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150 नहीं, रोज 5000 भैंस की कुर्बानी देंगे: BMC के निर्देश से मजहबी संगठन नाराज, जाएँगे HC

जनहित याचिकाकर्ता मोहम्मद आसिफ कुरैशी और हाजी कुदरतुल्लाह कुरेशी ने दावा किया कि आमतौर पर बकरीद के दौरान लगभग 15,000 कुर्बानियाँ बूचड़खाने में होती थीं, लेकिन महामारी के दौरान आर्थिक कठिनाइयों को देखते हुए कुर्बानियों की संख्या 40% से कम होगी।

बकरीद से ठीक पहले बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) ने शुक्रवार (जुलाई 31, 2020) को एक सर्कुलर जारी किया है। इसके अनुसार 1 से 3 अगस्त तक प्रतिदिन सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक 150 भैंसों की कुर्बानी की अनुमति होगी। मजहबी संगठन ने इस पर नाराजगी जताई है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देश पर BMC ने यह सर्कुलर जारी किया है। शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति सारंग कोतवाल की पीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए, स्पेशल सिविक काउंसल अनिल सखारे से कहा कि वे इस शनिवार से बकरीद में कुर्बान की जाने वाले परमिट की गई भैंसों की संख्या के बारे में अदालत में एक सर्कुलर प्रस्तुत करें।

इसके बाद बीएमसी ने सर्कुलर जारी कर कोरोना वायरस दिशा-निर्देशों के कारण बूचड़खाने में 150 भैंसों को मारने का सर्कुलर जारी किया है। BMC द्वारा जारी नए सर्कुलर में अब सोशल डिस्टेंसिंग को लेकर कोरोना वायरस महामारी संबंधी दिशा-निर्देशों के तहत अन्य नियमों का कड़ाई से अनुपालन करने के लिए कहा है, जिसमें मास्क लगाया जाना बेहद आवश्यक बताया गया है, और कहा गया है कि हैंड सैनिटाइज़र का उपयोग जरूर करें।

याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट के आदेशों को अस्वीकार किया

अखिल भारतीय जमीयत के उपाध्यक्ष इमरान कुरैशी ने कहा कि यह चौंकाने वाली बात है कि बीएमसी ने उनकी जनहित याचिका में 5,000 का उल्लेख करने के बावजूद प्रतिदिन 150 मवेशियों की कुर्बानी निश्चित की है। कुरैशी ने कहा कि वो शनिवार (अगस्त 01, 2020) को अदालत की अवमानना (कंटेम्प्ट ऑफ़ कोर्ट) ​​के लिए उच्च न्यायालय में अपील करेंगे।

जनहित याचिकाकर्ता मोहम्मद आसिफ कुरैशी और हाजी कुदरतुल्लाह कुरेशी ने दावा किया कि आमतौर पर बकरीद के दौरान लगभग 15,000 कुर्बानियाँ बूचड़खाने में होती थीं, लेकिन महामारी के दौरान आर्थिक कठिनाइयों को देखते हुए कुर्बानियों की संख्या 40% से कम होगी। याचिकाकर्ताओं ने कहा था कि चूँकि बिना किसी स्पेशल ऑर्डर के ही बूचड़खाने बंद हो गए हैं, इसलिए भैंसों की कुर्बानी संभव नहीं है।

हालाँकि, जनहित याचिका का निपटारा करते हुए, उच्च न्यायालय ने कहा कि नागरिक प्रशासन और पुलिस यह सुनिश्चित करेगी कि सर्कुलर की शर्तों का उलंघन ना हो।

महाराष्ट्र सरकार ने दी थी राहत

महाराष्ट्र की सेक्युलर सरकार ने कथित तौर पर ईद से पहले कोरोना वायरस दिशा-निर्देशों में लगाए गए कुछ प्रतिबंधों की घोषणा की थी। शुरुआत में महाविकास अघाड़ी सरकार ने कोरोना वायरस महामारी के बीच 31 जुलाई और 1 अगस्त को बकरीद मनाने के लिए कई दिशा-निर्देश जारी किए थे।

दिशा-निर्देशों के अनुसार, लोगों को आस-पास की मस्जिदों में घूमने के बजाए घर पर नमाज अदा करने के लिए कहा गया और जानवरों को ऑनलाइन या फोन पर खरीदने के लिए कहा गया। इस पर मजहबी विधायकों सहित कट्टरपंथियों में नाराजगी और विरोध देखा गया।

हालाँकि, महाराष्ट्र की महाविकास अघाड़ी सरकार के असंतुष्ट मजहबी नेताओं के एक समूह ने प्रतिबंधों के खिलाफ अपनी शिकायतें उठाईं, जिससे मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने बकरीद से पहले इन दिशा-निर्देशों की सख्ती कम कर दी।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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