Tuesday, July 27, 2021
Homeदेश-समाजदेश सेवा में बलिदान हुए झारखण्ड के कुंदन कुमार ओझा, नहीं देख पाए अपनी...

देश सेवा में बलिदान हुए झारखण्ड के कुंदन कुमार ओझा, नहीं देख पाए अपनी 17 दिनों पहले जन्मी बेटी का मुख

सीमा पर चल रहे तनाव की वजह से मोबाइल नेटवर्क में काफी परेशानी आ रहीं थी। जिसकी वजह से कुंदन ने आखिरी बार अपने परिजनों से सेटेलाइट फोन के जरिए बात की थी। जहाँ बच्ची के जन्म पर खुशी जाहिर करते हुए उन्होंने बताया था कि, लॉकडाउन व चीन सीमा पर विवाद कुछ थमने के बाद वह बेटी को देखने घर देखने जल्द ही आएँगे।

भारत चीन सीमा पर सोमवार (15 जून, 2020) को लद्दाख में चीनी सैनिकों से हुई खूनी हिंसक झड़प में भारतीय सेना के 20 जवान शहीद हो गए हैं। वहीं चीन के भी लगभग 45 सैनिकों के मारे जाने की खबर है। इस खूनी हिंसा में वीरगति को प्राप्त हुए सैनिकों में एक झारखंड के साहिबगंज के रहने वाले कुंदन कुमार ओझा भी है। 28 वर्षीय कुंदन ओझा की 17 दिन की दुधमुँही बच्ची हैं। जिसकी शक्ल देखने से पहले ही वो दुनिया को अलविदा कह गए।

डिहारी गाँव में रहने वाले कुंदन कुमार ओझा के बलिदान की खबर परिवार को मंगलवार (16 जून, 2020) की शाम को मिली। जिसे सुनते ही परिवार के सभी जन स्तब्ध रह गए। परिवारवालों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। सबके मुँह से सिर्फ एक बात निकल रही थी कि एक बार बच्ची को बस गोद में खिला लेते।

आपको बता दें बलिदानी कुन्दन इसी साल जनवरी में छुट्टी लेकर अपने गाँव डिहारी आए थे। कुछ दिन रहने के बाद वो 2 फरवरी को वापस अपनी ड्यूटी पर लेह चले गए थे। उन्होंने जाते वक्त अपनी गर्भवती पत्नी से जल्द ही बच्चे के जन्म के बाद वापस आने का वादा किया था।

बच्ची का मुख देखने जल्द ही जाने वाले थे घर

सीमा पर चल रहे तनाव की वजह से मोबाइल नेटवर्क में काफी परेशानी आ रहीं थी। जिसकी वजह से कुंदन ने आखिरी बार अपने परिजनों से सेटेलाइट फोन के जरिए बात की थी। जहाँ बच्ची के जन्म पर खुशी जाहिर करते हुए उन्होंने बताया था कि, लॉकडाउन व चीन सीमा पर विवाद कुछ थमने के बाद वह बेटी को देखने घर देखने जल्द ही आएँगे। लेकिन, शायद किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।

परिजनों ने बताया कि कुंदन की 2 साल पहले ही सुल्तानगंज के मिरहट्टी की रहने वाली नेहा से शादी हुई थी। हाल ही में उसकी पत्नी ने फूल सी सुंदर बच्ची को जन्म दिया था। कुंदन 7 साल से सेना में तैनात देश की सेवा में जुटे थे। बुढ़ापे में उनकी जिंदगी का सहारा उन्हें छोड़ कर चला गया। मगर उन्हें सुकून हैं कि उनके बच्चे ने अपना जीवन देश को समर्पित कर उनका सर गर्व से ऊँचा कर दिया है।

झारखंड सीएम और पूर्व सीएम ने ट्वीट कर जताया दुख

देश के लिए बलिदान हुए कुंदन पर गर्व करते हुए झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन और पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी ने सैल्यूट किया। सीएम हेमंत सोरेन ने ट्वीट कर दुख जाहिर करते हुए कहा कि झारखंड सरकार और पूरा राज्य अपने वीर जवान के परिवार के साथ खड़ा है।

दानापुर रेजिमेंट में हुआ था चयन

आपको बता दें कुंदन कुमार ओझा का वर्ष 2011 में 16 बिहार दानापुर रेजिमेंट की बहाली में चयन हुआ था। 2012 में उन्होंने भारतीय थल सेना के रूप में अपना योगदान देने की शुरुआत की थी। कुन्दन ने साहिबगंज कॉलेज से इंटर व बीए की डिग्री प्राप्त की थी। इसी दौरान उन्होंने एनसीसी में भी हिस्सा लिया था। जहाँ बतौर कैडेट उन्हें बेहतर प्रदर्शन के लिए बी सर्टिफिकेट मिला था। सेना के चयन के वक़्त एनसीसी के दौरान किए गए मेहनत से उन्हें सेना में भर्ती होने में भी मदद मिली।

करीब तीन साल पहले ही उनकी तैनाती लेह में हुई थी। सभी सहपाठियों, गाँव के लोगों को कुंदन के जाने का दुख तो है ही मगर भारत माता की रक्षा के लिए कुंदन के वीर गति को प्राप्त होने पर गर्व भी हो रहा है।

गाँव पहुँचेगा कुंदन का पार्थिव शरीर

वीरगति को प्राप्त कुंदन कुमार ओझा का पार्थिव शरीर गुरुवार को उनके गाँव आने की उम्मीद है। हालाँकि, मंगलवार देर शाम तक जिला प्रशासन को इस संबंध में कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली थी। उपायुक्त वरुण रंजन ने देर शाम बताया कि कुंदन कुमार ओझा के परिजनों को वहाँ के सूबेदार ने कॉल किया था।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

नाम: नूर मुहम्मद, काम: रोहिंग्या-बांग्लादेशी महिलाओं और बच्चों को बेचना; 36 घंटे चला UP पुलिस का ऑपरेशन, पकड़ा गया गिरोह

देश में रोहिंग्याओं को बसाने वाले अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी के गिरोह का उत्तर प्रदेश एटीएस ने भंडाफोड़ किया है। तीन लोगों को अब तक गिरफ्तार किया गया है।

‘राजीव गाँधी थे PM, उत्तर-पूर्व में गिरी थी 41 लाशें’: मोदी सरकार पर तंज कसने के फेर में ‘इतिहासकार’ इरफ़ान हबीब भूले 1985

इतिहासकार व 'बुद्धिजीवी' इरफ़ान हबीब ने असम-मिजोरम विवाद के सहारे मोदी सरकार पर तंज कसा, जिसके बाद लोगों ने उन्हें सही इतिहास की याद दिलाई।

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -

 

हमसे जुड़ें

295,307FansLike
111,464FollowersFollow
393,000SubscribersSubscribe