देखें VIDEO: JNU छात्र ने दी पत्रकार को धमकी, कहा- ‘खरीद सकता हूँ AK-47’

"मैं फिजिकली हैंडीकैप्ड हूँ, मुझे जानवरों की तरह मारा गया। क्या मैं एके-47 नहीं खरीद सकता, मेरी इतनी औकात नहीं है क्या?" इशारा साफ़ था, हमारी हैसियत बन्दूक खरीदने की है, हमने चाहा तो पत्रकारों को मारेंगे"

दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में इन दिनों फीस वृद्धि को लेकर हो रहे प्रदर्शन और हंगामे के बीच हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है। जेएनयू में एक प्रदर्शनकारी छात्र ने सवाल पूछने वाली एक महिला पत्रकार को ही धमकी दे डाली।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार रिपब्लिक भारत की एक पत्रकार ने JNU के प्रदर्शनकारियों के चलते अन्य लोगों को हुई समस्या पर सवाल किया तो वह छात्र इस पर भड़क गया। इस दौरान उसने हिंसा को जायज़ ठहराते हुए सीधे एके-47 खरीद कर मीडिया और पुलिस को ही गोली मारने की बात कह डाली।

बता दें कि जेएनयू के प्रदर्शन के चलते कई लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। इस दौरान आम आदमी से लेकर मरीज को अस्पताल ले जा रही एम्बुलेंस तक को दिक्कत का सामना करना पड़ा था। फीस में बढ़ोतरी को लेकर तीन हफ्ते से चले आ रहे इस विरोध प्रदर्शन में JNU के छात्रों ने संसद तक पैदल मार्च निकालने का निर्णय किया था।

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वीडियो में साफ़ देखा जा सकता है कि जब छात्र से अवैध प्रदर्शन को लेकर सवाल पूछा गया तो वह भड़क गया और बोला, “मैं फिजिकली हैंडीकैप्ड हूँ, मुझे जानवरों की तरह मारा गया। क्या मैं एके-47 नहीं खरीद सकता, मेरी इतनी औकात नहीं है क्या?” इशारा साफ़ था, हमारी हैसियत बन्दूक खरीदने की है, हमने चाहा तो पत्रकारों को मारेंगे”

बता दें कि इससे पहले भी लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आज़ादी की दुहाई देने वाले जेएनयू के छात्रों ने रिपब्लिक भारत के मीडियाकर्मियों से काफी बदतमीजी की थी।

दरअसल बीते कई दिनों से JNU के छात्र यूनिवर्सिटी प्रशासन द्वारा लगाए गए नए नियमों का विरोध कर रहे हैं। इन नियमों के तहत छात्रावासों की फीस से लेकर ड्रेस कोड और गेट के टाइमिंग आदि कड़े किए दिए गए हैं। बता दें कि कुछ ही दिन पहले इस विश्वविद्यालय के प्रांगण स्वामी विवेकानंद की मूर्ति का अनावरण किया गया था, हालाँकि नए-नियमों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे इन उपद्रवियों ने उस प्रतिमा को भी तहस-नहस कर दिया।

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बरखा दत्त
मीडिया गिरोह ऐसे आंदोलनों की तलाश में रहता है, जहाँ अपना कुछ दाँव पर न लगे और मलाई काटने को खूब मिले। बरखा दत्त का ट्वीट इसकी प्रतिध्वनि है। यूॅं ही नहीं कहते- तू चल मैं आता हूँ, चुपड़ी रोटी खाता हूँ, ठण्डा पानी पीता हूँ, हरी डाल पर बैठा हूँ।

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