Homeदेश-समाजकोरोना के कारण काँवड़ यात्रा प्रतिबंधित, नियम तोड़ने वाले 14 काँवड़ियों के खिलाफ उत्तराखंड...

कोरोना के कारण काँवड़ यात्रा प्रतिबंधित, नियम तोड़ने वाले 14 काँवड़ियों के खिलाफ उत्तराखंड में मामला दर्ज

अभय प्रताप सिंह, सीओ सिटी हरिद्वार ने बताया कि काँवड़ यात्रा को कोविड-19 के चलते प्रतिबंधित किया गया है। इसके बावजूद रविवार को हर की पौड़ी पर कुछ लोगों द्वारा नियम तोड़ने का प्रयास किया गया।

कोरोना महामारी के चलते इस साल उत्तराखंड सरकार ने काँवड़ यात्रा को प्रतिबंधित कर दिया है। इसी बीच कुछ लोगों द्वारा नियम तोड़ने की खबर सामने आई है। समाचार न्यूज एजेंसी एएनआई (ANI) के मुताबिक, अभय प्रताप सिंह, सीओ सिटी हरिद्वार ने बताया कि काँवड़ यात्रा को कोविड-19 के चलते प्रतिबंधित किया गया है। इसके बावजूद रविवार (25 जुलाई) को हर की पौड़ी पर कुछ लोगों द्वारा नियम तोड़ने का प्रयास किया गया।

उन्होंने बताया कि नियम तोड़ने वाले 14 लोगों को पकड़कर आपदा अधिनियम के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया गया है। इसके साथ ही इन सबको क्वारंटाइन भी किया गया है।

गौरतलब ​है कि बीते दिनों उत्तराखंड के डीजीपी अशोक कुमार ने प्रदेश के पड़ोसी राज्यों से आने वाले काँवड़ियों से अनुरोध किया है कि वह कांवड़ लेकर उत्तराखंड के किसी भी शहर में प्रवेश न करें। उन्होंने कहा कि हरिद्वार में कांवड़ियों की एंट्री पर प्रतिबंध लगाया गया है। सावन महीने में यूपी-उत्तराखंड बॉर्डर सील कर दिया जाएगा।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

बेचे जाने और लीज पर देने का अंतर भूल बैठे हैं अखिलेश यादव, JPNIC ‘बिक गया’ या सिर्फ लीज पर गया? सपा प्रमुख के...

JPNIC विवाद में अखिलेश यादव के ‘बेचने’ के आरोप की पड़ताल पर जानिए योगी सरकार का लीज मॉडल, CAG की आपत्तियां और 265 करोड़ से 865 करोड़ तक कैसे पहुँचा प्रोजेक्ट।

UP में तेजी से बढ़ रही है ‘गो-इकोनॉमी’, दूध के साथ-साथ गोमूत्र भी बन रहा है रोजगार का साधन: शैम्पू, साबुन और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर...

सवाल उनसे है जो गाय, गोबर और गौमूत्र का नाम सुनते ही मजाक बनाने लगते हैं- जब यही व्यवस्था किसान का खर्च घटाकर उसकी आय बढ़ा रही है और तो उपहास किस बात का है?
- विज्ञापन -