Homeदेश-समाजनासिर ने बीड़ी सुलगाने के लिए माचिस जलाई, जलती तीली से लाइब्रेरी में आगः...

नासिर ने बीड़ी सुलगाने के लिए माचिस जलाई, जलती तीली से लाइब्रेरी में आगः 3000 भगवद्गीता समेत 11 हजार पुस्तकें राख

आरोपित सैयद नासिर देर रात नशे की हालत में घर लौटा। उसका अपनी माँ और बहनों से झगड़ा हुआ। इसके बाद वह घर से बाहर निकल गया। बाहर निकल कर उसने बीड़ी सुलगाने के लिए माचिस की तीली जलाई और उसे लापरवाही से फेंक दिया।

हाल ही में कर्नाटक के मैसूर की एक लाइब्रेरी में आग लगने की घटना सामने आई थी। इसमें 3000 भगवद्गीता समेत 11 हजार पुस्तकें जल कर राख हो गई थी। मामले में मैसूर पुलिस ने सैयद नासिर नाम के शख्स को गिरफ्तार किया है।

द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक मैसूर सिटी पुलिस ने लापरवाही से जलती माचिस की तीली फेंकने के आरोप में उसे गिरफ्तार किया है। इसी वजह से आग लगी थी। पुलिस का कहना है कि 35 वर्षीय आरोपित ने बीड़ी सुलगाने के लिए माचिस की तीली जलाई और फिर बिना इधर-उधर देखे उसे लापरवाही से फेंक दिया।

शहर के पुलिस आयुक्त चंद्रगुप्त ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि आरोपित सैयद नासिर देर रात नशे की हालत में घर लौटा। उसका अपनी माँ और बहनों से झगड़ा हुआ। इसके बाद वह घर से बाहर निकल गया। बाहर निकल कर उसने बीड़ी और माचिस की तीली जलाई और खुले में एक मरम्मत की दुकान के बाहर रखे फर्नीचर और कुशन पर माचिस की तीली फेंक दी।

घटनास्थल से उसके निकलने के कुछ ही मिनटों बाद आग लग गई। दो स्थानीय लोगों ने इस घटना को देखा और उन्होंने आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन वे सफल नहीं हो सके। आग की लपटें बढ़ती गई और जल्द ही पूरी लाइब्रेरी राख के ढेर में तब्दील हो गई। 

पुलिस ने डिटेल्स पता करने के लिए सीसीटीवी में कैद तस्वीरों का सहारा लिया। पुलिस का कहना है कि सैयद नासिर और सैयद इसाक के बीच में कोई दुश्मनी नहीं है। इसाक ने आरोप लगाया था कि उपद्रवियों ने कन्नड़ भाषा के प्रति दुश्मनी के कारण पुस्तकालय को आग लगा दी। हालाँकि यह पता लगाने के लिए आगे की जाँच चल रही है कि घटना जान-बूझकर की गई थी या अनजाने में। 

बता दें कि यह सार्वजनिक पुस्तकालय सैयद इसाक नाम के शख्स का था। सैयद इसाक दिहाड़ी मजदूर हैं। इसाक ने इस सार्वजनिक पुस्तकालय को अमार मस्जिद के पास राजीव नगर में एक निगम पार्क के अंदर एक शेड जैसी संरचना में स्थापित किया था। हर दिन, 100-150 से अधिक लोग उनके पुस्तकालय में आते थे।  इसाक कन्नड़, अंग्रेजी, उर्दू और तमिल सहित 17 से अधिक समाचार पत्रों की खरीद करते थे। वह लाइब्रेरी के रख-रखाव और अखबारों की खरीद पर लगभग 6,000 रुपए खर्च करते थे।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

ग्लोबल टाइम्स के ‘टैप वॉटर’ से आगे की कहानी: भारत-जापान कैसे बदल रहे हैं एशिया का भविष्य

चीनी मीडिया ने प्रोपेगैंडा फैलाते हुए कहा कि जापानी प्रतिनिधिमंडल ने भारत दौरे पर 'नल का पानी' (टैप वॉटर) न पीकर भारत का अपमान किया।

आतंकी को बताया ‘शहीद-ए-आजम’, कश्मीर पर बताया- ‘दमनकारी भारत’ का कब्जा… J&K की ‘सरकारी किताब’ में आतंकवाद का महिमामंडन: अब हो रही कार्रवाई

J&K स्कूल लाइब्रेरी किताब विवाद में सरकार की बड़ी कार्रवाई: दो किताबें वापस, लेखक-पब्लिशर्स ब्लैकलिस्ट, 8 अधिकारी निलंबित और जाँच शुरू।
- विज्ञापन -