Friday, November 27, 2020
Home देश-समाज हरियाणा-पंजाब में पराली जलाने से उठा जानलेवा धुआँ बिहार में क्यों नहीं उठता

हरियाणा-पंजाब में पराली जलाने से उठा जानलेवा धुआँ बिहार में क्यों नहीं उठता

छोटे किसान हमेशा फसल के हर हिस्से का उपयोग करते हैं क्योंकि यह उनके लिए किफ़ायती साबित होता है। बड़े खेतों के मालिकों के लिए अन्न का महत्व है, उसके बचे अवशेष का नहीं।

पिछले कुछ दिनों में राष्ट्रीय राजधानी में वायु प्रदूषण का स्तर काफ़ी बढ़ गया है। लगातार इस बढ़ते प्रदूषण की सबसे बड़ी वजह पंजाब और आसपास के राज्यों में जलाई जाने वाली पराली है। दिल्ली में प्रदूषण का स्तर बढ़ने के मद्देनज़र दिल्ली सरकार ने स्कूलों और मोहल्ला क्लिनिकों में मुफ़्त मास्क बाँटने की घोषणा भी की।

दिल्ली-NCR में इस दम घोंटू वातावरण में ख़तरनाक स्तर पर पहुँचे प्रदूषण की वजह से वजह से दिल्ली में लगभग स्वास्थ्य आपातकाल जैसी स्थिति है। पराली का धुआँ और धूल के महीन कणों की वजह से दिल्ली-NCR की हवा इस क़दर ज़हरीली हो गई है कि साँस लेना तक दूभर हो गया है।

हैरान कर देने वाले हैं हवा में घुले ज़हर के मामले

पंजाब में इस साल 23 सितंबर से 27 अक्‍टूबर के बीच पराली जलाने के 12,027 मामले रिकॉर्ड किए गए हैं, जो पिछले साल इसी दौरान पराली जलाने की घटनाओं से 2,427 ज्‍यादा हैं। वहीं, हरियाणा की बात करें तो इस साल 3,705 पराली जलाने के मामले रिकॉर्ड किए गए, जो पिछले साल 3,705 थे। इतना ही नहीं, पिछले 24 घंटे में ही पराली जलाने के 2,577 मामले रिकॉर्ड किए जा चुके हैं। इससे एक दिन पहले पराली जलाने के 1,654 मामले सामने आए थे। हालाँकि, अधिकारियों का कहना है कि धान की रोपाई जल्‍दी होने के कारण वायु प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। बता दें कि पराली जलाना भारतीय दंड संहिता और वायु प्रदूषण नियंत्रक क़ानून, 1981 के तहत एक अपराध है। बावजूद इसके पंजाब और हरियाणा में किसान पराली जलाने में पीछे नहीं हैं।

यह सारी दिक्कतें केवल इसलिए है क्योंकि हरियाणा और पंजाब जैसे समृद्ध राज्य फ़सलों की कटाई के बाद पराली जला देते हैं। बता दें कि इन समृद्ध राज्यों में फ़सलों की कटाई मशीनों से की जाती है। अब चूँकि फ़सलों की कटाई मशीन से की जाती है इसलिए फ़सल कटाई के दौरान मशीन बाली को ज़मीन से नहीं बल्कि ऊपर से काटती है। इससे होता यह है कि बाक़ी का हिस्सा खेत में ही बच जाता है, जिसे बाद में व्यर्थ हिस्से के रूप में जला दिया जाता है और फिर इसका परिणाम होता है यह दम घोंटू प्रदूषण।

बिहार में पराली जलाने की नौबत ही नहीं आती

इन सब बातों में ग़ौर करने वाली बात यह है कि एक ओर जहाँ यूपी, हरियाणा और पंजाब में पराली जलाने से प्रदूषण की समस्या सामने आती है, वहीं बिहार, झारखंड, असम, ओडिशा जैसे राज्य में पराली नहीं जलाई जाती। वहाँ के किसान अभी भी पुरानी पद्धति से ही फ़सलों की कटाई करते हैं। मतलब यह है कि फ़सल को काटते समय किसान फ़सल की बाली को ज़मीन से काटते हैं और इसलिए व्यर्थ हिस्से के रूप में कुछ बचता ही नहीं है। दूसरी अहम बात यह है कि बिहार में किसान वर्ग पराली का उपयोग मवेशियों के लिए चारे के रूप में भी करते हैं, इसलिए वहाँ पराली जलाने की नौबत ही नहीं आती।

