरिक लाभ की स्थिति में हैं। ऐसे में कितनी भी दुर्गम परिस्थितियाँ हों हम अपनी ज़मीन नहीं छोड़ सकते।

जब हम और आप मौसम का मजा लेते हुए ठण्ड में गुनगुनी धूप में बैठ कर तिल गुड़ के लड्डू खा रहे होते हैं और हमारे बच्चे वर्जनाओं से मुक्त आकाश में खिलवाड़ की पतंग उड़ा रहे होते हैं तब देश की सरज़मीं के एक कोने में भारतीय सेना की सियाचिन ब्रिगेड के अफ़सर और जवान उत्सव मनाने की हमारी इसी स्वतंत्रता की रक्षा करते हैं।

ठण्ड उनके लिये भी होती है और हमारे लिये भी, बस अंतर होता है रंग का। हम गुलाबी ठण्ड में भी ठिठुरने लगते हैं और वे -55 डिग्री की काली ठण्ड में मुस्तैद होते हैं। ये कहानी है अदम्य शौर्य, साहस और उन अनगिनत बलिदानों की जिनके बारे में भारत सरकार भी आपको पूरी बात नहीं बताती।

सियाचिन एक ग्लेशियर है जिसका मतलब होता है एक बहुत बड़ा सा बर्फ का टुकड़ा जो धीरे धीरे पहाड़ से नीचे सरकता हुआ पिघलता है। सियाचिन ग्लेशियर 75 किमी लम्बा है और 23000 से 12000 फ़ीट ऊंची ढलान पर स्थित है। 10,000 वर्ग किमी का ये क्षेत्र सिंधु नदी को जीवित रखने में भी सहायक है क्योंकि जैसे जैसे ग्लेशियर पिघलता है उसका पानी नदी में मिल जाता है।

यदि आपने कभी कश्मीर का नक्शा देखा है तो आप ‘नियंत्रण रेखा’ से परिचित होंगे जिसे LoC कहा जाता है। द्रास कारगिल से होती हुई 759 किमी लम्बी नियंत्रण रेखा जब ऊपर पहुँचती है तो एक बिंदु को छूती है जिसे Point NJ9842 कहा जाता है। ये सियाचेन के त्रिकोणनुमा क्षेत्र का एक छोर है।

सन् 1949 के कराची समझौते और 1972 के शिमला समझौते में इस बात पर सहमति बनी कि इस बिंदु (NJ9842) के उत्तर में स्थित सियाचिन किसी भी प्रकार से मनुष्य के बसने लायक नहीं है इसलिए NJ9842 से ऊपर जाती हुई नियंत्रण रेखा त्रिकोण के दूसरे सिरे को छुएगी जिसे इंदिरा कोल कहा जाता है। समझौते में लिखा था ‘thence northward’, इन्हीं दो शब्दों के पीछे पाकिस्तान ने चाल चली। उत्तर की ओर जाने का अर्थ था कि LoC पहाड़ों से होकर जाएगी। लेकिन पाकिस्तान ने धोखे से यह समझाने की कोशिश की कि ‘thence northward’ का अर्थ LoC का घाटी से होकर जाना है।

Image Credit: Wikipedia. Not to scale.

जब 1975 में शेख अब्दुल्ला कश्मीर के मुख्यमंत्री थे तब कुछ जर्मन सिंधु नदी में राफ्टिंग करने के लिए जाना चाहते थे। इसके लिये अब्दुल्ला ने कर्नल नरेन्द्र कुमार को बुलाया। ये अभियान पूरा होने के बाद कर्नल कुमार ने 1977 में कंचनजंघा को फतह किया। तब तत्कालीन थलसेनाध्यक्ष टी एन रैना ने उन्हें High Altitude Warfare School का चार्ज सौंप दिया।

