Thursday, April 18, 2024
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मालेगाँव में मातम मनाने कब्रिस्तान निकली 600 की भीड़, उधर अपने पिता के अंतिम संस्कार में नहीं गए CM योगी

मालेगाँव के पुलिस सब-इंस्पेक्टर अभिजीत जाधव ने बताया कि एक जनाजा कब्रिस्तान की ओर जा रही थी, जिसमें 500-600 की तादाद में लोग मातम मनाने जा रहे थे। पुलिस ने जब इतनी बड़ी भीड़ को देखा तो कहा कि 20 लोगों को अंदर जाने की इजाजत दी जा सकती है।

महाराष्ट्र में लॉकडाउन का पालन कराने में सरकार बुरी तरह विफल रही है। चाहे वो पालघर में साधुओं की हत्या का मामला हो या फिर मुंबई के बांद्रा में हज़ारों लोगों का जुटना। अब मालेगाँव से ख़बर आई है, जहाँ जनाजे के लिए 500-600 लोगों की भीड़ जुट गई। ये सभी लोग कब्रिस्तान जा रहे थे। बता दें कि सरकार का आदेश है कि किसी भी प्रकार के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में 5 से ज्यादा लोग नहीं होने चाहिए, बावजूद इसके मालेगाँव में 500 से ज्यादा लोगों की भीड़ जुट गई। पुलिस ने रास्ते में ही उन सबको रोका और भीड़ को किसी तरह तितर-बितर किया। बावजूद इसके 25-30 लोग कब्रिस्तान पहुँच गए।

ये घटना मालेगाँव के आज़ादपुर क्षेत्र की है। पुलिस ने जब इतनी बड़ी भीड़ को देखा तो कहा गया कि 20 लोगों को अंदर जाने की इजाजत दी जा सकती है। महाराष्ट्र पुलिस का दावा है कि इसके बाद अधिकतर लोग अपने घर चले गए, जबकि 20 लोगों को ही सिर्फ़ कब्रिस्तान में जाने की इजाजत दी गई। हालाँकि, ये संख्या अधिक होने की बात भी कही जा रही है। पुलिस सब-इंस्पेक्टर अभिजीत जाधव ने बताया कि एक जनाजा कब्रिस्तान की ओर जा रही थी, जिसमें 500 या 600 की तादाद में लोग मातम मनाने जा रहे थे।

उन्होंने आगे बताया कि पुलिस ने हाथ जोड़ कर उनसे विनती करने हुए कहा कि आपलोग इतनी ज्यादा तादाद में मातम मनाने न जाएँ क्योंकि कोरोना वायरस के संक्रमण का ख़तरा है और अभी पूर्ण लॉकडाउन भी है। उन्होने कहा कि लोगों ने पुलिस की विनती मान ली और फिर ज्यादातर लोग वापस घर लौट गए। भीड़ जहाँ से गुजर रही थी, वहाँ पास में ही रहमानी मस्जिद भी है। पुलिस ने मालेगाँव के लोगों का धन्यवाद करते हुए कहा कि वो जनता के लिए हमेशा खड़ी है और ऐसे ही उनका सहयोग करते रहें।

ये सब तब हो रहा है, जब देश के सबसे ज्यादा जनसंख्या वाले राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक नई मिसाल पेश की है। सोमवार (अप्रैल 20, 2020) को जब उनके पिता आनंद सिंह बिष्ट के निधन की ख़बर आई, वो यूपी के कोविड-19 टीम के साथ बैठक कर रहे थे। 89 वर्षीय बीमार पिता के निधन के बावजूद उन्होंने बैठक नहीं रोकी। बैठक ख़त्म होने के बाद ही उन्होंने घर-परिवार से बातचीत की। सीएम योगी ने लॉकडाउन के नियमों का पालन करते हुए और यूपी में अपनी मौजूदगी की महत्ता के कारण अपने पिता के अंतिम-संस्कार में भी भाग नहीं लेने का फ़ैसला लिया।

आज़ादपुर में रहमानी मस्जिद के पास से निकली भीड़ (वीडियो साभार: इंडिया टीवी)

इसके लिए उन्होंने बाकायदा अपनी माँ को पत्र लिख कर क्षमा-याचना की। योगी आदित्यनाथ ने अपने परिवार से यह भी अपील की है कि अंतिम-संस्कार में 5 से ज्यादा लोग न जुटें। उन्होंने बताया कि लॉकडाउन ख़त्म होते ही वो अपने परिवार से मिलेंगे और अपनी माँ के दर्शन करेंगे। जब देश का इतना बड़ा नेता इस तरह के आदर्श के मानक स्थापित कर रहा है, तब भी मालेगाँव जैसी घटनाओं का होना ये बताता है कि समाज का एक ख़ास वर्ग बार-बार एक ही ग़लती करने और सरकारी दिशानिर्देशों की धज्जियाँ उड़ाने में अभ्यस्त हो चुका है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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