Homeदेश-समाजकेरल में दिनदहाड़े RSS वर्कर की हत्या, शरीर पर गुदे मिले 50 निशान: बंगाल...

केरल में दिनदहाड़े RSS वर्कर की हत्या, शरीर पर गुदे मिले 50 निशान: बंगाल में भी BJP समर्थक का शव मिला

केरल केवल अकेला राज्य नहीं है जहाँ आए दिन संघ कार्यकर्ता या भारतीय जनता पार्टी से जुड़े लोग निशाना बनाए जाते हैं। बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर में भी रविवार को एक भाजपा समर्थक को मौत के घाट उतार दिया गया।

केरल के पल्लकड़ में ए संजीत नामक राष्ट्रीय स्वयंसेवक कार्यकर्ता की हत्या कर दी गई। संजीत सोमवार (नवंबर 15, 2021) की सुबह करीब 9 बजे अपनी बीवी के साथ बाइक पर कहीं जाने के लिए बाहर निकले थे, तभी उन पर हमला हुआ। 

अभी तक की जानकारी के मुताबिक, इस हमले के पीछे पॉपुलर फ्रंट इंडिया के छात्र संगठन एसडीपीआई सदस्यों का हाथ है। कथिततौर पर SDPI के लोगों ने 26 वर्षीय संजीत पर आज सुबह हमला किया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक संजीत के शरीर पर 50 से ज्यादा धारदार हथियार से वार के निशान मिले हैं। हत्या के बाद इलाके में तनाव वाला माहौल है। पुलिस ने सुरक्षा कड़ी कर दी है और मामले की जाँच कर रही है।

बता दें कि यह पहली दफा नहीं है कि केरल में किसी आरएसएस कार्यकर्ता की इस तरह बेरहमी से हत्या की गई हो।  इसी साल फरवरी में एक नंदू नामक संघ कार्यकर्ता को भी मौत के घाट उतारा गया था।

उल्लेखनीय है कि केरल केवल अकेला राज्य नहीं है जहाँ आए दिन संघ कार्यकर्ता या भारतीय जनता पार्टी से जुड़े लोग निशाना बनाए जाते हैं। बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर में भी रविवार (14 नवंबर 2021) को एक भाजपा समर्थक को मौत के घाट उतार दिया गया।

पश्चिम बंगाल के भगबानपुर में भास्कर बेरा का शव बरामद हुआ। वहाँ बीजेपी ने आरोप लगाया कि उसे टीएमसी समर्थकों ने मारा है। पार्टी के उपाध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा कि 2 मई को चुनावों के परिणाम आने के बाद से 80 कार्यकर्ता को मारा जा चुका है।

ताजा घटना के बाद मृतक भास्कर बेरा की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल है। देख सकते हैं कि हत्या के बाद उनका शरीर रेड़ी पर पड़ा है और आसपास खून बह रहा है। भाजपा ने जहाँ इस हत्या के लिए टीएमसी को दोषी बताया है वहीं टीएमसी ने कहा कि बेरा शनिवार को जुलूस में शराब के नशे में था। हो सकता है कि ज्यादा शराब पी लेने के कारण ये मृत्यु हुई हो।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

बेचे जाने और लीज पर देने का अंतर भूल बैठे हैं अखिलेश यादव, JPNIC ‘बिक गया’ या सिर्फ लीज पर गया? सपा प्रमुख के...

JPNIC विवाद में अखिलेश यादव के ‘बेचने’ के आरोप की पड़ताल पर जानिए योगी सरकार का लीज मॉडल, CAG की आपत्तियां और 265 करोड़ से 865 करोड़ तक कैसे पहुँचा प्रोजेक्ट।

UP में तेजी से बढ़ रही है ‘गो-इकोनॉमी’, दूध के साथ-साथ गोमूत्र भी बन रहा है रोजगार का साधन: शैम्पू, साबुन और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर...

सवाल उनसे है जो गाय, गोबर और गौमूत्र का नाम सुनते ही मजाक बनाने लगते हैं- जब यही व्यवस्था किसान का खर्च घटाकर उसकी आय बढ़ा रही है और तो उपहास किस बात का है?
- विज्ञापन -