किस्मत से उसी वक़्त वही जर्मन पर्वतारोही उनसे मिले जिनके साथ उन्होंने सिंधु में राफ्टिंग की थी। इस बार वे सियाचिन से निकलने वाली नुब्रा नदी में राफ्टिंग के लिये आये थे। उनसे कर्नल कुमार को कुछ नक्शे मिले जो उन्होंने जर्मनों से कुछ पैसे देकर खरीद लिये थे। अमरीका में छपे इन नक्शों में नियंत्रण रेखा को NJ9842 के उत्तर में इंदिरा कोल तक न दिखा कर पूर्वोत्तर में कराकोरम पास तक दिखाया गया था। कराकोरम इस त्रिकोण का अंतिम छोर था और इसका मतलब था कि कोई हमारी ज़मीन को अपना बता रहा था।

वो पाकिस्तान था। इस तरह जो विवादित त्रिकोण बना वही दुनिया का सबसे ऊँचा और दुर्गम युद्ध स्थल है- सियाचिन। कर्नल नरेंद्र कुमार को एक टोही दल की कमान देकर 1978 में सियाचेन भेजा गया तो उन्होंने पाया की वहां पहले भी पर्वतारोही अभियान आ चुके हैं। उन्हें बोतल पैकेट सहित कई सामान मिले जिनसे ये बात पुख्ता हुई कि और कोई नहीं बल्कि पाकिस्तानी अपनी पकड़ बनाने की कोशिश कर रहे थे।

सब कुछ विश्लेषण करने के बाद अपनी ज़मीन वापस पाने के लिये 13 अप्रैल 1984 को बाकायदा ऑपरेशन मेघदूत चलाया गया जिसकी नायक थे लेफ्टिनेंट जनरल प्रेम नाथ हून और लेफ्टिनेंट कर्नल डी के खन्ना। तब से हमारी सेनाएँ सियाचिन की रखवाली कर रही हैं। सियाचिन में दोनों तरफ की कई पोस्ट हैं जिन पर सैनिक तैनात रहते हैं। तीन साल बाद 18 अप्रैल 1987 को पाकिस्तानियों ने ‘क़ायद’ पोस्ट से हमला कर हमारे 2 जवानों को मार दिया था। इस पोस्ट का नाम उन्होंने क़ायदे आज़म के नाम पर रखा था।

इस पोस्ट को नेस्तनाबूद करने में सेकंड लेफ्टिनेंट राजीव ने प्राणों का बलिदान दिया था जिसके बाद इस ऑपरेशन को ही ऑपरेशन राजीव नाम दिया गया। इस ऑपरेशन में विजय दिलाने वाले नायब सूबेदार बाना सिंह को परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया और पाकिस्तान से छीनी गयी उस पोस्ट का नामकरण ‘बाना टॉप’ कर दिया गया।

इस पर बेनज़ीर भुट्टो ने ज़िया-उल-हक़ को बुर्क़ा पहनने की नसीहत दे डाली थी। ऐसी कई कहानियां हैं वीरों की जो फिसलती बर्फ पर मशीन गन थामे दुश्मन की आँख पर नज़र रखते हैं। साल 2003 से होविट्ज़र तोपें शांत हैं। डॉ कलाम पहले राष्ट्रपति थे जो सियाचेन गए थे। कुछ पूर्वाग्रही सामरिक विशेषज्ञ सियाचिन को बर्फ में जारी बेमानी जंग मानते रहे हैं।

वहाँ चमड़ी काली पड़ जाती है और तरल जैसी चीज़ बड़ी मुश्किल से गले के नीचे उतरती है। हेलिकॉप्टर गर्मियों की बजाए सर्दियों में ज्यादा कुशलता से काम करते हैं। उपासना के लिये एक ‘ओपी बाबा’ का मन्दिर है जिसमें मनुष्य की प्रतिमा में देवता बसते हैं। बेस से ऊपर ग्लेशियर में जाने से पहले सिखाया जाता है- “पेट में रोटी, हाथ में सोंटी, चाल छोटी-छोटी” अर्थात पेट में भोजन भरपूर होना चाहिए, हाथ में स्टिक होनी चाहिए ताकि बर्फ पर पकड़ बनी रहे और छोटे-छोटे कदमों से चलना चाहिए।

