Tuesday, May 21, 2024
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सिग्नल और ट्रैफिक ऑपरेशन की गलती से बालासोर ट्रेन हादसा, रेलवे की जाँच में सामने नहीं आई ‘साजिश’: CBI जाँच को देखते हुए सार्वजनिक नहीं की जाएगी रिपोर्ट

"बालासोर में हुए ट्रेन हादसे की CRS रिपोर्ट रेलवे द्वारा सार्वजनिक नहीं की जाएगी। चूँकि इस मामले की जाँच सीबीआई भी कर रही है। ऐसे में सीआरएस रिपोर्ट से सीबीआई जाँच प्रभावित हो सकती है।"

ओडिशा के बालासोर में हुए भीषण ट्रेन हादसे की CRS जाँच पूरी हो गई। इस जाँच में हादसे के पीछे किसी भी साजिश से इनकार किया गया। साथ ही सिग्नल और ट्रैफिक ऑपरेशन विभाग में तैनात कर्मचारियों की गलती को हादसे की वजह बताया गया। सीबीआई भी इस मामले की जाँच कर रही है। इसलिए रेलवे सीआरएस रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं करेगा।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है, “बालासोर में हुए ट्रेन हादसे की CRS रिपोर्ट रेलवे द्वारा सार्वजनिक नहीं की जाएगी। चूँकि इस मामले की जाँच सीबीआई भी कर रही है। ऐसे में सीआरएस रिपोर्ट से सीबीआई जाँच प्रभावित हो सकती है। दोनों रिपोर्ट के आधार पर एक रिपोर्ट तैयार की जाएगी। सूत्रों का कहना है कि सीआरएस रिपोर्ट में सामने आया है कि सिग्नलिंग और यातायात विभाग के कर्मचारियों की मानवीय भूल के कारण यह हादसा हुआ।”

सीआरएस ने बुधवार (28 जून, 2023) को अपनी रिपोर्ट रेलवे बोर्ड को सौंपी थी। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि सिग्नल मेंटनेंस करने वाले अधिकारी ने नियम के तहत काम किया। उसने मेंटनेंस करने से पहले और उसके बाद क्रमशः डिस्कनेक्शन और रीकनेक्शन मेमो स्टेशन मास्टर को सौंपा था। इसका मतलब है कि इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिग्नलिंग सिस्टम पूरी तरह सही था। लेकिन रेलवे ट्रैक से ट्रेन को निकलने की अनुमति देने से पहले सिग्नलिंग सिस्टम की जाँच के लिए सेफ्टी प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया था।

यही नहीं, मेंटेनेंस अधिकारी द्वारा रीकनेक्शन मेमो जारी किए जाने के बाद बाद भी सिग्नलिंग स्टाफ काम कर रहा था। ऐसे में दुर्घटना के लिए स्टेशन के सिग्नलिंग विभाग के साथ ही ट्रैफिक ऑपरेशन विभाग भी जिम्मेदार है। रिले रूम में जाने के लिए बने प्रोटोकॉल में भी खामियाँ पाई गईं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि रिले रूम इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिग्नलिंग सिस्टम का सेंटर होता है। सारी चीजें यहीं से ऑपरेट होती हैं। इसकी जवाबदेही सिग्नलिंग विभाग और स्टेशन मास्टर दोनों की होती है।

रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि कोरोमंडल एक्सप्रेस को मेन लाइन से जाने के लिए ग्रीन सिग्नल दिया गया था। लेकिन ट्रेन की दिशा बताने वाला ट्रैकिंग सिस्टम ट्रेन को लूप लाइन में जाने का सिग्नल दे रहा था। इसी वजह से यह हादसा हो गया। 

बता दें कि 2 जून, 2023 की शाम करीब 6:55 मिनट पर ओडिशा के बालासोर जिले के महानगा गाँव के पास कोरोमंडल एक्सप्रेस पटरियों से उतर गई थी। इसके बाद वह ट्रेन लूप लाइन पर खड़ी मालगाड़ी से टकरा गई। मालगाड़ी से टक्कर होने के बाद कोरोमंडल एक्सप्रेस के कुछ डिब्बे बगल वाली पटरी पर चले गए। इस पटरी पर दूसरी दिशा से यशवंतपुर-हावड़ा सुपरफास्ट ट्रेन आ गई और कोरोमंडल एक्सप्रेस के डिब्बों में जाकर टकरा गई। 

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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