Homeदेश-समाजदलित लखबीर के हत्या आरोपित का सिख डेरे में सम्मान, पहनाई गई नोटों की...

दलित लखबीर के हत्या आरोपित का सिख डेरे में सम्मान, पहनाई गई नोटों की माला, अब गिरफ्तार: मृतक के शरीर पर जख्म के 37 निशान

अमृतसर में एक प्रमुख सिख धार्मिक स्थल (निहंगों के डेरे) पर उसे सम्मानित करते हुए नोटों की माला भी पहनाई गई थी। इसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

दिल्ली के सिंघु बॉर्डर पर चल रहे ‘किसान आंदोलन’ में दलित युवक लखबीर सिंह की हत्या के मामले में दूसरे आरोपित नारायण सिंह को पंजाब के अमृतसर से गिरफ्तार किया गया। लखबीर सिंह का गला रेत कर टाँग दिया गया था और उनका दाहिना हाथ काट कर भी लटका दिया गया था। बाबा नारायण सिंह जंडियाला गुरु से दबोचा गया। उसने लखबीर सिंह की हत्या में भागीदारी कबूल की है।

लेकिन, गिरफ़्तारी से पहले अमृतसर में उसे सिख समुदाय के बीच सम्मानित भी किया गया। श्री अकाल तख्त साहिब पर आत्मसमर्पण करने जा रहे बाबा नारायण सिंह तरना दल निहंग जत्थेबंदी का सदस्य है। सोनीपत जिले को कुंडली थाने की पुलिस को इस बारे में सूचित कर दिया गया है, जो उसे लेने पहुँच रही है। अमृतसर में एक प्रमुख सिख धार्मिक स्थल पर उसे सम्मानित करते हुए नोटों की माला भी पहनाई गई थी।

उधर लखबीर सिंह का पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट भी सामने आया है, जिसमें उनके शरीर पर विभिन्न हथियारों से जख्म के 37 निशान मिले हैं। लाठी-डंडों के अलावा कई धारदार हथियारों से उन पर बहुतों बार प्रहार किया गया था। ज़्यादा खून बहने की वजह से उन्होंने दम तोड़ा था। लखबीर सिंह का अंतिम संस्कार उनके गाँव में शांतिपूर्ण ढंग से कराने के लिए पुलिस को लगाया गया है। ‘संयुक्त किसान मोर्चा’ इस घटना से पल्ला झाड़ रही है।

आरोपित नारायण सिंह को निहंगों के डेरे पर सम्मानित किया गया था। पीड़ित परिवार ने इस मामले में उच्च-स्तरीय जाँच की माँग की है। खेतिहर मजदूर परिवार का कहना है कि ईश्वर से डरने वाले लखबीर सिंह धार्मिक ग्रन्थ की बेअदबी के बारे में सोच भी नहीं सकते। चीमा कलाँ गाँव में उनकी पत्नी 12, 11 और 8 वर्षीय बेटियों के साथ रहती हैं। खेतों और मंडी में काम कर के वो दो वक़्त की रोटी का जुगाड़ करते थे।

उधर इंडिया टुडे ने इसे ‘सूत्रों’ का नाम देते हुए अपने ताजा रिपोर्ट में दावा किया है कि संयुक्त किसान मोर्चा ने कथित तौर पर कई मौकों पर हरियाणा और दिल्ली पुलिस को विरोध स्थल पर इस ‘सशस्त्र समूह’ की मौजूदगी के बारे में शिकायत की थी। संतुलन बनाने की कोशिश करते हुए एसकेएम ने एक बयान में यह भी कहा कि मोर्चा किसी भी धार्मिक पाठ या प्रतीक की बेअदबी के खिलाफ है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

आर्टिकल 370 हटने के समय संभाली J&K में कमान, आतंकी नेटवर्क की तोड़ी कमर: जानिए कौन हैं वो ‘डॉक्टर’ महेश दीक्षित, जिन्हें मोदी सरकार...

महेश दीक्षित पहले पेशे से डॉक्टर थे, देशसेवा के लिए वो पुलिस सर्विस में आए और अब उन्हें उनका अनुभव व योगदान देखते हुए आईबी का प्रमुख चुना गया है।

पुणे के महात्मा फुले वाडा में वट पूर्णिमा पूजा को पुरातत्व विभाग की हरी झंडी, हिंदू संगठनों के भारी विरोध के बाद महाराष्ट्र सरकार...

महात्मा फुले वाडा में वट पूर्णिमा पूजा पर रोक का आदेश वापस, हिन्दू संगठनों के विरोध के बाद परंपरा जारी रखने की अनुमति मिली।
- विज्ञापन -