विषय: Bhima Koregaon

सुधा भारद्वाज, वर्नोन गोंजाल्विस और अरुण फरेरा

अर्बन नक्सल: सुधा भारद्वाज, वर्नोन गोंजाल्विस और अरुण फरेरा को बेल नहीं, भीमा-कोरेगाँव हिंसा की रची थी साजिश

पुलिस के अनुसार तीनों कथित एक्टिविस्ट्स 4 ऐसे संगठनों से जुड़े थे, जो प्रतिबंधित माओवादी संगठन के मुखौटे के रूप में काम करते हैं। वर्नोन और फरेरा नक्सली संगठन में भर्ती के लिए के लिए भी लोगों को उकसा रहे थे।
भीमा कोरेगाँव मामला

अर्बन नक्सल गौतम नवलखा की याचिका पर सुनवाई से SC के जस्टिस भट्ट ने भी ख़ुद को किया अलग

इस मामले में नवलखा के अलावा वरवरा राव, अरुण फरेरा, वर्णन गोन्साल्विज और सुधा भारद्वाज भी आरोपित हैं। पुणे पुलिस ने 31 दिसंबर, 2017 को एल्गार परिषद के बाद एक दिसंबर को भीमा-कोरेगाँव में हुई कथित हिंसा के मामले में जनवरी, 2018 को FIR दर्ज की थी।
गौतम नवलखा, रंजन गोगोई

अर्बन नक्सल गौतम नवलखा की याचिका पर सुनवाई से अलग हुए CJI गोगोई, कहा- कोई अन्य बेंच सुने

महाराष्ट्र सरकार ने अनुरोध किया था कि इस सम्बन्ध में किसी भी प्रकार का आदेश पारित करने से पहले उसकी बात सुनी जानी चाहिए। हाईकोर्ट ने गौतम नवलखा के ख़िलाफ़ दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने से इनकार करते हुए इसे गंभीर मामला करार दिया था।
गौतम नवलखा

भीमा-कोरेगॉंव मामला: गौतम नवलखा पर चलेगा मुकदमा, नक्सलियों से संपर्क होने की बात मानी

नवलखा के खिलाफ पुणे पुलिस ने जनवरी 2018 में प्राथमिकी दर्ज की थी। इसके खिलाफ उसकी याचिका ख़ारिज करते हुए अदालत ने कहा, "मामला भीमा-कोरेगॉंव हिंसा तक ही सीमित नहीं है। इसमें कई और पहलू हैं। गंभीरता को देखते हुए हमें लगता है कि पूरी छानबीन जरूरी है।"
भीमा कोरेगाँव हिंसा

भीमा कोरेगाँव हिंसा: DU प्रोफेसर के घर पुणे पुलिस ने मारा छापा, नक्सलियों से सम्बन्ध की आशंका

हनी बाबू डीयू के प्रोफ़ेसर हैं और 'द कमिटी ऑफ सिविल राइट्स एक्टिविस्ट्स' के सदस्य हैं। इस कमिटी का गठन जीएन साईबाबा द्वारा किया गया था। डीयू प्रोफ़ेसर साईबाबा को 2017 में महाराष्ट्र की एक अदालत द्वारा आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गई थी।
सुरेंद्र गाडलिंग, सुधीर धावले

जाँच आयोग के सामने पलटे अर्बन नक्सल, रिटायर जज बोले- वापस जेल में डाल दो

सुधीर धावले ने एक आवेदन दाखिल कर आयोग के समक्ष बयान देने का आग्रह किया था। धावले एल्गार परिषद के आयोजकों में से एक था। एल्गार परिषद ने माओवादियों के समर्थन से भीमा कोरेगाँव युद्ध की बरसी पर हिंसा भड़काई थी।

भीमा कोरेगाँव: बाबासाहेब अंबेदकर ने नहीं दी थी ब्राह्मणों को गाली, झूठ बोलते हैं अर्बन नक्सली

कोरेगांव की लड़ाई की प्रशंसा ब्रिटेन की संसद तक में हुई थी और कोरेगाँव में एक स्मारक भी बनवाया गया था जिसपर उन 22 महारों के नाम भी लिखे हैं जो कम्पनी सरकार की ओर से लड़े थे। यह प्रमाणित होता है कि कोरेगाँव की लड़ाई दलित बनाम ब्राह्मण थी ही नहीं, यह तो दो शासकों के मध्य एक बड़े युद्ध का छोटा सा हिस्सा मात्र थी।
प्रोफ़ेसर आनंद तेलतुम्बडे

सरकार को अस्थिर करने की साज़िश रचने वाला आनंद तेलतुम्बडे गिरफ़्तार

पुलिस का दावा है कि अगले दिन हिंसात्मक घटनाओं के लिए एल्गार परिषद के दौरान दिए गए भाषण जिम्मेदार थे।
प्रोफ़ेसर आनंद तेलतुम्बडे

दंगे, हिंसा, आतंक से सरकार को अस्थिर करने की साज़िश की तेलतुम्बडे ने, पुणे पुलिस का दावा

अभियोजक उज्ज्वला पंवार ने आरोप लगाया है कि तेलतुम्बडे, गोवा प्रबंधन संस्थान के एक प्रोफ़ेसर, अन्य सह-अभियुक्त एक आपराधिक साज़िश में शामिल थे।

ताज़ा ख़बरें

हमसे जुड़ें

113,096फैंसलाइक करें
22,561फॉलोवर्सफॉलो करें
119,000सब्सक्राइबर्ससब्सक्राइब करें

ज़रूर पढ़ें

Advertisements