Homeदेश-समाजकानपुर में अवैध अतिक्रमण हटाने गई प्रशासन की टीम पर हमला, बुलडोजर पर पत्थरबाजी:...

कानपुर में अवैध अतिक्रमण हटाने गई प्रशासन की टीम पर हमला, बुलडोजर पर पत्थरबाजी: एक युवक को पकड़ कर पीटा

इस बीच केडीए की अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई के दौरान स्थानीय लोगों ने एक व्यक्ति को पकड़कर पीट दिया। दरअसल, लोगों को लगा कि वो युवक प्रशासनिक कार्रवाई का समर्थन कर रहा है।

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के कानपुर में शनिवार (7 मई, 2022) को अतिक्रमण हटाने गई ‘कानपुर विकास प्राधिकरण (KDA)’ के बुलडोजर के खिलाफ लोगों ने जमकर पथराव किया। इस मौके पर पुलिस के साथ लोगों की भिड़ंत हो गई। लोगों का आरोप था कि मनमाने तरीके से KDA प्रशासन दुकानों को ढहा रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, घटना लाल बंगला इलाके की है, जहाँ शनिवार की सुबह प्रशासन की टीम पूरे लाव-लश्कर के साथ पहुँची। अतिक्रमण रोधी कार्रवाई से पहले अधिकारियों ने लोगों से अतिक्रमण को हटाने के लिए कहा। इसके बाद प्रशासन के केडीए के बुलडोजर ने एक-एक कर अतिक्रम का पर्याय बने घरों को जमींदोज करना शुरु कर दिया। इस मौके पर लोगों में भगदड़ मच गई। प्रशासन की कार्रवाई से नाराज स्थानीयों ने बुलडोजर पर पत्थरबाजी भी की।

स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि वे लोग वहाँ बीते 50 सालों से रह रहे हैं। और उनके पास इसकी रजिस्ट्री भी है। बावजूद इसके केडीए प्रशासन ने बिना किसी सूचना के एकतरफा कार्रवाई करते हुए उनकी दुकानों को ढहा दिया। यहाँ तक कि अधिकारियों ने लोगों को ये नहीं बताया कि अतिक्रमण कहाँ किया गया है। हालाँकि, बाद में प्रशासन को बुलडोजर लेकर वापस लौटना पड़ा।

लोगों ने बेवजह एक युवक को पीटा

इस बीच केडीए की अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई के दौरान स्थानीय लोगों ने एक व्यक्ति को पकड़कर पीट दिया। दरअसल, लोगों को लगा कि वो युवक प्रशासनिक कार्रवाई का समर्थन कर रहा है। जबकि, उसका कहना था कि वो अपने पैसे लेने के लिए आया था। हालाँकि, बवाल के बीच पहुँची पुलिस फोर्स ने किसी तरह लोगों को शांत कराया।

पहले भी प्रशासन को बनाया गया निशाना

ये कोई पहली बार नहीं है कि अवैध अतिक्रमण हटाने के लिए गई प्रशासन की टीमों पर हमले किए गए हों। हाल ही में जीटी रोड पर कल्याणपुर में झुग्गी झोपड़ी हटाने के लिए गई केडीए की टीम पर लोगों ने हमले किए थे।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

UP में तेजी से बढ़ रही है ‘गो-इकोनॉमी’, दूध के साथ-साथ गोमूत्र भी बन रहा है रोजगार का साधन: शैम्पू, साबुन और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर...

सवाल उनसे है जो गाय, गोबर और गौमूत्र का नाम सुनते ही मजाक बनाने लगते हैं- जब यही व्यवस्था किसान का खर्च घटाकर उसकी आय बढ़ा रही है और तो उपहास किस बात का है?

मुस्लिमों को रिझाने में 2017 में औंधे मुँह गिरे थे अखिलेश, आरक्षण का वादा किया लेकिन घोषणापत्र खाली रहा: 2027 के चुनावी रण में...

मुस्लिम आरक्षण पर अखिलेश बयानों से लेकर मुलायम सिंह यादव की मुस्लिम राजनीति अपने पुराने ढर्रे पर रही है। हालाँकि अब यूपी में वोटर्स अपनी प्रथमिकताएँ बदल रहे हैं।
- विज्ञापन -