Homeदेश-समाजतलाक-उल-सुन्नत को खत्म कराने हाई कोर्ट पहुँची मुस्लिम महिला, बताया- बर्बर रिवाज: केंद्र से...

तलाक-उल-सुन्नत को खत्म कराने हाई कोर्ट पहुँची मुस्लिम महिला, बताया- बर्बर रिवाज: केंद्र से अदालत ने माँगा जवाब

हाईकोर्ट ने याचिका दाखिल करने वाली मुस्लिम महिला ने तलाक उल सुन्नत को मनमानी, असंवैधानिक और बर्बर रिवाज बताया है। महिला के पति ने अगस्त 2021 में उसे तीन तलाक बोल कर छोड़ दिया था।

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक मुस्लिम व्यक्ति द्वारा अपनी पत्नी को किसी भी समय बेवजह तलाक (तलाक-उल-सुन्नत) मामले में केंद्र सरकार को नोटिस देकर जवाब माँगा है। नोटिस का जवाब देने के लिए केंद्र को 8 सप्ताह का समय दिया गया है। यह नोटिस न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की पीठ ने जारी किया है।

यह याचिका एक 28 वर्षीया मुस्लिम महिला ने दाखिल की है जो 9 माह के एक बच्चे की माँ है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक याचिका दाखिल करने वाली मुस्लिम महिला ने तलाक उल सुन्नत को मनमानी, असंवैधानिक और बर्बर रिवाज बताया है। महिला के पति ने अगस्त 2021 में उसे तीन तलाक बोल कर छोड़ दिया था।

याचिका दाखिल करने वाली महिला की तरफ से एडवोकेट बजरंग वत्स ने बहस की है। उन्होंने न्यायालय से माँग की है कि तलाक-उल-सुन्नत द्वारा तलाक के संबंध में चेक और बैलेंस के रूप में विस्तृत दिशा-निर्देश या कानून जारी किए जाएँ। साथ ही इस बात की भी माँग की गई है कि मुस्लिम विवाह को केवल एक कॉन्ट्रैक्ट न मान कर एक स्थिति घोषित किया जाए।

केंद्र सरकार की तरफ से इस मामले में एडवोकेट मोनिका अरोड़ा ने अपना पक्ष रखा। उन्होंने बुधवार (12 जनवरी) को अदालत में बताया कि केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए एक्ट 2019 में तीन तलाक को कवर किया गया है। उसमें तलाक के अन्य रूपों को शामिल नहीं किया गया था।

सितम्बर 2021 में जस्टिस रेखा पल्ली की बेंच ने याचिका को PIL के तौर पर सुनवाई के लिए स्वीकार किया था। यह याचिका पिछले साल सितम्बर में ख़ारिज की जा चुकी थी। याचिका को ख़ारिज करने की वजह इस मामले में संसद का पहले से हस्तक्षेप बताया गया था। बाद में इस पर पुनर्विचार की माँग की गई थी। इस मामले में अगली सुनवाई 2 मई को तय की गई है।

क्या है तलाक-उल-सुन्नत

‘तलाक-उल-सुन्नत’ किसी मुस्लिम व्यक्ति द्वारा अपनी पत्नी को किसी भी समय बेवजह तलाक देने के एकाधिकार को कहते हैं। यह एक बार में लागू नहीं होती। इसे रिकवरेबल तलाक भी कहा जाता है। तलाक के इस रूप में पति-पत्नी के बीच समझौते की संभावना भविष्य में बनी रहती है। इसलिए यह ट्रिपल तलाक से अलग मानी जाती है। इसे शिया और सुन्नी दोनों अमल में लाते हैं।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘मेविस्तान’ बनाने का सपना, अलवर-भरतपुर में हिंसा और फिर गाँधी-नेहरू का हस्तक्षेप: जानिए मेवात के उस इतिहास की पूरी कहानी, जिसने बदल दिया इलाके...

मेविस्तान की माँग, 1933 का गोविंदगढ़ संघर्ष, 1947 का अलवर-भरतपुर घटनाक्रम और गाँधी-नेहरू के हस्तक्षेप से जुड़ी मेवात की पूरी कहानी जानिए।

59 करोड़ अकाउंट्स, लाखों करोड़ की कैपिटल और आखिरी व्यक्ति तक पहुँचता बैंकिंग सिस्टम… फिर क्यों जनधन योजना से सुभाष गर्ग को लगी मिर्ची?

सुभाष गर्ग ने जनधन योजना के 59 करोड़ खातों पर सवाल उठाए, जानिए जीरो बैलेंस, इनएक्टिव अकाउंट्स और DBT से जुड़ी पूरी कहानी।
- विज्ञापन -