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मंदिर में मौलवी ने कराया निकाह: गुस्साए लोगों ने कहा- मंदिरों को बैंक्वेट हॉल मत बनाओ, कल को इफ्तार होगा और बीफ पकेगा?

विवेक मिश्र ने लिखा, "जैसे ही कॉन्ग्रेस की सरकार किसी राज्य में बनती है, ऐसी घटनाएँ प्रारंभ हो जाती हैं। क्या यह कोई साजिश है, सनातनियों के खिलाफ?"

हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के रामपुर में स्थित सत्य नारायण मंदिर में निकाह करने की खबर सामने आई है। मंदिर के अंदर रविवार (5 मार्च, 2023) को मौलवी ने निकाह करवाया। इस दौरान यहाँ मौलवी और गवाहों के अलावा एक वकील भी मौजूद रहा।

दुल्हन के पिता महेंद्र सिंह मलिक ने कहा कि बेटी की शादी रामपुर के सत्यनारायण मंदिर परिसर में हुई है। शहर के लोगों ने चाहे विश्व हिंदू परिषद हो या मंदिर ट्रस्ट, सकारात्मक और सक्रिय रूप से हमारा सहयोग किया है।

ठाकुर सत्य नारायण मंदिर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और विश्व हिंदू परिषद (VHP) का जिला कार्यालय है। सत्यनारायण मंदिर ट्रस्ट रामपुर के महासचिव विनय शर्मा ने न्यूज एजेंसी ANI से कहा कि विश्व हिंदू परिषद और आरएसएस पर अक्सर मुस्लिम विरोधी होने का आरोप लगाया जाता है। हमारी मौजूदगी में यहाँ निकाह संपन्न हुआ। सनातन धर्म हमेशा सबको साथ लेकर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

वहीं, सोशल मीडिया पर निकाह की तस्वीर वायरल होने के बाद यूजर्स काफी आक्रोशित हैं। जहाँ कुछ लोग इसे सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल बता रहे हैं। वहीं, कुछ लोग इस निकाह को इस्लाम में हराम बता रहे हैं। एक यूजर लिखता है कि विशुद्ध चू#यापा है ये। मंदिरों को बैंक्वेट हॉल मत बनाओ। कल को इफ्तार पार्टी देना और फिर वहीं बीफ पकाने लगना। शिमला के लोग इस मंदिर के पुजारी को पूछें कि धर्म में कहाँ ऐसे प्रावधान हैं? हाँ, ये लोग हिन्दू बनकर, हिन्दू रीति से विवाह करें तो समस्या नहीं। दुर्भाग्य।

विवेक मिश्र ने लिखा, “जैसे ही कॉन्ग्रेस की सरकार किसी राज्य में बनती है, ऐसी घटनाएँ प्रारंभ हो जाती हैं। क्या यह कोई साजिश है, सनातनियों के खिलाफ?”

एक और ने लिखा कि शादी हुई है तो खाना भी हुआ होगा और खाने में नाॅनवेज भी रहा होगा? धन्य है उस मंदिर के कर्ताधर्ता।

रोहन ने लिखा, “कभी मस्जिद में भी सात फेरे लेने का मौका दो।”

सरगना नाम की यूजर ने हिंदू मंदिर में निकाह करने पर कहा, “ये इस्लाम में हराम है।”

राहुल लिखते हैं, “हिंदू रीति रिवाज से होना चाहिए था….हिंदू मंदिर में कुरान पढ़ाकर निकाह शर्मनाक।”

साकेत ने लिखा कि दिखावटी भाईचारे के सारे चु#@#यापे हिंदुओ के मंदिरों में ही क्यों होते हैं? कभी इस भाईचारे को निभाने के लिए मस्जिदों का उपयोग क्यों नहीं होता है? 10 जगह पत्थर फेंककर एक जगह ऐसा ड्रामा क्यों? पहले सर तन जुदा करो फिर ह्यूमन चेन बनाकर चु-*#@#या बनाओ? बहुत धूल झोंक दी बस अब नहीं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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