Homeदेश-समाजराजस्थान में दो नाबालिग लड़कियों को अगवाकर, तीन दिनों तक किया गया सामूहिक बलात्कार,...

राजस्थान में दो नाबालिग लड़कियों को अगवाकर, तीन दिनों तक किया गया सामूहिक बलात्कार, केस दर्ज

लड़कियों के साथ हुई दरिंदगी को लेकर पिता ने पुलिस से न्याय की माँग की है। वहीं जब लड़कियों ने पुलिस अधिकारियों को घटना के बारे में बताने की कोशिश की तो आरोपितों ने पुलिस के सामने ही उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी।

राजस्थान के बारां (Baran) जिले में दो नाबालिग लड़कियों से गैंगरेप (Gang rape) का मामला सामने आया है। ज़ी न्यूज की एक रिपोर्ट के अनुसार, आरोपितों ने पहले बारां से दो नाबालिग लड़कियों का अपहरण किया। अपहरण के बाद आरोपित दोनों लड़कियों को कोटा, जयपुर और अजमेर ले गए। कथिततौर पर तीन दिनों तक उनके साथ सामूहिक बलात्कार किया गया।

रिपोर्ट के अनुसार, लड़कियों के पिता ने खुद पुलिस को इस घटना की जानकारी दी और अपने साथ उन्हें लड़कियों के पास ले गया। जिसके बाद पूछताछ के लिए पुलिस लड़कियों और एक नाबालिग आरोपित को थाने ले आई।

लड़कियों के साथ हुई दरिंदगी को लेकर पिता ने पुलिस से न्याय की माँग की है। वहीं जब लड़कियों ने पुलिस अधिकारियों को घटना के बारे में बताने की कोशिश की तो आरोपितों ने पुलिस के सामने ही उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी।

नोट: पुलिस इस मामले की जाँच कर रही है, आगे की रिपोर्ट आने के बाद लेख को अपडेट किया जाएगा।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

खून वही, बस नैरेटिव बदल गया: प्राचीन बलि से ईसाई संस्कार तक, इतिहास ने ये फर्क कैसे बनाया?

पश्चिम ने पुरानी सभ्यताओं को खून और बलि के नाम पर बर्बर कहा। ईसाई परंपरा को आध्यात्मिक ऊँचाई बताया। लेकिन चर्च के केंद्र में भी रोटी और वाइन के जरिए शरीर और रक्त का अनुष्ठान बैठा है। सभ्यता की कहानी इतनी साफ नहीं।

हमें पितृसत्ता की अधूरी कहानी क्यों सुनाई गई? Patriarchy? Think Again

भारत की शुरुआती वैदिक सभ्यता में महिलाओं का समाज में बहुत सम्मानजनक स्थान था, जहाँ उन्हें शिक्षा और धार्मिक अनुष्ठानों का पूरा अधिकार था। वैदिक साहित्य में गार्गी और मैत्रेयी जैसी महिलाओं के उदाहरण मिलते हैं, जो दार्शनिक चर्चाओं और बौद्धिक विमर्श में सक्रिय थीं।
- विज्ञापन -