Friday, July 30, 2021
Homeदेश-समाज9 दिन से पुजारी के शव को अंतिम संस्कार का इंतजार: राजस्थान सरकार को...

9 दिन से पुजारी के शव को अंतिम संस्कार का इंतजार: राजस्थान सरकार को जगाने के लिए भरी दोपहर में लालटेन यात्रा

पुजारी शंभू शर्मा की 2 बीघा जमीन की फरवरी माह में कुछ भूमाफियाओं ने रजिस्ट्री करा ली थी। पुजारी ने माफियाओं पर षडयंत्रपूर्वक रजिस्ट्री कराने का आरोप लगाते हुए महुआ थाने में केस दर्ज कराया था।

राजस्थान के टीकरी के पुजारी शंभू शर्मा की मौत 2 अप्रैल को हुई थी। लेकिन उनका अंतिम संस्कार नहीं हो पाया है। हालाँकि लगातार विरोध-प्रदर्शनों, बीजेपी की लालटेन यात्रा और सोशल मीडिया में इस घटना को लेकर आक्रोश व्यक्त किए जाने के बाद राजस्थान सरकार की नींद टूटती दिख रही है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इस मामले में सरकार और प्रतिनिधिमंडल के बीच सहमति बन गई है। तकरीबन दो घंटे तक चली बैठक के बाद आंदोलन समाप्ति की घोषणा की गई। सरकार के प्रतिनिधि के रूप में डॉ. महेश जोशी ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मंदिर माफी की जमीन के संरक्षण के लिए कमेटी अन्य राज्यों का अध्ययन करेगी। इसके अलावा जब तक जाँच चलेगी, निर्माण की गई दुकानें सील रहेंगी। संभागीय आयुक्त 30 अप्रैल तक जाँच करेंगे।

बता दें कि बैठक में सरकार के प्रतिनिधि के रूप में डॉ. महेश जोशी, मुख्य सचिव निरंजन आर्य, DGP ML लाठर, गृह सचिव अभय कुमार, पुलिस कमिश्नर आनंद श्रीवास्तव शामिल हुए। वहीं आंदोलनकारी पक्ष से सांसद डॉ. किरोड़ी लाल मीणा, किरोड़ी रामचरण बोहरा, बीजेपी नेता अरुण चतुर्वेदी, विधायक अशोक लहोटी, भाजपा शहर अध्यक्ष राघव शर्मा, बीजेपी नेता मुकेश दाधीच, सुमन शर्मा और विप्र फाउंडेशन अध्यक्ष राजेश कर्नल उपस्थित रहे।

इस मामले में शनिवार को भी सहमति की कोई उम्मीद नहीं देख पुजारी की डेड बॉडी को डीप फ्रीजर में शिफ्ट कर दिया गया था। दोपहर में सरकार के साथ बातचीत की उम्मीद जगी जब पुलिस के अधिकारी सरकार का संदेश लेकर आए। संभावना थी कि सचिवालय में अफसरों के साथ बातचीत में मामले का हल निकल जाएगा, मगर दिन ढलते -ढलते बातचीत की तमाम संभावनाएँ धूमिल हो गई थी।

साभार: राजस्थान पत्रिका

रामचरण बोहरा और अरूण चतुर्वेदी सरकार के संदेश का इंतजार ही करते रह गए। इस बीच किरोड़ी ने सरकार को आइना दिखाने की कोशिश की। उन्होंने लालटेन यात्रा निकाली। भरी दोपहरी में किरोड़ी हाथ में लालटेन लेकर सिविल लाइंस फाटक से सी स्कीम की तरफ बढने लगे पर पुलिस ने बैरिकेडिंग कर किरोड़ी और उनके समर्थकों को रोक दिया। इस दौरान पुलिस के साथ तीखी नोक झोंक भी हुई।

इससे पहले किरोड़ी ने सरकार पर हठधर्मिता का आरोप लगाया था। अरुण चतुर्वेदी ने कहा था कि वे सिर्फ पुजारियों के लिए ठोस कानून चाहते हैं, ताकि मंदिर माफी की जमीनों के मामले में अपराध न हों। सैंकड़ों पुजारियों की हत्या हो चुकी है। शंभू पुजारी की मौत के जिम्मेदार लोगों पर ठोस कार्यवाही होनी चाहिए।

मामले में बीजेपी नेता कपिल मिश्रा ने भी ट्वीट कर शंभू पुजारी के लिए न्याय की माँग की। उन्होंने कहा, “राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, मैं आपसे कहना चाहता हूँ कि शंभू पुजारी के साथ जो महापाप हुआ है, जो अन्याय हुआ है, उसमें आपकी सरकार पूरी तरह भागीदार नजर आ रही है। आपका ये मौन, ये चुप्पी आपराधिक है। शंभू पुजारी का शव अंतिम संस्कार की प्रतीक्षा में वहाँ आज भी रखा हुआ है। मैं आपसे ये निवेदन करता हूँ कि आज शाम तक सांसद किरोड़ी लाल और अन्य सभी लोगों की जो भी माँगें हैं, उनको पूरा किया जाए। शंभू पुजारी का अंतिम संस्कार सम्मान के साथ सुनिश्चित किया जाए। प्रदर्शनकारियों की माँगों को तुरंत स्वीकार कीजिए। आज शाम तक ये सुनिश्चित करें अन्यथा कल मुझे जयपुर आना ही होगा।”

भूमाफियाओं पर जबरन रजिस्ट्री करवाने का आरोप

गौरतलब है कि पुजारी शंभू शर्मा की 2 बीघा जमीन की फरवरी माह में कुछ भूमाफियाओं ने रजिस्ट्री करा ली थी। पुजारी ने माफियाओं पर षडयंत्रपूर्वक रजिस्ट्री कराने का आरोप लगाते हुए महुआ थाने में केस दर्ज कराया था। मुकदमा दर्ज कराने के करीब एक माह बाद 2 अप्रैल को पुजारी शंभू शर्मा की मौत हो गई थी।

इसके बाद दौसा सासंद किरोड़ी मीणा ने आरोप लगाते हुए उनके शव के साथ 3 अप्रैल से 8 अप्रैल तक महुआ थाने के बाहर न्याय की माँग को लेकर प्रदर्शन किया। मीणा का कहना है कि भू माफियाओं की ओर से जबरन रजिस्ट्री करवाने के कारण ही जमीन को खोने के सदमे में पुजारी शंभू शर्मा की जान निकल गई।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

स्वतंत्र है भारतीय मीडिया, सूत्रों से बनी खबरें मानहानि नहीं: शिल्पा शेट्टी की याचिका पर बॉम्बे हाईकोर्ट

कोर्ट ने कहा कि उनका निर्देश मीडिया रिपोर्ट्स को ढकोसला नहीं बताता। भारतीय मीडिया स्वतंत्र है और सूत्रों पर बनी खबरें मानहानि नहीं है।

रामायण की नेगेटिव कैरेक्टर से ममता बनर्जी की तुलना कंगना रनौत ने क्यों की? जावेद-शबाना-खान को भी लिया लपेटे में

“...बंगाल मॉडल एक उदाहरण है… इसमें कोई शक नहीं कि देश में खेला होबे।” - जावेद अख्तर और ममता बनर्जी की इसी मीटिंग के बाद कंगना रनौत ने...

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -

 

हमसे जुड़ें

295,307FansLike
112,014FollowersFollow
394,000SubscribersSubscribe