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उद्धव सरकार की प्रतीकात्मक कुर्बानी की अपील नहीं आई पार्टी के नेताओं को रास, कॉन्ग्रेस के आरिफ़ नसीम सहित कई नेताओं ने किया विरोध

"हमारी मुख्य आपत्ति दो मुद्दों पर है। सबसे पहले, क़ुर्बानी प्रतीकात्मक रूप से नहीं की जा सकती है और अधिकांश लोगों को बकरियों को ऑनलाइन खरीदने के बारे में पता ही नहीं है। वहीं इस्लाम भी प्रतीकात्मक क़ुर्बानी देने की मंज़ूरी नहीं देता। फिर बकरा ख़रीदने से पहले उसकी सेहत, वजन सब कुछ देखना पड़ता है उसके बाद ही क़ुर्बानी दी जाती है।"

कोरोना के बढ़ते संकट के बीच महाराष्ट्र सरकार ने बकरीद के मौके पर प्रतीकात्मक कुर्बानी का सुझाव दिया है। प्रतीकात्मक बकरी ईद मनाने के फ़रमान पर उन्हीं की पार्टी के नेता नाराज हो गए है। कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्य के पूर्व कैबिनेट मंत्री आरिफ़ नसीम खान ने सरकार के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई है।

बता दें, इस बार बकरीद 1 अगस्त को मनाया जाना है। महाराष्ट्र सरकार ने बकरीद लेकर पिछले शुक्रवार को दिशानिर्देश जारी किया था। नसीम खान ने सरकार को घेरते हुए मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर माँग की फैसला तुरंत बदला जाए और सभी मंत्रियों, वर्तमान और पूर्व विधायकों और अधिकारियों की एक तत्काल बैठक बुलाकर ईद को लेकर सही फ़ैसला किया जाए।

खान ने कहा, “हमारी मुख्य आपत्ति दो मुद्दों पर है। सबसे पहले, क़ुर्बानी प्रतीकात्मक रूप से नहीं की जा सकती है और अधिकांश लोगों को बकरियों को ऑनलाइन खरीदने के बारे में पता ही नहीं है। वहीं इस्लाम भी प्रतीकात्मक क़ुर्बानी देने की मंज़ूरी नहीं देता। फिर बकरा ख़रीदने से पहले उसकी सेहत, वजन सब कुछ देखना पड़ता है उसके बाद ही क़ुर्बानी दी जाती है। जो कि ऑनलाइन संभव नहीं है। सरकार को नए दिशानिर्देश जारी करने चाहिए क्योंकि वर्तमान दिशानिर्देश समुदाय के धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप करते हैं।”

वहीं महाराष्ट्र में बकरीद को लेकर बनाए जा रहे दिशानिर्देश में वरिष्ठ अधिकारियों और मंत्रियों के साथ शामिल कॉन्ग्रेस के विधायक अमीन पटेल ने भी इस मामले का विरोध किया है। उन्होंने कहा, मैं सोशल डिस्टेंसिंग की निगरानी के लिए हूँ। न कि मैं इस बात को ख्याल रखने के लिए हूँ कि लोग महामारी के दौरान बकरीद के मौके पर घर में नमाज पढ़ रहे या नहीं, भीड़ जुटा रहे या नहीं। लेकिन समुदाय को प्रतीकात्मक रूप से कुर्बानी करने के लिए नहीं कहा जा सकता है।

जारी दिशानिर्देश को “अस्पष्ट और भ्रमित” बताते हुए कई नेताओं ने महाराष्ट्र सरकार पर निशाना साधा है। इसके साथ उन्होंने एनसीपी प्रमुख शरद पवार से भी मामले में हस्तक्षेप की माँग की है। प्रतीकात्मक कुर्बानी और ऑनलाइन बकरों की खरीदारी पर समाजवादी पार्टी के विधायक रईस शेख ने भी अपना विरोध दर्ज किया है। उन्होंने कहा कि वो इस मामले को लेकर शरद पवार से बात करेंगे। उन्होंने आगे कहा कि अगर गणपति पूजन प्रतीकात्मक नहीं हो सकता, तो खास मजहब को क्यों जानवरों की बलि प्रतीकात्मक करने के लिए कहा जाता है?

बात दें बकरीद पर जारी दिशानिर्देश को लेकर अब महाराष्ट्र में जमकर राजनीति हो रही है। वहीं इस मुद्दे को लेकर जमीयतुल उलेमा के नेता गुलज़ार आज़मी ने कहा कि सरकार द्वारा समुदाय विशेष को मवेशियों को बलिदान करने की अनुमति दी जानी चाहिए।

आज़मी ने कहा, “सात लोग एक मवेशी जैसे कि भैंस को आपस में बाँट सकते हैं, जबकि एक बकरी या भेड़ सिर्फ एक व्यक्ति के लिए होता है। कोई भी इस पहलू को नहीं देख रहा है जो सिविक अधिकारियों का बोझ कम करेगा। अगर सरकार मवेशियों की कुर्बानी की अनुमति देती है तो यह काफी संख्या में लोगों की क़ुर्बानी का दायित्व पूरा करेगा।”

गौरतलब है कि महाराष्ट्र सरकार ने बकरीद को लेकर दिशानिर्देश जारी किया था। जिसमें उन्होंने लोगों से नमाज मस्जिदों या फिर ईदगाह में नहीं बल्कि घरों में रहकर अदा करने की अपील की थी। इसके अलावा सरकार ने इस बार प्रतीकात्मक कुर्बानी देने के लिए कहा था। वहीं यह भी कहा था कि अगर नागरिक पशु खरीदना चाहते हैं तो वे ऑनलाइन खरीदारी करें।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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