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PM के रोड शो में स्कूल यूनिफॉर्म में दिखे बच्चे, तमिलनाडु पुलिस ने दर्ज कर दी FIR: मद्रास हाई कोर्ट ने लताड़ा, बोला- यह अपराध कैसे

इस मामले की सुनवाई करते हुए मद्रास हाई कोर्ट के जस्टिस जी जयचन्द्रन ने कहा कि वह स्वयं बचपन में बड़े नेताओं या प्रसिद्ध शख्सियतों को देखने जाया करते थे। उन्होंने कहा कि FIR दर्ज करने से बच्चों के राजनीतिक रैलियों में भाग लेने पर काफी असर पड़ेगा।

मद्रास हाई कोर्ट ने तमिलनाडु पुलिस को कड़ी फटकार लगाई है। यह फटकार पीएम नरेन्द्र मोदी के रोड शो में यूनिफार्म पहने बच्चों के शामिल होने पर FIR दर्ज किए जाने को लेकर लगाई गई। मद्रास हाई कोर्ट ने तमिलनाडु पुलिस से पूछा कि आखिर सिर्फ इस बात को लेकर स्कूल के खिलाफ क्यों FIR दर्ज की गई कि इसमें पढ़ने वाले बच्चे रोड में शो में शामिल हुए थे।

इस मामले की सुनवाई करते हुए मद्रास हाई कोर्ट के जस्टिस जी जयचन्द्रन ने कहा कि वह स्वयं बचपन में बड़े नेताओं या प्रसिद्ध शख्सियतों को देखने जाया करते थे। उन्होंने कहा कि FIR दर्ज करने से बच्चों के राजनीतिक रैलियों में भाग लेने पर काफी असर पड़ेगा।

कोर्ट ने कोयम्बटूर पुलिस से FIR दर्ज करने पर सफाई पेश करने को कहा। कोर्ट ने पुलिस से 8 मार्च, 2024 को यह जवाब देने को कहा है। कोर्ट ने अन्य कई महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ इस मामले में की। यह मामला 18 मार्च, 2024 को कोयम्बटूर में हुए पीएम मोदी के रोड शो से जुड़ा है।

इस रोड शो में 32 स्कूली बच्चे यूनिफार्म पहन कर पहुँचे थे। इन बच्चों को स्कूल द्वारा रोड शो में शामिल होने को लेकर बुलाया गया था। इस मामले में कुछ मीडिया रिपोर्ट्स ने कहा था कि बच्चों का शमिल होना चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन है।

इसके बाद कोयम्बटूर की बाल संरक्षण अधिकारी ने स्कूल के खिलाफ मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर किशोर न्याय कानून (जुवेनाइल जस्टिस) के तहत मामला दर्ज करवा दिया था। यह मामला स्कूल साईं बाबा विद्यालयम मिडल स्कूल की प्रधानाध्यापिका के विरुद्ध दर्ज करवाई गई थी।

बाल संरक्षण अधिकारी ने पुलिस को दी गई शिकायत में दावा किया था कि इन बच्चों को भीड़ में ले जाया गया, जिससे इन्हें शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना हुई। हालाँकि, इन 32 में से किसी भी बच्चे के परिजन ने ऐसी शिकायत नहीं की थी।

इसके बाद अपने खिलाफ दर्ज FIR को लेकर प्रधानाध्यापिका ने मद्रास हाई कोर्ट के समक्ष FIR रद्द किए जाने को लेकर याचिका लगाई थी। प्रधानाध्यापिका ने कहा था कि उनको और स्कूल को प्रताड़ित करने के लिए यह FIR उनके विरुद्ध दर्ज करवाई गई है।

उन्होंने कहा था कि जिन भी बच्चों को बुलाया गया था, उन्हें उनके घर छोड़ दिया गया था और उन्हें किसी की प्रकार की प्रताड़ना का सामना नहीं करना पड़ा। मद्रास हाई कोर्ट ने इसी याचिका की सुनवाई के दौरान तमिलनाडु पुलिस के FIR दर्ज करने को लेकर लताड़ लगाई और अगले आदेश तक कोई भी कार्रवाई करने पर रोक लगा दी।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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