'तलाक-ए-हसन' की वैधता पर सुप्रीम कोर्ट ने जाँच के लिए आयोग को निर्देश दिए हैं। इस्लाम में इसे तलाक का सबसे बेहतर तरीका माना गया है, जिसे पैगंबर मुहम्मद ने भी कबूल किया है।
फैमिली कोर्ट के जज जस्टिस पुरी ने पाँच मुद्दों पर फैसला सुनाया। इसमें पत्नी की ओर से पति पर की गई क्रूरता की बात भी शामिल की गई। सुनवाई के बाद कोर्ट ने तलाक की मंजूरी दे दी।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने कहा है कि हिंदू मैरिज एक्ट जैन, बौद्ध और सिखों पर भी लागू होता है। इनसे जुड़े विवाह और तलाक के मामले में भी इसी कानून के दायरे में आते हैं।