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PETA के अधिकारी दबा के खाते हैं चिकन-मटन: खुद को पूर्व कर्मचारी बताने वाले का दावा

"PETA के टॉप लेवल के अधिकतर अधिकारी अमीर हैं, जो इलीट वर्ग से आते हैं। वो पाँच सितारा होटलों में मीटिंग करते हैं। वहाँ मुर्गे, मांस और अन्य जानवरों के मीट ऑर्डर किए जाते हैं।"

शेफाली वैद्य ने PETA को लेकर उसके एक पूर्व एसोसिएट (कर्मचारी) के हवाले से बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने एक स्क्रीनशॉट शेयर किया है, जिसके बारे में उन्होंने बताया कि ये PETA के एक पूर्व कर्मचारी का भेजा हुआ मैसेज है, जिसमें उसने अंदर की कुछ बातें बताई हैं। उक्त कर्मचारी ने 7 सालों तक PETA के लिए काम किया था, जिसके बाद उसने अपना अनुभव शेयर किया। इसमें काफी चौंकाने वाली बातें हैं।

PETA के पूर्व कर्मचारी ने बताया कि भले ही संस्था में कुछ ऐसे एक्टिविस्ट भी हैं, जो सही में पशु अधिकारों के लिए कार्यरत हैं लेकिन इसके टॉप लेवल के अधिकतर अधिकारी अमीर हैं, जो इलीट वर्ग से आते हैं। उक्त पूर्व कर्मचारी ने PETA को एक एलिटिस्ट संगठन करार दिया। उसने खुलासा किया कि PETA उन्हीं मुद्दों को छूती है, जिनसे उसे पब्लिसिटी मिलने की सम्भावना हो। वो पब्लिसिटी स्टंट करते हैं।

वो ‘भारत में मुर्गों को ट्रांसपोर्ट के दौरान उनके साथ होने वाली क्रूरता को कैसे रोकें’ जैसे मुद्दों पर रणनीति बनाने के लिए बहस करते हैं। PETA के पूर्व कर्मचारी ने ये भी बताया कि JW Marriot जैसे बड़े पाँच सितारा होटलों में उनकी बैठकें होती हैं। बैठकों में मुर्गे, माँस और अन्य जानवरों के मीट ऑर्डर किए जाते हैं। बता दें कि जीवहत्या का विरोध करने वाले PETA के कर्मचारियों का 5 स्टार होटल में बैठ कर माँस खाना उनके दोहरे रवैये को उजागर करता है।

बता दें कि PETA की वेबसाइट पर जानवरों की हत्या को लेकर ख़ास मजहब वालों को कई सलाह दी गई है। बताया गया है कि चाकू की धार को एकदम तेज़ कर के रखें। उसे बार-बार धार दें। उसकी लम्बाई ठीक रखें। इसकी लम्बाई 45 सेंटीमीटर होनी चाहिए। सलाह दी गई है कि काफी अच्छे तरीके से जानवर की हत्या करें, तीन से ज्यादा बार वार न करें और जानवर को हाथ-पाँव मारने दें, ताकि खून जल्दी-जल्दी निकल जाए।

PETA ने खास मजहब के लिए जानवरों को काटने का सबसे बेहतरीन तौर-तरीका बताया है। साथ ही सलाह दी है कि क़ुरबानी से पहले जानवरों को खरीदें और उनका पालन-पोषण करें, फिर देखें कि आप उन्हें काट सकते हैं या नहीं। PETA ने ख़ास मजहब को कहा है कि अगर आप उन जानवरों को नहीं काट सकते तो किसी को नहीं काटें। लेकिन, फिर भी काटने को लेकर तौर-तरीके बताए गए हैं।

शेफाली वैद्य ने PETA की वेबसाइट के स्क्रीनशॉट्स शेयर कर के उसके दोहरे रवैये का खुलासा किया। उन्होंने ऑपइंडिया को बताया था कि PETA ने पिछले 48 घंटों मे सारा का सारा ध्यान उन्हें ट्रोल करने में लगाया है और इसके सिवा कुछ नहीं किया है। उन्होंने कहा कि एक अंतरराष्ट्रीय संस्था एक महिला को निशाना बनाने में अपनी सारी ऊर्जा खर्च कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि PETA एक ट्रोल के सिवा कुछ नहीं है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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