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दिल्ली में SC-ST और OBC छात्रों को नहीं मिल रहा योजनाओं का लाभ: लंबित हैं 91% मामले, आवेदनों की संख्या में भी आ रही कमी

पिछले सप्ताह SC/ST/OBC वर्ग के कल्याण विभाग ने छात्रों के लिए विभिन्न छात्रवृत्ति और वित्तीय सहायता योजनाओं से संबंधित मुद्दों पर एक बैठक की। सभी छह योजनाओं के तहत प्राप्त 13,797 आवेदनों में से 11,176 स्कूल स्तर पर और 1,397 अंचल स्तर पर लंबित हैं।

दिल्ली में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के विद्यार्थियों को योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2022-23 में यहाँ एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों के लाभ के लिए बनाई गई छह योजनाओं के लिए कुल 13,797 आवेदन किए गए। आश्चर्यजनक है कि इनमें से कुल 12,573 आवेदन लंबित है। मतलब कुल आवेदन में से 91.12 प्रतिशत आवेदनों पर कोई काम नहीं हुआ।

‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले सप्ताह SC/ST/OBC वर्ग के कल्याण विभाग ने छात्रों के लिए विभिन्न छात्रवृत्ति और वित्तीय सहायता योजनाओं से संबंधित मुद्दों पर एक बैठक की। सभी छह योजनाओं के तहत प्राप्त 13,797 आवेदनों में से 11,176 स्कूल स्तर पर और 1,397 अंचल स्तर पर लंबित हैं।

इन 6 योजनाओं में मुख्यमंत्री विद्यार्थी प्रतिभा योजना, ओबीसी छात्रों के लिए पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति, अनुसूचित जाति के लिए पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना, ओबीसी छात्रों के लिए प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति, अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना और SC/ST/OBC छात्रों के लिए ट्यूशन फीस को वापस लौटाने की योजनाएँ शामिल हैं।

वहीं शिक्षा निदेशालय (DoE) द्वारा जारी एक सर्कुलर में कहा गया है कि दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने अब तक प्राप्त आवेदनों की संख्या में कमी पर अपनी कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। हालाँकि बड़ा सवाल यह है की अब तक जितने आवेदन प्राप्त हुए हैं, उनमें से अधिकांश आवेदन लंबित पड़े हुए हैं। इस वजह से योजनाओं के लिए आवेदन करने के बावजूद छात्रों को लाभ से वंचित रहना पड़ रहा है।

दिल्ली सरकार के समाज कल्याण विभाग के मंत्री राज कुमार आनंद ने अख़बार को बताया, “बैठक का मुख्य उद्देश्य छात्रों के बीच जागरूकता बढ़ाने की दिशा में काम करने और उन्हें इन योजनाओं में अधिक आवेदन करने के लिए प्रोत्साहित करना था।” आनंद ने कहा, “दिल्ली सरकार स्कूल की फीस नहीं लेती है और सरकारी स्कूल छात्रों को मुफ्त बैग और किताबें मुहैया कराते हैं, जिससे छात्रों को शायद लगता है कि उन्हें इन योजनाओं में आवेदन करने की आवश्यकता नहीं है।”

आनंद के अनुसार, जागरूकता बढ़ाने के लिए उठाए गए कदमों में स्कूलों और समाचार पत्रों में योजनाओं का विज्ञापन करना और स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) की मदद से इन योजनाओं को प्रचारित करने के लिए स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करना शामिल है। मंत्री ने कहा, “हम एक पत्रिका प्रकाशित करने की भी योजना बना रहे हैं, जिसे हम सभी स्कूलों में प्रसारित करेंगे।”

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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