दरअसल, छोटे किसान हमेशा पौधे के हर हिस्से का उपयोग करते हैं क्योंकि यह उनके लिए किफ़ायती साबित होता है। बड़े खेतों के मालिकों के लिए किफ़ायती विकल्प कोई मायने नहीं रखते। लेकिन बिहार के किसान छोटी-छोटे विकल्पों का भी पूरा ध्यान रखते हैं। चारे के रूप में उपयोग किया जाने वाला भूसा उनके मवेशियों के लिए प्रमुख भोजन है।

मशीनीकरण इस जानलेवा धुएँ का कारण?

यह सच है कि मशीनों से फ़सलों की कटाई के दौरान ठूँठ से कहीं अधिक आकार का हिस्सा छूट जाता है, जिसे जलाना पड़ता है। वहीं, एक और बात ग़ौर करने वाली है कि अगर मशीनों से कटाई न भी हो तो हरियाणा और पंजाब में किसान गाय-भैंस कम पालते (ट्रैक्टर आधारित खेती) हैं, ऐसे में पराली के इस्तेमाल को कोई विकल्प नहीं रह जाता। इस वजह से वो व्यर्थ की वस्तु बनकर रह जाती है जिसे जलाना ही आर्थिक रूप से उनके हित में होता है।  

सोशल मीडिया पर भी पराली जलाने का मुद्दा काफ़ी ज़ोर पकड़े हुए है। यहाँ कई यूज़र्स ऐसे हैं जो इस बात से इत्तेफाक़ रखते हैं कि बिहार में फ़सलों की कटाई के लिए आज भी पुरानी पद्धति का ही इस्तेमाल होता है। ट्विटर यूज़र राजू दास ने लिखा कि धान सभी जगह उगाया जाता है, लेकिन हर जगह पराली को जलाया नहीं जाता है। उदाहरण के लिए असम में केवल धान उगाया जाता है, गेहूँ या अन्य अनाज नहीं उगाया जाता। लेकिन, असम में पराली नहीं जलाई जाती।

मशीनों के इस्तेमाल से परहेज नहीं, लेकिन हवा घुले ज़हर की रोकथाम पहले

कुल मिलाकर अगर कहा जाए कि दिल्ली-NCR में सफेद चादर के रूप में फैला दम घोंटू धुआँ मशीनी पद्धति की देन है, जिसके इस्तेमाल से आम जनजीवन दूभर बना हुआ है। हालाँकि, इसका मतलब यह बिलकुल नहीं है कि हमें तकनीकों से परहेज कर लेना चाहिए।

लेकिन, जब मशीनों का इस्तेमाल जानलेवा बनने लगे तो उस पर गहनता से विचार ज़रूर कर लेना चाहिए। साथ ही यह भी निष्कर्ष निकालने का प्रयास करना चाहिए कि मशीनी युग अगर किसानों को खेती करने के सरलतम उपाय दे रहा है तो उसके उचित उपयोग पर भी ग़ौर कर लेना चाहिए, ताकि हवा में घुले इस ज़हर की रोकथाम की जा सके।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘मैं नपुंसक नहीं.. हिंदुत्व का मतलब पूजा-पाठ या मंदिर का घंटा बजाना नहीं, फ़ोर्स किया तो हाथ धोकर पीछे पड़ जाऊँगा’: उद्धव ठाकरे

साक्षत्कार में उद्धव ठाकरे ने कहा कि उन्हें विरोधियों के पीछे पड़ने को मजबूर ना किया जाए। इसके साथ ही ठाकरे ने कहा कि हिंदुत्व का मतलब मंदिर का घंटा बजाना नहीं है।