कुछ अंतर्राष्ट्रीय संगठन वहां वैज्ञानिक प्रयोगों के लिये भी प्रयासरत हैं। सवाल उठाया जाता है कि सियाचिन के उस पार क्या है- आत्मरक्षा, शत्रु से दोस्ती या मानव हित? कुछ सामरिक चिंतक यह मानते रहे हैं कि भारत को सियाचिन पर से अपना दावा छोड़ देना चाहिए। लेकिन आज भारत विश्व शक्ति बनने की ओर अग्रसर है और हमारे वीर सैनिक सियाचिन पर काम करने के अभ्यस्त हो चुके हैं। आज हमें विश्व की सबसे ऊँचे युद्धस्थल पर सामरिक लाभ की स्थिति में हैं। ऐसे में कितनी भी दुर्गम परिस्थितियाँ हों हम अपनी ज़मीन नहीं छोड़ सकते। वास्तविकता यह है कि हमारी सैन्य उपस्थिति के कारण आज पाकिस्तान सियाचिन ग्लेशियर पर है ही नहीं। पाकिस्तान नीचे घाटी में है और इस कारण हमें सामरिक लाभ मिलता है।

सन 2005 में डॉ मनमोहन सिंह सियाचेन का विसैन्यीकरण (demilitarization) कर उसे ‘माउंटेन ऑफ पीस’ बनाना चाहते थे। इसका खुलासा संजय बारु के अतिरिक्त श्याम सरन ने भी अपनी पुस्तक ‘How India Sees the World’ में किया है। गत वर्ष श्याम सरन के इस खुलासे पर विवाद हुआ था जिसके बाद पूर्व थलसेनाध्यक्ष जनरल जे जे सिंह को स्पष्टीकरण देना पड़ा था। बहरहाल, जनरल सिंह के तर्कों को फिलहाल किनारे रखकर देखा जाए तो सियाचेन के विसैन्यीकरण का निर्णय अकेले भारतीय सेना तो ले नहीं सकती थी। मनमोहन सिंह और उनकी रणनीतिक टीम इस प्रकार के आत्मघाती निर्णयों के वास्तविक स्टेकहोल्डर्स थे।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘किसानों के लिए डेथ वारंट है ये तीनों कृषि कानून, दिल्ली हिंसा में बीजेपी के लोग शामिल’: महापंचायत में केजरीवाल

केजरीवाल ने कहा कि किसानों के उपर लाठियाँ बरसाई गई। यह केंद्र सरकार का ही प्‍लान था। भाजपा समर्थक ही दिल्‍ली की घटना में शामिल थे। केंद्र सरकार का प्‍लान था कि किसानों का रुट डायवर्ट कराकर दिल्‍ली में भेजा जाए। ताकि...

‘भैया राहुल आप छुट्टी पर थे, इसलिए जानकारी नहीं कि कब बना मछुआरों के लिए अलग मंत्रालय’: पुडुचेरी में अमित शाह

“कॉन्ग्रेस आरोप लगा रही है कि बीजेपी ने उनकी सरकार को यहाँ गिराया। आपने (कॉन्ग्रेस) मुख्यमंत्री ऐसा व्यक्ति बनाया था, जो अपने सर्वोच्च नेता के सामने ट्रांसलेशन में भी झूठ बोले। ऐसे व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनाया गया।"

‘लद्दाख छोड़ो, सिंघू बॉर्डर आओ’: खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत पन्नू ने सिख सैनिकों को उकसाया, ऑडियो वायरल

“लद्दाख बॉर्डर को छोड़ दें और सिंघू सीमा से जुड़ें। यह भारत के लिए खुली चुनौती है, हम पंजाब को आजाद कराएँगे और खालिस्तान बनाएँगे।"

