Tuesday, October 19, 2021
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श्रीनगर की वह खौफनाक रात: सुरक्षा में तैनात DSP की मस्जिद के बाहर पीट-पीटकर हत्या, नंगा कर घसीटा

57 साल के मोहम्मद अयूब पंडित का शव 23 जून को श्रीनगर के मुख्य मस्जिद के बाहर से क्षत-विक्षत स्थिति में बरामद हुआ था। उससे एक रात पहले उसी मस्जिद में हजारों की संख्या में शब-ए कद्र की नमाज अदा करने के लिए मुस्लिम भीड़ इकट्ठा हुई थी। इन्हीं लोगों की सुरक्षा में अयूब को वहाँ तैनात किया गया था।

आज से करीब 3 साल पहले रमजान के दौरान श्रीनगर के जामिया मस्जिद के बाहर एक जांबाज पुलिस ऑफिसर को इस्लामिक भीड़ ने कथित तौर पर कश्मीरी पंडित समझकर पीट-पीटकर मारा डाला था। 

23 जून 2017 की वह सुबह हर किसी के लिए हैरान करने वाली थी। नौहट्टा के जामिया मस्जिद के बाहर एक डीएसपी के शव पड़े होने की खबर तब तक सामने आने लगी थी। मोहम्मद अयूब पंडित नामक इस पुलिस अधिकारी की हत्या 22 जून की रात कर दी गई थी।

हर कोई अयूब पंडित की हत्या की खबर सुनकर सकते में था। चारों ओर बस यही सवाल घूम रहा था कि आखिर कोई इतना क्रूर कैसे हो सकता है कि अपनी सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मी के साथ ऐसी बर्बरता करे।

57 साल के मोहम्मद अयूब पंडित का शव 23 जून को श्रीनगर के मुख्य मस्जिद के बाहर से क्षत-विक्षत स्थिति में बरामद हुआ था। उससे एक रात पहले उसी मस्जिद में हजारों की संख्या में शब-ए कद्र की नमाज अदा करने के लिए मुस्लिम भीड़ इकट्ठा हुई थी। इन्हीं लोगों की सुरक्षा में अयूब को वहाँ तैनात किया गया था। लेकिन अगले दिन उनका शव उसी मस्जिद के बाहर ऐसे मिला जैसे कोई टूटा हुआ गन्ना हो।

इस्लामिक भीड़ की हर बर्बरता को मीडिया के सामने रखते हुए शीर्ष अधिकारियों ने बताया था कि एसपी पर हमले के बाद उन्हें नंगा किया गया और फिर बहुत ही हिंसक तरह से उन्हें भीड़ ने मार दिया।

उनके हाथ-पाँव ऐसे मुड़े हुए थे, जैसे खाने से पहले गन्ने को तोड़ा जाता है। पड़ताल होने पर मालूम चला कि अधिकारी को मारने के लिए इस्लामिक आतताइयों ने लोहे की छड़ तक का इस्तेमाल किया था।

अब आखिर मोहम्मद अयूब की गलती क्या थी? बस ये कि वे रमजान के महीने में उस दिन उन लोगों की सुरक्षा में बिन वर्दी के तैनात हुए, जिन्हें इंसानियत का मतलब तक नहीं मालूम था।

पुलिस के अनुसार, उस दिन मस्जिद के बाहर चार उपद्रवियों की नजर उनपर पड़ गई। इसके बाद उन चारों ने पुलिस अधिकारी से ही पूछताछ करनी शुरू कर दी। जब बात आगे बढ़ी तो उपद्रवियों ने मोहम्मद अयूब से पहचान पत्र दिखाने को बोला। लेकिन डीएसपी ने ऐसा करने से इनकार कर दिया।

इसके बाद उपद्रवियों ने उनसे हाथापाई शुरू कर दी और फिर कई अन्य लोग भी वहाँ इकट्ठा होते गए। भीड़ को बढ़ता देख डीएसपी ने सर्विस रिवाल्वर से कमर के नीचें कुछ गोलियाँ चलाईं। जिसमें तीन हमलावर घायल हो गए। भीड़ इसके बाद और आक्रमक हो गई और उन्हें तब तक मारती रही जब तक उनका दम नहीं निकला।

बताया जाता है कि डीएसपी को मारकर करीब 400 मीटर कर घसीटा गया और फिर पहचान पता करने के लिए उन्हें नंगा भी किया। लेकिन उस समय तक वे खत्म हो चुके थे।

आतताइयों ने डीएसपी की हालत ऐसी कर दी थी कि उनकी शिनाख्त करने में बहुत वक्त लगा। उनका शरीर पूर्ण रूप से विकृत था और हाथ-पाँव टूट चुके थे।

जिस समय डीएसपी के साथ ये बर्बरतता हुई उस समय हुर्रियत अध्यक्ष मीरवाइज उमर वहीं मस्जिद में मौजूद था। कुछ स्थानीय युवकों ने इस घटना की वीडियो बनाई थी। इसे देखने के बाद पुलिस अधिकारियों ने 20 लोगों को गिरफ्तार किया। इनके पास से डीएसपी की पिस्तौल और दूसरे कुछ सामान भी बरामद किए गए।

ये बात भी मालूम चली कि हत्या का मास्टरमाइंड घटना के बाद कुछ दिन बाद ही आतंकी गिरोह में शामिल हो गया था। लेकिन 12 जुलाई 2017 को एक मुठभेड़ में उसे मार गिराया गया। उसका नाम सज्जाद अहमद गिलकर था।

 

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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