J&K में पाबंदी राष्ट्रहित में: कश्मीर टाइम्स की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट पहुॅंचा PCI

"संविधान के सबसे विवादास्पद प्रावधान को हटाने, जिसमें राष्ट्र की अखंडता और संप्रभुता के हित में संचार और अन्य सुविधाओं पर प्रतिबंध लगा दिया है, वो भसीन के अधिकारों का हनन नहीं करता है।"

जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने के बाद से जारी संचार पाबंदियों का प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) ने समर्थन किया। पीसीआई ने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में हस्तक्षेप याचिका दायर की है। राज्य में संचार व्यवस्थाओं पर रोक को ‘राष्ट्र की अखंडता और संप्रभुता’ के हित में बताते हुए कश्मीर टाइम्स की कार्यकारी संपादक अनुराधा भसीन की याचिका में हस्तक्षेप की मॉंग की गई है।

भसीन ने पाबंदियों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर रखी है। उनका कहना है कि सूचनाओं के आदान-प्रदान पर व्यापक रोक बोलने और और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करता है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में मोबाइल, इंटरनेट और लैंडलाइन सेवाओं सहित संचार के सभी तरीकों को तुरंत बहाल करने के लिए केंद्र सरकार को दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है।

लाइव लॉ के अनुसार 16 अगस्त को CJI की अगुवाई वाली पीठ ने भसीन की याचिका पर सुनवाई को दो हफ्ते के लिए टाल दिया था और कहा था कि सरकार को सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए और समय दिया जाना चाहिए।

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उनकी याचिका में हस्तक्षेप की माँग करने वाला PCI प्रेस काउंसिल अधिनियम 1978 के तहत ‘प्रेस की स्वतंत्रता को बनाए रखने और भारत में समाचार पत्रों और समाचार एजेंसियों के मानकों को बनाए रखने और सुधारने’ के उद्देश्य से बनाया गया वैधानिक निकाय है। याचिका में PCI ने कहा है कि उसका काम न केवल प्रेस की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना है बल्कि वो ‘नागरिकता के अधिकारों और जिम्मेदारियों दोनों की भावना को बढ़ावा’ और किसी भी विकास की समीक्षा करने व संभावनाओं के लिए जनहित और महत्व के समाचारों के प्रसार को प्रतिबंधित करने के लिए बाध्य है।

याचिका में कहा गया है, “संविधान के सबसे विवादास्पद प्रावधान को हटाने, जिसमें राष्ट्र की अखंडता और संप्रभुता के हित में संचार और अन्य सुविधाओं पर प्रतिबंध लगा दिया है, वो भसीन के अधिकारों का हनन नहीं करता है।”

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