Saturday, April 13, 2024
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जिस संभाजी भिड़े को शरद पवार ने बताया था भीमा कोरेगाँव का विलेन, उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला: पुलिस ने बताया- केस से हटा दिया है नाम

महाराष्ट्र के भीमा कोरेगाँव में 1 जनवरी 2018 को हिंसा हुई थी। कथित दलित राजनीतिक कार्यकर्ता अनीता सावले ने भिड़े के खिलाफ हिंसा भड़काने का आरोप लगाते हुए FIR दर्ज करवाई थी।

महाराष्ट्र के भीमा कोरेगाँव में 1 जनवरी 2018 को हिंसा हुई थी। लिबरल और वामपंथी नेक्सस इसके लिए संभाजी भिड़े को जिम्मेदार बताता रहा है। एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार भी उन पर हिंसा का माहौल तैयार करने का आरोप लगा चुके हैं। लेकिन पुणे पुलिस को इस मामले में संभाजी भिड़े के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला है। पुणे ग्रामीण पुलिस ने बुधवार (4 मई 2022) को महाराष्ट्र राज्य मानवाधिकार आयोग के समक्ष इस संबंध में एक रिपोर्ट पेश की। इसमें बताया गया है कि हिंसा में संभाजी भिड़े की कोई भूमिका नहीं पाई गई है और उनका नाम मामले से हटा दिया गया है।

भीमा कोरेगाँव हिंसा के एक दिन बाद कथित दलित राजनीतिक कार्यकर्ता अनीता सावले ने हिंदुत्ववादी नेताओं संभाजी भिड़े और मिलिंद एकबोटे के खिलाफ हिंसा भड़काने का आरोप लगाते हुए FIR दर्ज करवाई थी। इस हिंसा में एक की जान चली गई थी, जबकि कई लोग घायल हो गए थे। पिंपरी-चिंचवड़ की रहने वाली सावले राजनीतिक संगठन बहुजन रिपब्लिकन सोशलिस्ट पार्टी की नेता भी हैं।

मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एकबोटे की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद पुणे ग्रामीण पुलिस उन्हें गिरफ्तार किया था। बाद में उन्हें अदालत से जमानत मिल गई और इधर पुलिस ने चार्जशीट भी दाखिल कर दिया। हालाँकि सबूतों के अभाव में पुलिस संभाजी भिड़े को कभी गिरफ्तार नहीं कर पाई।

इस बीच, मुंबई के एक वकील आदित्य मिश्रा ने एक साल पहले MSHRC के समक्ष एक शिकायत दर्ज की, जिसमें 28 मार्च, 2018 की एक अखबार की रिपोर्ट का जिक्र था। इसमें महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के उस बयान का जिक्र था, जिसमें उन्होंने कहा था कि पुलिस के पास भिड़े के खिलाफ कोई सबूत नहीं है। .

मिश्रा ने शिकायत में कहा, “क्या कोई XYZ को बिना किसी सबूत के किसी को अफवाहों के आधार पर आरोपित के रूप में फँसा सकता है?” उन्होंने आगे अनुरोध किया कि भिड़े के खिलाफ मामले में पुलिस से स्थिति रिपोर्ट माँगी जाए। मिश्रा ने आयोग से न्याय के हित में कानून के अनुसार आवश्यक निर्देश की माँग करते हुए कहा था, “भिड़े गुरुजी के सिर पर कब तक FIR की तलवार लटकी रहेगी।”

MSHRC ने पुणे ग्रामीण पुलिस अधिकारियों को तलब कर भिड़े के खिलाफ मामले में स्थिति रिपोर्ट माँगी थी। बुधवार को सुनवाई के दौरान MSHRC के समक्ष एक रिपोर्ट पेश किया गया। इस पर 3 मई, 2022 की तारीख थी और पुणे ग्रामीण पुलिस अधीक्षक अभिनव देशमुख का सिग्नेचर था। रिपोर्ट के मुताबिक भिड़े के खिलाफ अनीता सावले द्वारा दर्ज मामले में उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला। इसलिए, भिड़े का नाम हटा दिया गया है, जबकि शेष 41 आरोपितों के खिलाफ धारा 307, 143, 147, 148, 149, 295 (ए), 435, 439, 153 (ए), 120 (बी) के तहत चार्जशीट दायर किया गया है।

वकील मिश्रा ने कहा, “पुलिस ने अपनी रिपोर्ट सौंपते हुए कहा कि भिड़े का नाम मामले से हटा दिया गया है। MSHRC ने पुलिस को शिकायतकर्ता द्वारा दिए गए बयान को मजिस्ट्रेट अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए कहा है। मामले की अंतिम सुनवाई 4 जुलाई, 2022 को होगी।”

कौन हैं संभाजी भिड़े?

संभाजी भिड़े का असली नाम मनोहर है। वे महाराष्ट्र के सांगली जिले के रहने वाले हैं। सांगली में उन्हें हर कोई ‘गुरुजी’ के नाम से जानता है। भिड़े ने पुणे विश्वविद्यालय से अटॉमिक साइंस में एमएससी की है। वह पुणे के फर्ग्युसन कॉलेज में प्रोफेसर भी रह चुके हैं। वे बाबाराव भिड़े के भतीजे हैं, जो सांगली में आरएसएस के बड़े कार्यकर्ता रहे हैं। 1980 के दशक में संभाजी भी RSS से जुड़े हुए थे और संगठन के लिए उन्होंने काफी काम भी किया। 1980 के दशक में उन्होंने RSS छोड़ा और ‘शिव प्रतिष्ठान हिंदुस्तान’ नाम का संगठन बनाया। 

इस संगठन की शुरुआत 1984 में हुई। जिस तरह के काम RSS करता है, ठीक वैसा ही काम शिव प्रतिष्ठान हिंदुस्तान संगठन भी करता है। उनकी संस्था का मुख्य काम शिवाजी महाराज के बारे में लोगों को बताना है। संभाजी ने रायगढ़ किले में छत्रपति शिवाजी के लिए सोने का सिंहासन बनाने का प्रण लिया है, जिसके लिए कम से कम 144 किलो सोने का इस्तेमाल होगा। संभाजी नंगे पैर चलते हैं। साइकल से चलना पसंद करते हैं। 2014 में लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान भी उनके नाम की तब बहुत चर्चा हुई थी जब प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी नरेंद्र मोदी ने चुनाव प्रचार के दौरान उनसे मुलाक़ात की थी और मंच से उन्हें ‘गुरुजी’ कहा था। उन्होंने मंच से कहा था, “भिड़े गुरुजी ने मुझे आमंत्रित नहीं किया, मैं यहाँ उनके आदेश से आया हूँ।”

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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