Wednesday, October 21, 2020
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हलाल नहीं… झटका मीट ऑनलाइन ऑर्डर कर मँगवा सकते हैं अब आप: वराह फाउंडेशन की नई शुरुआत

"आजकल लोग ऑनलाइन खरीददारी करते हैं और कोई भी ऑनलाइन पोर्टल झटका मीट की डिलीवरी नहीं करता है। इस वजह से खटिक समुदाय के लोगों का मीट नहीं बिक पाता। मजबूरी में खटिक समुदाय के दो भाइयों ने इस्लाम अपना लिया, ताकि वो हलाल मांस बेच सकें।"

देश में ऐसी कंपनी, वेबसाइट या रेस्टॉरेंट की कमी नहीं है, जो सिर्फ हलाल मीट ही बेचती है। लेकिन देश में एक भी ऐसा प्लेटफॉर्म अब तक नहीं था, जहाँ झटका मीट बेचा जाता हो। जिसकी वजह से हिंदुओं और सिखों के सामने हलाल मीट के अलावा और कोई विकल्प ही नहीं रह जाता है, या फिर यूँ कहें कि उन पर हलाल मीट थोपा जाता है।

ऐसे में ‘वराह फाउंडेशन’ नाम की एक संस्था ने हिंदुओं और सिखों की दुविधा और परेशानियों को समझते हुए एक प्लेटफॉर्म की शुरुआत की है। जहाँ पर सिर्फ झटका मीट और झटका मीट से बने प्रोडक्ट ही बेचे जाएँगे। इस वेबसाइट के माध्यम से हिंदू और सिख समुदाय के लोग बेहिचक होकर झटका मीट मँगवा सकते हैं।

ऑपइंडिया ने इस बाबत वराह फाउंडेशन के सदस्य से बात की। जब हमने उनसे पूछा कि इस प्लेटफॉर्म को शुरू करने के पीछे उनका क्या मकसद था? उन्हें ऐसा क्यों लगा कि भारत में इसे खोलने की जरूरत है? तो उन्होंने इसका जवाब देते हुए कहा, “इंडिया में ऐसा कोई ऐप नहीं था, जिस पर झटका मीट मिलता हो। हमने हिंदुओं और सिखों के लिए इसे खोला है।”

उन्होंने आगे कहा, “हिंदू और सिख सिर्फ झटका मीट खाते हैं और अगर उन्हें घर बैठे मीट खाने का मन करेगा, तो वो कहाँ जाएँगे। इसलिए हमने इसकी शुरुआत की। इस पर सभी झटका करने वाले बूचर्स के नाम, एड्रेस, फोन नंबर होंगे। कस्टमर चाहें तो यहाँ ऑर्डर करें या फिर सीधा बूचर के पास जाकर ले आ सकते हैं।”

जब हमने उनसे पूछा कि ये काम किस तरह से करेगी तो उन्होंने कहा कि इसके लिए होम डिलीवरी और पिक-अप सब कुछ उपलब्ध है। फाउंडेशन की ओर से बताया गया कि अभी लॉकडाउन की वजह से काफी जगहों पर होम डिलीवरी नहीं हो पा रही है, क्योंकि कई जगहों पर डिलीवरी ब्वॉय को जाने की अनुमति नहीं है, इस वजह से थोड़ी दिक्कत हो रही है।

इसके माध्यम से लोग देश के भीतर कहीं भी झटका मीट ऑर्डर कर सकते हैं। फिलहाल गुड़गाँव, नोएडा में होम डिलीवरी की सुविधा उपलब्ध है। इसके अलावा दिल्ली और पुणे में कुछ एरिया में होम डिलीवरी की जा रही है, क्योंकि बाकी एरिया को सील कर दिया गया है। लॉकडाउन हटते ही इसे पूरे देश भर में इस सुविधा को लॉन्च किया जाएगा। इसके वेबसाइट का नाम है – झटैक.कॉम (jhattack.com)

वराह फाउंडेशन ने इसकी शुरुआत के पीछे की एक और वजह खटिक समुदाय को रोजगार उपलब्ध करवाना बताया। उन्होंने बताया कि झटका मीट की डिमांड कम होने की वजह से काफी लोगों का रोजगार छिन गया। फाउंडेशन की ओर से बताया गया कि उन्होंने खटिक समुदाय के 30 लोगों से बात की है।

उनके मुताबिक 30 में से 27 लोगों ने अब झटका मीट का कारोबार करना बंद कर दिया और इनमें से एक व्यक्ति के दो चचेरे भाइयों ने इस्लाम अपना लिया, ताकि वो हलाल मांस बेच सकें। और हलाल मांस का काम सिर्फ मुसलमान ही कर सकते हैं, इसमें गैर मुसलमानों को रोजगार नहीं दिया जाता है।

इस्लाम कबूल करने वाले खटिक समुदाय के लोगों ने बताया कि पहले मुसलमान उनसे मांस नहीं खरीदते थे, जिसकी वजह से उन्होंने अपना घर चलाने के लिए इस्लाम कबूल कर हलाल मांस का कारोबार करना शुरू कर दिया।

फाउंडेशन का कहना है कि झटका मांस की डिमांड कम होने की वजह उसके बारे में जानकारी का अभाव है। आजकल सभी लोग ऑनलाइन खरीददारी करते हैं और कोई भी ऑनलाइन पोर्टल झटका मीट की डिलीवरी नहीं करता है। इस वजह से खटिक समुदाय के लोगों का मीट नहीं बिक पाता है। मगर अब खटिक समुदाय के बूचर इस ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर अपना नाम रजिस्टर करवा कर रोजगार कर सकेंगे।

झटका सर्टिफिकेशन अथाॅरिटी के चेयरमैन रवि रंजन सिंह बताते हैं कि ‘झटका‘ हिन्दुओं, सिखों आदि भारतीय, धार्मिक परम्पराओं में ‘बलि/बलिदान’ देने की पारम्परिक पद्धति है। इसमें जानवर की गर्दन पर एक झटके में वार कर रीढ़ की नस और दिमाग का सम्पर्क काट दिया जाता है, जिससे जानवर को मरते समय दर्द न्यूनतम होता है। इसके उलट हलाल में जानवर की गले की नस में चीरा लगाकर छोड़ दिया जाता है, और जानवर खून बहने से तड़प-तड़प कर मरता है।

इसके अलावा मारे जाते समय जानवर को मुस्लिमों के पवित्र स्थल मक्का की तरफ़ ही चेहरा करना होगा। लेकिन सबसे आपत्तिजनक शर्तों में से एक है कि हलाल मांस के काम में ‘काफ़िरों’ (‘बुतपरस्त’, गैर-मुस्लिम, जैसे हिन्दू) को रोज़गार नहीं मिलेगा। यानी कि यह काम सिर्फ मुस्लिम ही कर सकता है।

इसमें जानवर/पक्षी को काटने से लेकर, पैकेजिंग तक में सिर्फ और सिर्फ मुसलमान ही शामिल हो सकते हैं। मतलब, इस पूरी प्रक्रिया में, पूरी इंडस्ट्री में एक भी नौकरी गैर-मुस्लिमों के लिए नहीं है। यह पूरा कॉन्सेप्ट ही हर नागरिक को रोजगार के समान अवसर देने की अवधारणा के खिलाफ है। बता दें कि आज McDonald’s और Licious जैसी कंपनियाँ सिर्फ हलाल मांस बेचती है।

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