Sunday, October 17, 2021
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शाहीन बाग में खाली पड़ी कुर्सी-टेबल, घंटाघर में दिख रहे सिर्फ दुप्पटे-बैनर, मुंबई में धरना ही कर दिया खत्म!

शाहीन बाग में कुर्सी, टेबल और मेजें अपनी-अपनी जगह पर हैं, लेकिन उन पर बैठने वाला कोई नहीं। लखनऊ के घंटाघर वाला धरना-प्रदर्शन भी अचानक से स्थगित। मुंबई के मोरलैंड रोड पर जारी धरने को खत्म करने का निर्णय लिया गया।

देश में बढ़ रहे कोरोना के मामलों को देखते हुए कई राज्यों में एवं जिलों में लॉकडाउन की स्थिति आ गई है। दिल्ली में भी 31 मार्च तक लॉकडाउन है। यूपी के भी कई जिलों में इसकी घोषणा हो गई है। महाराष्ट्र में तो संक्रमण के सबसे अधिक मामले होने के कारण प्रशासन सकते में है। पूरे देश की बात करें तो दिल्ली मुंबई समेत 16 राज्यों के 331 शहरों में लॉकडाउन है और 60 करोड़ से ज्यादा आबादी घरों में है। अब इस स्थिति का असर महीनों से चल रहे नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ़ प्रदर्शन पर भी दिखने लगा है।

शाहीन बाग की बात करें तो एक समय में सैकड़ों प्रदर्शनकारियों से घिरे रहने वाली ये जगह सोमवार की सुबह बिलकुल खाली दिखी। केवल 2-3 लोग ही वहाँ पर बैठे नजर आए, वह भी सोते हुए। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रदर्शनस्थल पर कुर्सी, टेबल और मेजें अपनी-अपनी जगह पर हैं, लेकिन उन पर बैठने वाला वहाँ कोई नहीं है। मंच पर भी केवल महापुरुषों की तस्वीरें जस की तस है मगर उनका हवाला देकर सीएए के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने वाला कोई नहीं है।

इधर, लखनऊ के घंटाघर पर नागरिकता कानून के खिलाफ 17 जनवरी से चल रहा धरना प्रदर्शन भी अचानक स्थगित कर दिया गया है। महिलाओं की ओर से पुलिस कमिश्नर को लिखे गए पत्र में कहा गया है कि कोरोना वायरस के चलते वह अपना प्रदर्शन खत्म कर रही हैं। उनका कहना है कि सरकार जब हालात के बेहतर हो जाने का ऐलान करेगी। उसके बाद वे दोबारा सीएए, एनआरसी के विरोध में घंटाघर पर प्रदर्शन करेंगी। हालाँकि बता दें कि यहाँ इन महिलाओं ने सांकेतिक तौर पर अपने दुप्पटे और बैनर को प्रदर्शनस्थल पर छोड़ा है और पुलिस कमिश्नर को कहा है कि वह उनकी इन चीजों को धरना स्थल से न हटाएँ।

इसके बाद मुंबई में भी सीएए, एनआरसी व एनपीआर के खिलाफ 50 दिनों से मुंबई के मोरलैंड रोड पर जारी धरने को कोरोना वायरस की वजह से खत्म करने का निर्णय लिया गया है। जोनल डीसीपी अभिनाश कुमार के मुताबिक, महिला प्रदर्शनकारियों ने कोरोना वायरस के कारण धरने को खत्म करने का निर्णय लिया है।

गौरतलब है कि कोरोना वायरस के बढ़ते प्रभाव के मद्देनजर इन प्रदर्शनों का खत्म होना बेहद आवश्यक माना जा रहा था। लेकिन बीते दिनों शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों की मनमानियों के कारण काफी दिक्कतें आ रही थीं। क्योंकि दो प्रदर्शनकारियों के कोरोना संक्रमित पाए जाने के बावजूद इन लोगों ने कोई सबक नहीं लिया था और लगातार सरकार के आदेशों का उल्लंघन कर रहे थे। ऐसे में आज ये तीन प्रदेशों से आईं खबरें थोड़ी राहत देने वाली है।

बता दें कि शाहीन बाग के पास प्रदर्शनकारियों के दो गुटों में प्रदर्शन खत्म करने को लेकर शनिवार को आपसी मतभेद भी देखने को मिले थे। इस दौरान एक गुट धरना खत्म करने की अपील कर रहा था जबकि दूसरा धरना जारी रखने पर अड़ा हुआ था। जिसे देखते हुए सरिता विहार, जसोला और आसपास के रहने वाले लोगों ने कहा था कि शाहीन बाग में चल रहा प्रदर्शन अब सरकार नहीं बल्कि मानवता के खिलाफ हो गया है।

 

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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