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मुस्लिम महिलाओं के हित में तीन तलाक कानून, अब जारी नहीं करेंगे फतवा: दरगाह-ए-आला हज़रत

"संसद द्वारा ट्रिपल तलाक पर रोक सम्बन्धी बिल पारित होने के बाद हमने यह तय किया है कि इस तरह के मामलों में कोई फतवा जारी नहीं करेंगे। अगर कोई पुलिस या अदालत का दरवाजा खटखटाता है तो हम कानून की जटिल प्रक्रियाओं में फँस सकते हैं।”

बरेली का दरगाह-ए-आला हजरत अब तीन तलाक पर फतवा जारी नहीं करेगा। फौरी तीन तलाक को अपराध बनाने वाले कानून के अमल में आने के मद्देनजर यह फैसला किया गया है।

दरगाह-ए-आला हज़रत के प्रवक्ता मौलाना शहाबुद्दीन ने कहा, “संसद द्वारा ट्रिपल तलाक पर रोक सम्बन्धी बिल पारित होने के बाद हमने यह तय किया है कि इस तरह के मामलों में कोई फतवा जारी नहीं करेंगे। हमारे द्वारा लिखित में कुछ भी नहीं दिया जाएगा। अगर कोई कानून का सहारा लेते हुए पुलिस या अदालत का दरवाजा खटखटाता है तो हम कानून की जटिल प्रक्रियाओं में फँस सकते हैं।”

हालॉंकि यदि कोई सलाह मॉंगता है तो उसे कुरान और हदीस के मुताबिक राय दी जाएगी। उन्होंने नए कानून की प्रशंसा करते हुए इसे मुस्लिम महिलाओं के हित में भी बताया है। उन्होंने कहा कि निश्चित रूप से यह कानून तीन तलाक के मामलों को रोकने में मददगार साबित होगा।

गौरतलब है कि संसद से पास होने के बाद तीन तलाक को अपराध करार देने वाले ऐतिहासिक विधेयक को बुधवार (जुलाई 31, 2019) देर रात राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अपनी मंजूरी दी थी। राष्‍ट्रपति के हस्‍ताक्षर के साथ ही मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक कानून अमल में आ चुका है। इस कानून को 19 सितंबर 2018 से लागू माना जाएगा। इस कानून के तहत 3 साल की सज़ा और जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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