Homeदेश-समाजBar Council के नियमों का उल्लंघन करते पकड़े गए प्रशांत भूषण, NGOs से दिया...

Bar Council के नियमों का उल्लंघन करते पकड़े गए प्रशांत भूषण, NGOs से दिया इस्तीफा

प्रोफेशनल स्टैंडर्ड्स को परिभाषित करने वाले बार कॉउन्सिल के कुछ नियम हैं, जिनका सभी सदस्य वकीलों को पालन करना पड़ता है। प्रशांत भूषण इन नियमों का पालन नहीं कर रहे थे।

सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण एक बार फिर विवादों की वजह से चर्चा में हैं। उन्होंने तीन ग़ैर सरकारी संगठनों (NGOs) से इस्तीफा दे दिया है। भूषण ने सेंटर फॉर पीआईएल (CPIL), कॉमन कॉज और स्वराज अभियान नामक संगठनों से इस्तीफा दे दिया। प्रशांत भूषण ने ये क़दम तब उठाया है जब वो बार कॉउन्सिल के नियमों को ताक पर रखते हुए पकड़े गए हैं। बता दें कि प्रोफेशनल स्टैंडर्ड्स को परिभाषित करते हुए बार कॉउन्सिल के कुछ नियम हैं, जिनका सभी सदस्य वकीलों को पालन करना पड़ता है। इसके क्लॉज 9 में लिखा है कि वकील अदालत में ऐसे किसी भी प्रतिष्ठान का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकते, जिसमें उन्होंने कोई पद ग्रहण कर रखा है।

प्रशांत भूषण कई बार इन संगठनों के लिए अदालत में जिरह कर चुके हैं, जिनके गवर्निंग बॉडी में वो शामिल हैं। मेजर सुरेंद्र पुनिया (रिटायर्ड) ने भूषण के ख़िलाफ़ शिकायत दायर की थी जिसके बाद उन्होंने ये क़दम उठाया। प्रशांत भूषण ने ट्वीट कर कहा कि भले ही उन्होंने इन संगठनों की गवर्निंग बॉडी से इस्तीफा दे दिया है, लेकिन वो इसके लिए लड़ना जारी रखेंगे।

प्रशांत भूषण ने कहा कि बार कॉउन्सिल ऑफ दिल्ली उनके पीछे पड़ा हुआ था क्योंकि वो इन संगठनों के लिए अदालत में केस लड़ रहे थे। बार कॉउन्सिल ने नोटिस देकर भूषण से जवाब माँगा था जिसके बाद उन्होंने इस संगठनों के लिए केस लड़ने की बात स्वीकार की थी। अब उन्होंने बार कॉउन्सिल को अपने इस्तीफे से अवगत करा दिया है।

इससे पहले भी प्रशांत भूषण ऐसी हरकतें कर चुके हैं। अदालत के फैसले को लेकर ट्विटर पर टिप्पणी करने के कारण उनसे जवाब माँगा गया था। उनके ख़िलाफ़ 87 वर्षीय अटॉर्नी जनरल वेणुगोपाल राव ने अवमानना केस भी किया था। 16 जनवरी को लोकपाल मामले में बहस के दौरान भारत के प्रधान न्यायाधीश ने प्रशांत भूषण को जमकर फटकार लगाई थी। प्रधान न्यायाधीश ने प्रशांत भूषण नसीहत देते हुए चीजों को सकारात्मक तरीके से देखने की बात कही थी। लोकपाल मामले पर बहस के दौरान कोर्ट में जब प्रशांत भूषण ने सर्च कमिटी के उपर सवाल खड़ा किया तो चीफ़ जस्टिस ने तल्ख अंदाज में प्रशांत भूषण को ये जवाब दिया था- “ऐसा लगता है आप जजों से भी ज्यादा जानते हैं।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

विवादों में ‘कॉकरोचों’ का 6 जून का प्रदर्शन, दिपके ने माना- ‘नहीं ली प्रोटेस्ट की परमिशन’: समझें- SC का फैसला, 7 दिन वाला नियम...

CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन के बहाने समझिए जंतर-मंतर पर धरना देने की पूरी प्रक्रिया, दिल्ली पुलिस के नियम और सुप्रीम कोर्ट का रुख।

‘पहले मंदिर में नमाज पढ़ेंगे, फिर कहेंगे मस्जिद थी’: बुलंदशहर से भोजशाला तक, हिंदू पवित्र स्थलों पर दावों का कट्टरपंथियों का पैटर्न और लिबरल...

हिंदुओं के पवित्र स्थानों पर नमाज अदा करना भूल नहीं, सोची-समझी साजिश है। यदि कट्टरपंथियों का मन इतना ही साफ होता तो मंदिरों पर कब्जा नहीं करते।
- विज्ञापन -