Tuesday, September 28, 2021
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मेवात में धर्मांतरण कराने वाला अबू बकर खुद था हिंदू, 500 गज के प्लॉट के लिए बाप ने पूरे परिवार से कबूल करवाया था इस्लाम

सलंबा गाँव में बसने के बाद 500 गज के प्लॉट के चक्कर में तेजपाल ने इस्लाम मजहब अपना लिया और अपना नाम अबुल रहमान कर लिया। वहीं बेटे संदीप यादव को अबू बकर बना दिया गया।

हरियाणा के मेवात में कुछ दिन पहले एक हिंदू युवक के धर्मांतरण कराने के मामले में अबू बकर नाम के युवक को गिरफ्तार किया गया था। अब इसी मामले की छानबीन में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। हालिया जानकारी के अनुसार, अबू बकर खुद हिंदू था और यादव समाज से संबंध रखता था। 

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, 14 साल पहले अबू बकर का नाम संदीप यादव था, जो गुरुग्राम जिले के पटौड़ी थाना अंतर्गत नूरगढ़ गाँव में रहता था। लेकिन, साल 2007 में उसके पिता तेजपाल सलंबा गाँव में जाकर बस गए। वह नूँह के टाई गाँव में पढ़ाते थे।

इस दौरान तेजपाल ने अपने हिस्से की जमीन और घर बेचा था। सलंबा में बसने के बाद 500 गज के प्लॉट के चक्कर में तेजपाल ने इस्लाम मजहब अपना लिया और अपना नाम अबुल रहमान कर लिया। वहीं बेटे संदीप यादव को अबू बकर बना दिया गया। पत्नी बबली का नाम मरीयम रख दिया और बेटी सपना का नाम जैनब कर दिया।

कुछ समय बाद अबू बकर का फरीदाबाद से निकाह कराया गया। अब वर्तमान में उसके दो बच्चे हैं और सलंबा गाँव में 200 गज जमीन भी है। जानकारी के मुताबिक अबू बकर वामसैफ संस्था से जुड़ा था और धौज गाँव में मदरसा चलाता था, जिसमें 200 बच्चे पढ़ते हैं।

मामले की जाँच में पता चला है कि अबू बकर के पिता ने 14 साल पहले केवल 500 गज प्लाट के लालच में न केवल खुद अपना धर्म परिवर्तन किया बल्कि अपनी पत्नी समेत बच्चों का भी धर्मांतरण करवा दिया।

धर्मांतरण के आरोप में पकड़ा गया था अबू बकर

उल्लेखनीय है कि अभी कुछ दिन पहले मेवात के रोजकामेव थाना अंतर्गत बरोटा गाँव के निवासी मनोज वर्मा ने अपने धर्मांतरण के आरोप में अबू बकर समेत 4 लोगों के विरुद्ध शिकायत दी थी। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सलंबा गाँव के अबू बकर को पकड़ा था जबकि बाकियों की तलाश चल रही थी। 

पीड़ित का कहना था कि धर्म परिवर्तन के बाद उसे सलंबा में ही बसा दिया गया और अन्य हिंदू युवकों को इस्लाम कबूल करवाने के काम में लगाया गया। कई माह तक आरोपितों ने उसे अपने साथ रखा और गोमाँस खिलाने का प्रयास करते थे। मना करने पर मारपीट होती थी।

धीरे-धीरे मनोज को हकीकत समझ आने लगी। उसने किसी तरह अपने पिता को ये सारी बातें बताई। जब पिता उससे मिलने आए तो उन पर भी धर्मांतरण का दबाव बनाया गया और पैसे का लालच देकर रोकने का प्रयास हुआ।

मनोज किसी तरह आरोपितों के चंगुल से निकला और दो दिन पहले पुलिस अधीक्षक को शिकायत दी। पीड़ित का कहना है कि ये आरोपित दावत-ए-इस्लाम और ग्लोबल पीस सेंटर चलाते हैं। ये सभी गरीब, छोटी जातियों के हिंदुओं, बेसहारा हिंदू धर्म के लोगों को बहला-फुसला कर इस्लाम कबूल करवाते है।

 

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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