Tuesday, April 23, 2024
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नई मस्जिद का नाम डॉ कलाम, परमवीर अब्दुल हमीद या अशफाकउल्ला खान के नाम पर हो: VHP की माँग

मुख्य याचिकाकर्ता इकबाल अंसारी ने कहा कि वो देश को आश्वस्त कर सकते हैं कि वो हिन्दुओं के साथ बिना किसी उपद्रव के, गरिमा के साथ रहेंगे। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वो शांति व्यवस्था को बिगड़ने नहीं देंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने दशकों से लंबित अयोध्या विवाद पर 9 नवंबर को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए विराम लगा दिया। अपने ऐतिहासिक फैसले में सर्वोच्च न्यायालय ने रामजन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के लिए तीन महीने में ट्रस्ट के गठन का आदेश दिया है। विश्व हिंदू परिषद (VHP) के कार्यकताओं ने सोमवार (नवंबर 11, 2019) को अपनी इच्छा जताते हुए कहा कि वो चाहते हैं कि भाजपा अध्यक्ष और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी उस ट्रस्ट के सदस्य हों।

साथ ही विहिप ने यह भी कहा कि वह केंद्र से अनुरोध करेगा कि 5 एकड़ जमीन पर बनने वाली मस्जिद का नाम बाबर के नाम पर रखने की अनुमति न दे। विहिप के प्रवक्ता शरद शर्मा ने कहा, “बाबर एक विदेशी आक्रांता (हमलावर) था। हम सरकार को इसकी अनुमति नहीं देने के लिए संपर्क करेंगे। भारत में बहुत सारे अच्छे मुस्लिम हैं। देश की शांति और विकास में उनका काफी योगदान रहा है। इनमें वीर अब्दुल हमीद, अशफाकउल्ला खान और पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम का नाम आता है।। नई मस्जिद का नाम उनमें से किसी के नाम पर रखा जाना चाहिए।”

बता दें कि शरद शर्मा राम जन्मभूमि न्यास कार्यशला की देखभाल करते हैं, जहाँ राम मंदिर के लिए तराशे गए पत्थर रखे गए हैं। वहीं मुस्लिम याचिकाकर्ताओं में से एक का कहना है कि मस्जिद का नामकरण महत्वपूर्ण नहीं है। प्राथमिक मुद्दा मस्जिद के लिए भूमि को स्वीकार करने या न करने पर आम सहमति का था।

मुस्लिम पक्ष की ओर से मुख्य याचिकाकर्ता इकबाल अंसारी ने कहा, “मस्जिद कोई बाबर की मोहताज नहीं, बाबर एक बादशाह था।” उन्होंने आगे कहा कि अभी जमीन का अधिग्रहण किया जाना बाकी है और इस पर सुन्नी वक्फ बोर्ड की एक बैठक होगी। उन्होंने कहा कि वो देश को आश्वस्त कर सकते हैं कि वो हिन्दुओं के साथ बिना किसी उपद्रव के, गरिमा के साथ रहेंगे। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वो शांति व्यवस्था को बिगड़ने नहीं देंगे।

मस्जिद को मिलने वाली जमीन को लेकर अंसारी का एक और बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने कहा है, “अगर सरकार हमें जमीन देना चाहती है तो हमें हमारी सुविधा के हिसाब से देना चाहिए। आवंटित जमीन 67 एकड़ जमीन में से ही होनी चाहिए। तभी हम यह जमीन लेंगे। नहीं तो हम जमीन लेने की पेशकश को ठुकरा देंगे। लोग कह रहे हैं कि 14 कोस से बाहर जाकर मस्जिद बनाओ, यह उचित नहीं है।”

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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