Monday, July 22, 2024
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राजू पाल की हत्या में 6 को उम्रकैद, 1 को 4 साल जेल: अतीक-अशरफ भी थे नामजद, इसी कांड का गवाह था उमेश पाल

राजू पाल ने साल 2004 में विधानसभा उप-चुनाव में अशरफ को हराया था। इसके बाद दोनों गुटों में ठन गई थी। चुनावी नतीजों के तीन माह के अंदर ही 25 जनवरी को राजू पाल की गाड़ी को जीटी रोड पर ओवरटेक करके रोक लिया गया था। उनकी गाड़ी पर ताबड़तोड़ गोलियाँ बरसाई गई थी। इस हत्याकांड में स्कॉर्पियो सवार 5 हमलावरों ने राजू पाल और उनके सहयोगियों पर अंधाधुँध गोलीबारी की थी।

बहुजन समाज पार्टी के तत्कालीन विधायक राजू पाल हत्याकांड मामले में लखनऊ की सीबीआई अदालत ने 6 दोषियों को उम्रकैद और एक को 4 साल की सजा सुनाई है। लखनऊ की सीबीआई कोर्ट ने आबिद, जावेद, अब्दुल, गुल हसन, इसरार और रंजीत पाल को उम्रकैद और फरहान को 4 साल की सजा सुनाई। इस मामले में माफिया डॉन अतीक अहमद और अशरफ भी नामजद आरोपित थे, जिनकी प्रयागराज में हत्या हो गई थी। इसलिए उनका नाम हटा दिया गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीएसपी एमएलए राजू पाल की प्रयागराज में साल 2005 में दिनदहाड़े गोलियों से भूनकर मौत के घाट उतार दिया गया था। उन्हें धूमनगंज में मौत के घाट उतारा गया था। इस हत्याकांड को राजनीतिक दुश्मनी के चलते अंजाम दिया गया था। विधानसभा चुनाव में अशरफ को हराने के चलते राजू पाल की प्रयागराज में दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। हत्या से सिर्फ 9 दिन पहले राजू पाल और पूजा पाल की शादी हुई थी। पूजा पाल 2007 से 2017 तक विधायक रही, और साल 2022 में वो सपा के टिकट पर फिर से विधायक चुनी गई हैं।

इस तिहरे हत्याकांड की जाँच पहले पुलिस, सीबी सीआईडी और आखिर में सीबीआई ने की। सीबीआई की तरफ से अतीक अहमद उसके भाई समेत 10 लोगों को आरोपी बनाया गया था। अब सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने इसरार अहमद, रंजीत पाल, जावेद, गुलशन और अब्दुल कवि को हत्या करने का दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही 50-50 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया। वहीं फरहान को अवैध असलहा रखने के मामले में 4 साल की कैद और 20 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है।

कार को ओवरटेक कर शरीर में उतारी गई 19 गोलियाँ

बता दें कि राजू पाल ने साल 2004 में विधानसभा उप-चुनाव में अशरफ को हराया था। इसके बाद दोनों गुटों में ठन गई थी। चुनावी नतीजों के तीन माह के अंदर ही 25 जनवरी को राजू पाल की गाड़ी को जीटी रोड पर ओवरटेक करके रोक लिया गया था। उनकी गाड़ी पर ताबड़तोड़ गोलियाँ बरसाई गई थी। इस हत्याकांड में स्कॉर्पियो सवार 5 हमलावरों ने राजू पाल और उनके सहयोगियों पर अंधाधुँध गोलीबारी की थी।

इस हमले में राजू पाल को 19 गोलियाँ लगी। उनके साथ गाड़ी में मौजूद रहे संदीप यादव और देवीलाल की भी जान चली गई थी, जबकि राजू पाल के साथ गाड़ी में आगे की सीट पर बैठी रुखसाना घायल हो गई। इस मामले में उमेश पाल चश्मदीद गवाह थे, बाद में उनकी भी हत्या कर दी गई। वहीं, इस हत्याकांड में नामजद अतीक और अशरफ को पुलिस हिरासत के दौरान प्रयागराज में मार दिया गया।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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