लोग कह रहे 14 कोस से बाहर बनाओ मस्जिद, लेकिन हम वहीं बनाएँगे: बाबरी का पक्षकार

"अदालत या सरकार हमारी संवेदनाओं को कुछ हद तक शांत करना चाहती है तो 5 एकड़ जमीन अधिग्रहित इलाके में ही मिलनी चाहिए, क्योंकि 18 वीं शताब्दी के सूबे के संत क़ाज़ी कुद्दत सहित कई दरगाह और कब्रिस्तान इसी क्षेत्र में हैं।”

सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या की विवादित जमीन रामलला को सौंपते हुए सरकार को मुस्लिम पक्ष को मस्जिद बनाने के लिए अलग से 5 एकड़ जमीन देने का आदेश दिया था। इसको लेकर कई तरह की प्रतिक्रियाएँ सामने आईं। AIMIM प्रमुख और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने फैसले पर नाखुशी जाहिर करते हुए इसे खैरात बताया था। वहीं सुन्नी वक्फ बोर्ड ने कहा है कि मस्जिद के लिए जमीन के बारे में वह 17 नवंबर की बैठक में फैसला करेगा। इस बीच यह भी खबर आई की मस्जिद के लिए जमीन अयोध्या से सटे सहनवा गॉंव में दी जा सकती है। यही बाबरी मस्जिद बनाने वाले बाबर का सेनापति मीर बाकी दफ़न है।

अब अयोध्या मामले के याचिकाकर्ताओं में से एक इकबाल अंसारी इकबाल का बयान सामने आया है। इकबाल अंसारी ने कुछ स्थानीय मुस्लिम नेताओं के साथ मिलकर माँग की है कि सुप्रीम कोर्ट ने जो 5 एकड़ जमीन मस्जिद के लिए देने को कहा है वह अयोध्या में अधिग्रहित 67 एकड़ जमीन में से ही सरकार दे।

अंसारी ने कहा, “अगर सरकार जमीन देना चाहती है तो हमें हमारी सुविधा के हिसाब से मिलनी चाहिए। आवंटित जमीन 67 एकड़ जमीन में से ही होनी चाहिए। तभी हम यह जमीन लेंगे। नहीं तो हम जमीन लेने की पेशकश को ठुकरा देंगे। लोग कह रहे हैं कि 14 कोस से बाहर जाकर मस्जिद बनाओ, यह उचित नहीं है।”

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स्थानीय मौलवी मौलाना जलाल अशरफ ने कहा कि मुसलमान मस्जिद बनाने के लिये खुद जमीन खरीद सकते हैं और उसके लिए सरकार पर निर्भर नहीं हैं। उन्होंने कहा, “अदालत या सरकार हमारी संवेदनाओं को कुछ हद तक शांत करना चाहती है तो 5 एकड़ जमीन अधिग्रहित इलाके में ही मिलनी चाहिए, क्योंकि 18 वीं शताब्दी के सूबे के संत क़ाज़ी कुद्दत सहित कई दरगाह और कब्रिस्तान इसी क्षेत्र में हैं।”

मुस्लिम पक्ष की तरफ से एक अन्य याचिकाकर्ता हाजी महबूब ने कहा, “हम इस झुनझुने को स्वीकार नहीं करेंगे। उन्हें निश्चित रूप से यह स्पष्ट करना चाहिए कि वो हमें कहाँ जमीन देना चाहते हैं।” अयोध्या नगर निगम में पार्षद हाजी असद अहमद ने कहा, “अगर अदालत या सरकार मस्जिद के लिए जमीन देना चाहती है तो उन्हें इसे अधिग्रहित 67 एकड़ जमीन में से ही देना चाहिए, अन्यथा हमें दान नहीं चाहिए।”

जमीयत उलेमा हिंद के अयोध्या प्रमुख मौलाना बी. खान ने कहा कि मुस्लिम पक्ष बाबरी मस्जिद के लिए लड़ रहा था न कि किसी दूसरी जमीन के लिए। उन्होंने कहा, “हमें मस्जिद के लिए कहीं और जमीन नहीं चाहिए। इसके बजाए हम यह जमीन भी राम मंदिर के लिए दे दें।”

सामाजिक कार्यकर्ता यूसुफ खान ने कहा कि यह मामला उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद बंद हो गया है और मस्जिद के लिए अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता नहीं थी। उन्होंने कहा, “अयोध्या में हमारी धार्मिक जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त मस्जिदें हैं। शीर्ष अदालत ने राम मंदिर के पक्ष में अपना फैसला दिया है। यह मामला अब बंद हो चुका है।”

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शरजील इमाम
शरजील इमाम वामपंथियों के प्रोपेगंडा पोर्टल 'द वायर' में कॉलम भी लिखता है। प्रोपेगंडा पोर्टल न्यूजलॉन्ड्री के शरजील उस्मानी ने इमाम का समर्थन किया है। जेएनयू छात्र संघ की काउंसलर आफरीन फातिमा ने भी इमाम का समर्थन करते हुए लिखा कि सरकार उससे डर गई है।

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