25.54 km सड़क सिर्फ 18 घंटे में: लिम्का बुक में दर्ज होगा नितिन गडकरी के मंत्रालय का रिकॉर्ड

नितिन गडकरी ने बताया कि वर्तमान में सोलापुर-विजापुर राजमार्ग के 110 किमी का कार्य प्रगति पर है, जो अक्टूबर 2021 तक पूरा हो जाएगा।

माँ माटी मानुष के नाम पर वोट… और माँ को मार रहे TMC के गुंडे: BJP कार्यकर्ता की माँ होना पीड़िता का एकमात्र दोष

पश्चिम बंगाल में राजनीतिक बदले की दुर्भावना से प्रेरित होकर हिंसा की एक और घटना सामने आई। भाजपा कार्यकर्ता और उनकी बुजुर्ग माँ को...

‘रोक सको तो रोक लो… दिल्ली के बाद तुम्हारे पास, इंतजाम पूरा’ – ‘जैश उल हिंद’ ने ली एंटीलिया के बाहर की जिम्मेदारी

मुकेश अंबानी की एंटीलिया के बाहर एक संदिग्ध कार पार्क की हुई मिली थी। 'जैश उल हिंद' ने इस घटना की जिम्मेदारी लेते हुए धमकी भरा संदेश दिया है।

प्रचलित ख़बरें

कोर्ट के कुरान बाँटने के आदेश को ठुकराने वाली ऋचा भारती के पिता की गोली मार कर हत्या, शव को कुएँ में फेंका

शिकायत के अनुसार, वो अपने खेत के पास ही थे कि तभी आठ बदमाशों ने कन्धों पर रायफल रखकर उन्हें घेर लिया और फायरिंग करने लगे।

आमिर खान की बेटी इरा अपने संघी हिन्दू नौकर के साथ फरार.. अब होगा न्याय: Fact Check से जानिए क्या है हकीकत

सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि आमिर खान की बेटी इरा अपने हिन्दू नौकर के साथ भाग गई हैं। तस्वीर में इरा एक तिलक लगाए हुए युवक के साथ देखी जा सकती हैं।

शैतान की आजादी के लिए पड़ोसी के दिल को आलू के साथ पकाया, खिलाने के बाद अंकल-ऑन्टी को भी बेरहमी से मारा

मृत पड़ोसी के दिल को लेकर एंडरसन अपने अंकल के घर गया जहाँ उसने इस दिल को पकाया। फिर अपने अंकल और उनकी पत्नी को इसे सर्व किया।

जलाकर मार डाले गए 27 महिला, 22 पुरुष, 10 बच्चे भी रामभक्त ही थे, अयोध्या से ही लौट रहे थे

27 फरवरी 2002 की सुबह अयोध्या से लौट रहे 59 रामभक्तों को साबरमती एक्सप्रेस में करीब 2000 लोगों की भीड़ ने जलाकर मार डाला था।

पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा फिर पड़ा उल्टा: बालाकोट स्ट्राइक की बरसी पर अभिनंदन के 2 मिनट के वीडियो में 16 कट

इस वीडियो में अभिनंदन कश्मीर में शांति लाने और भारत-पाकिस्तान में कोई अंतर ना होने की बात करते दिख रहे हैं। इसके साथ ही वह वीडियो में पाकिस्तानी सेना की खातिरदारी की तारीफ कर रहे हैं।

कॉन्ग्रेस ने मेरा इस्तेमाल नहीं किया, मुझे नीचे गिराने में लगे हैं पार्टी नेता: हार के बाद बोले कार्यकारी अध्यक्ष हार्दिक पटेल

हार्दिक पटेल ने कहा कि कॉन्ग्रेस के नेता उन्हें नीचा दिखाना और नीचे गिराना चाहते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि निकाय चुनावों में कॉन्ग्रेस ने उनका ठीक से इस्तेमाल नहीं किया।
- विज्ञापन -

 

हमसे जुड़ें

292,201FansLike
81,835FollowersFollow
392,000SubscribersSubscribe