Saturday, July 2, 2022
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‘हिन्दू कोई धर्म नहीं, ज्ञानवापी मस्जिद में शिवलिंग नहीं फव्वारा है’: मौलाना साजिद रशीदी ने सनातन संस्कृति का उड़ाया मजाक, कोर्ट के फैसले पर भी उठाया सवाल

“इस्लामी शासक मंदिरों का ध्वंस करने के बाद शिवलिंग को 100 से भी अधिक सालों तक बचाए रखने का काम क्यों करेंगे? अगर उनकी योजना मंदिरों को तोड़ने की थी, तो वे शिवलिंग क्यों रखते।”

ज्ञानवापी विवादित ढाँचे को लेकर चल रही सुनवाई के बीच अखिल भारतीय इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने बेतुका बयान देते हुए गुरुवार (19 मई 2022) को कहा कि हिन्दू धर्म कोई धर्म नहीं है। लोग फालतू में ही ज्ञानवापी मस्जिद के विवादित ढाँचे में मिले शिवलिंग से खुश हो रहे हैं। मौलाना ने हिन्दू संस्कृति और आस्था का मजाक उड़ाते हुए शिवलिंग को ‘फव्वारा’ करार दिया।

एक्टिविस्ट अंबर जैदी को दिए एक इंटरव्यू के दौरान मौलाना साजिद रशीदी ने कोर्ट पर भी सवाल उठाते हुए उस पर पक्षपातपूर्ण तरीके से हिन्दुओं के पक्ष में फैसला सुनाने का आऱोप लगाया। उनका कहना था, “भारत में किसी भी अदालत को साल 1947 से मौजूद धार्मिक स्थलों में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है और कोई भी अदालत वर्शिप एक्ट 1991 का उल्लंघन करने वाली किसी भी याचिकाओं की सुनवाई की इजाजत नहीं दे सकता। इस मामले में सेशन कोर्ट ने याचिका को इजाजत देकर और वीडियोग्राफी सर्वेक्षण की अनुमति के बाद अब वजूखाना में मुस्लिमों के प्रवेश पर रोक लगाकर मस्जिदों की धार्मिक प्रथाओं का उल्लंघन किया है। वुज़ू नमाज़ का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है और इस्लामिक धार्मिक प्रथा को बर्बाद करने के लिए कोर्ट जिम्मेदार है।”

इसके साथ ही मौलाना ने राम मंदिर पर फैसले को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस रंजन गोगोई की आलोचना की। रशीदी का आरोप है कि कोर्ट ने तथ्यों को दरकिनार कर अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए हिंदुओं के पक्ष में फैसला सुनाया। गोगोई को राज्यसभा सीट चाहिए थी। कोर्ट का निर्णय एएसआई सर्वेक्षण या अन्य प्रासंगिक तथ्यों पर आधारित नहीं था।

इसके साथ ही मौलाना ने ये भी दावा किया कि ज्ञानवापी मस्जिद मुगल आक्रान्ता अकबर के शासन के बाद से अस्तित्व में है और औरंगजेब ने मंदिर को तोड़कर इसे नहीं बनाया था। उन्होंने कहा, “कोई मंदिर नहीं तोड़ा गया। वहाँ कोई शिवलिंग नहीं है। हाल ही में खोजा गया स्ट्रक्चर एक फव्वारे का हिस्सा है न कि शिवलिंग।” बेतुका दावा करते हुए मौलाना ने आगे कहा, “इस्लामी शासक मंदिरों का ध्वंस करने के बाद शिवलिंग को 100 से भी अधिक सालों तक बचाए रखने का काम क्यों करेंगे? अगर उनकी योजना मंदिरों को तोड़ने की थी, तो वे शिवलिंग क्यों रखते।”

वहीं जब अंबर जैदी ने पूछा कि मुस्लिम समुदाय के लोग शिवलिंग का सोशल मीडिया पर क्यों मज़ाक उड़ा रहे हैं और हिन्दुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत कर रहे हैं’, तो इसके जबाव में मौलाना रशीदी ने कहा कि हिन्दुओं ने खुद ही अपना मजाक उड़ाया है। रशीदी के मुताबिक, फव्वारे को शिवलिंग कहना अपने आप में एक बड़ा मजाक है। लोग इसका मजाक क्यों नहीं उड़ाएँगे? उन्होंने ये भी कहा कि हिन्दू कोई धर्म है ही नहीं।

साजिद रशीदी की हिन्दुओं को चेतावनी

हिन्दू विरोधी बयानों के लिए कुख्यात मौलाना साजिद रशीदी ने इसी साल 8 जनवरी 2022 को हिन्दुओं को धमकी देते हुए कहा था कि भविष्य में कोई मोहम्मद बिन कासिम अयोध्या के राम मंदिर को ध्वस्त कर सकता है। इसके साथ ही रशीदी ने दावा किया था कि भारत पर राज कर चुके मुस्लिम शासक लिबरल औऱ धर्मनिरपेक्ष थे, जिन्होंने मस्जिदों के साथ ही मंदिरों का भी निर्माण करवाया था। इस्लामिक शासकों ने हिन्दू धार्मिक स्थलों की सुरक्षा के लिए दान भी दिया था।

गौरतलब है कि इससे पहले अगस्त 2020 में राम मंदिर के भूमि पूजन के दौरान भी रशीदी ने विवादित टिप्पणी की थी। तब मौलाना ने धमकी दी थी कि राम मंदिर को ध्वस्त कर फिर से मस्जिद बनाई जाएगी। इसके साथ ही पीएम मोदी के अयोध्या के कार्यक्रम में शामिल होने को भी संविधान का उल्लंघन बताया था।

ज्ञानवापी के विवादित ढाँचे में मिला शिवलिंग

गौरतलब है कि हाल ही वारणसी कोर्ट के आदेश के बाद विवादित ज्ञानवापी ढाँचे के वीडियो सर्वे के दौरान वहाँ वुजुखाना के अंदर एक शिवलिंग मिला था। वुजुखाना मस्जिद के अंदर की वो जगह है, जहाँ पर नमाज से पहले मुस्लिम अपने हाथ-पैर धोते हैं। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने भी विवादित ढाँचे से उस जगह को बचाने के आदेश जारी किए, जहाँ शिवलिंग मिला था।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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