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‘यहाँ क्यों बैठे हो, सुप्रीम कोर्ट ने कृषि कानूनों पर रोक लगा रखी है न?’: निहंगों ने किसान नेताओं को फटकारा, कहा – कानून की बात मत करो

"इसकी जाँच निष्पक्ष हुई तो बड़ा कांड निकलकर सामने आएगा। सरकार सिखों को आतंकवादी कह रही है, जबकि वह खुद आतंकवादी है।"

​सोनीपत के कुंडली बॉर्डर पर लखबीर सिंह की निर्मम हत्या का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। सिंघु बॉर्डर पर बैठे निहंग जत्थेबंदियों ने हरियाणा पुलिस को धमकी दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शनिवार (16 अक्टूबर 2021) रात को भगवंत सिंह और गोबिंदप्रीत सिंह के सरेंडर के बाद निहंगों ने कहा है कि अब वे अपने किसी और साथी का सरेंडर नहीं करवाएँगे। साथ ही निहंगों ने सोनीपत पुलिस-प्रशासन को धमकी भी दी है कि अब अगर किसी और निहंग को गिरफ्तार करने की बात की गई तो वे अपने उन चारों साथियों को भी छुड़वा लाएँगे, जिन्होंने इस मामले में सरेंडर किया है।

सिंघु बॉर्डर पर भगवंत सिंह और गोबिंदप्रीत सिंह के सरेंडर के बाद निहंग बाबा राजा राम सिंह ने कहा, ”प्रशासन अब हमसे और गिरफ्तारियाँ न माँगे। अगर पुलिस अधिकारियों ने किसी होर नू गिरफ्तार करण दी गल्ल कित्ती तां जेहड़े चार बंदे (आदमी) अंदर हैं, अस्सी ओहनां नूं वी बाहर कड्ढ ल्यावांगे।”

निहंग सरदारों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के कहा, “कुंडली बॉर्डर पर ग्रंथ की बेअदबी हुई है, जिसकी जाँच होनी चाहिए। अगर इसकी जाँच निष्पक्ष हुई तो बड़ा कांड निकलकर सामने आएगा। सरकार सिखों को आतंकवादी कह रही है, जबकि वह खुद आतंकवादी है।” निहंग सरदारों ने सरकार पर जमकर निशाना साधा और कहा कि ग्रंथ की बेअदबी नहीं होने देंगे। साथ ही संयुक्त किसान मोर्चा के आला नेताओं के बयानों पर निहंग सरदारों ने कहा कि अगर वो क़ानून की बात करते हैं तो यहाँ क्यों बैठे हैं, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने 2 साल का स्टे कानूनों पर लगा रखा है।

दरअसल, जिन तीन आरोपितों को लखबीर सिंह की हत्या के मामले में सोनीपत क्राइम ब्रांच ने कोर्ट में पेश किया गया था उनका नाम नारायण सिंह, भगवंत सिंह व गोविंद प्रीत सिंह है। कोर्ट में तीनों ने कबूल कर लिया है कि उन्होंने ही लखबीर की हत्या की थी। कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए तीनों आरोपितों को 6 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।

मालूम हो कि निहंग नारायण सिंह ने हैवानियत की हदें पार करते हुए लखबीर सिंह का हाथ काट दिया था, जिसके बाद वह 45 मिनट तक तड़पता रहा था। पुलिस के मुताबिक, जब निहंग नारायण को पता चला कि लखबीर सिंह जिंदा है तो उसने अपनी तलवार से उसके पैर को तीन वार से काट दिया। इसके बाद अन्य लोगों ने लखबीर के शव को किसान आंदोलन के पास लगे पुलिस बैरिकेड्स पर लटका दिया था। स्थानीय लोगों ने बताया था कि हमले के बाद वह करीब 45 मिनट तक तड़पता रहा था। पुलिस की पूछताछ में नारायण सिंह ने यह भी कहा था कि उसे इस बात का कोई पछतावा नहीं है, क्‍योंकि लखबीर सिंह ने सरबलोह ग्रंथ की बेअदबी की थी।

गौरतलब है कि नारायण सिंह की गिरफ़्तारी से पहले उसे अमृतसर में सिख समुदाय के बीच सम्मानित भी किया गया था। श्री अकाल तख्त साहिब पर आत्मसमर्पण करने जा रहे नारायण सिंह तरना दल निहंग जत्थेबंदी का सदस्य है। सोनीपत जिले को कुंडली थाने की पुलिस को इस बारे में सूचित कर दिया गया है, जो उसे लेने पहुँच रही है। अमृतसर में एक प्रमुख सिख धार्मिक स्थल पर उसे सम्मानित करते हुए नोटों की माला भी पहनाई गई थी।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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