Thursday, October 28, 2021
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केरल में छात्र को चाकू मारने का मुख्य आरोपित SFI नेता नसीम गिरफ्तार

मुख्य आरोपित नसीम के साथ ही इस घटना के एक और आरोपित आर शिवरंजीत को भी गिरफ्तार किया गया।

केरल के तिरुवनंतपुरम में प्रसिद्ध यूनिवर्सिटी कॉलेज के परिसर के अंदर एक छात्र के ऊपर चाकू से हमला करने वाले मुख्य आरोपित नसीम को सोमवार (जुलाई 15, 2019) को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। नसीम वामपंथी छात्र संगठन स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) का नेता है। नसीम के साथ ही इस घटना के एक और आरोपित आर शिवरंजीत को भी गिरफ्तार किया गया।

पुलिस ने कहा कि दोनों आरोपित को मध्य रात्रि में केशवदासपुरम से हिरासत में ले लिया गया, जब ये दोनों छिपने के लिए नए ठिकाने की तलाश में थे। एक पुलिस अधिकारी ने पीटीआई को बताया कि उनकी गिरफ्तारी दर्ज की गई है और उनसे पूछताछ जारी है। इसके साथ ही मामले में गिरफ्तार एसएफआई नेताओं की कुल संख्या 6 हो गई है।

गौरतलब है कि शुक्रवार (जुलाई 12, 2019) को एसएफआई नेता ने अखिल नाम के छात्र के ऊपर चाकू से हमला किया। जिसके बाद उसे गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती करवाया गया। जहाँ उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है। पीड़ित अखिल तृतीय वर्ष का बीए (राजनीति) का छात्र है । अखिल के ऊपर हमला करने के बाद से ही दोनों आरोपित फरार थे।

जानकारी के मुताबिक, अखिल और उसके मित्र कॉलेज कैंटीन में गाते-बजाते थे, जो कैंटीन के बगल में ही स्थित SFI की स्थानीय इकाई के कमरे में रहने वाली एक महिला SFI सदस्या को पसंद नहीं आया। उसने SFI की स्थानीय इकाई में गाना बंद कराने की शिकायत कर दी और इसके चलते अखिल की SFI के बाकी सदस्यों से जुबानी जंग कई दिन तक चली। इसके बाद 10 जुलाई को एक छोटी-मोटी हाथापाई हुई लेकिन शुक्रवार (जुलाई 12, 2019) को समझौते के लिए बैठक बुलाई गई थी। लेकिन सुलह के लिए बुलाई गई इस बैठक में मामला हाथ से निकलता गया और देखते-ही-देखते अखिल के एक दोस्त पर हमला हो गया। इसके बाद बाहर से भी एक बड़ा गुट अंदर आया और अखिल के ग्रुप धावा बोल दिया। इस हाथापाई में अखिल के सीने पर चाकू से वार किया गया।

इस घटना की जानकारी फैलते ही छात्रों का एक बड़ा समूह SFI के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करने लगा। प्रदर्शन करने वालों में SFI के भी सदस्य थे। उनका कहना था कि कॉलेज में SFI के 13 यूनिट सदस्यों का व्यवहार फासिस्टों जैसा ही है, हालाँकि वे SFI समर्थक हैं। छात्रों को कॉलेज में अपनी मर्ज़ी से कहीं भी आने-जाने की अनुमति नहीं है और कहीं भी वे पेड़ों के आस-पास बैठें या गाना गाएँ तो उन्हें मार-पीटकर भगा दिया जाता है।

 

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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