देखिए 48 घंटों में द वायर ‘मोदी की रैली में कोई नहीं आता’ से ‘बिहार में मोदी को सब चाहते हैं’ कैसे पहुँच गया

द वायर सरीखे एजेंडापरस्त मीडिया समूहों के लिए इस श्रेणी का गिरगिटनुमा विश्लेषण या दावा कोई नई बात नहीं है। प्रोपेगेंडा ही इनका एकमात्र उद्देश्य है भले उसके लिए स्क्रीन पर कुछ अनर्गल ही क्यों न परोसना पड़े।

दिल्ली दंगा-2020: सार्वजनिक स्थानों पर दिल्ली पुलिस लगाएगी 20 दंगाइयों की तस्वीरें, जानकारी देने वालों को ईनाम

बहुत जल्द दिल्ली पुलिस द्वारा राजधानी के अनेक इलाकों में दिल्ली दंगों के इन 20 आरोपितों की तस्वीरें सार्वजनिक स्थानों पर लगा दी जाएगी।

कानपुर लव जिहाद SIT रिपोर्ट: आखिर वामपंथियों को 14 साल की बच्चियों का मुस्लिम द्वारा गैंगरेप क्यों नॉर्मल लगता है?

बात यह है कि हर मामले में मुस्लिम लड़का ही क्यों होता है? ईसाई या सिक्ख लड़के आखिर किसी हिन्दू लड़की को अपना नाम हिन्दू वाला बता कर प्रेम करते क्यों नहीं पाए जाते?

नाबालिगों से गैंगरेप, जबरन मुस्लिम बनाना, नाम बदल कर दोस्ती… SIT की वह रिपोर्ट जिसे वामपंथी नकार रहे हैं

ऑपइंडिया के पास मौजूद SIT रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा है कि यह ग्रूमिंग जिहाद के कुछ बेहद चर्चित मामले थे, जिनमें हिन्दू युवतियों को धोखा देकर उनके धर्मांतरण का प्रयास या उनका उत्पीड़न किया गया।

दिल्ली के बेगमपुर में शिवशक्ति मंदिर में दर्जनों मूर्तियों का सिर कलम, लोगों ने कहते सुना- ‘सिर काट दिया, सिर काट दिया’

"शिव शक्ति मंदिर में लगभग दर्जन भर देवी-देवताओं का सर कलम करने वाले विधर्मी दुष्ट का दूसरे दिन भी कोई अता-पता नहीं। हिंदुओं की सहिष्णुता की कृपया और परीक्षा ना लें।”

प्रचलित ख़बरें

‘उसे मत मारो, वही तो सबूत है’: हिंदुओं संजय गोविलकर का एहसान मानो वरना 26/11 तुम्हारे सिर डाला जाता

जब कसाब ने तुकाराम को गोलियों से छलनी कर दिया तो साथी पुलिसकर्मी आवेश में आ गए। वे कसाब को मार गिराना चाहते थे। लेकिन, इंस्पेक्टर गोविलकर ने ऐसा नहीं करने की सलाह दी। यदि गोविलकर ने उस दिन ऐसा नहीं किया होता तो दुनिया कसाब को समीर चौधरी के नाम से जानती।

फैक्टचेक: क्या आरफा खानम घंटे भर में फोटो वाली बकरी मार कर खा गई?

आरफा के पाँच बज कर दस मिनट वाले ट्वीट के साथ एक ट्वीट छः बज कर दस मिनट का था, जिसके स्क्रीनशॉट को कई लोगों ने एक दूसरे को व्हाट्सएप्प पर भेजना शुरु किया। किसी ने यह लिखा कि देखो जिस बकरी को सीने से चिपका कर फोटो खिंचा रही थी, घंटे भर में उसे मार कर खा गई।

हाथ में कलावा, समीर चौधरी नाम की ID: ‘हिंदू आतंकी’ की तरह मरना था कसाब को – पूर्व कमिश्नर ने खोला राज

"सभी 10 हमलावरों के पास फर्जी हिंदू नाम वाले आईकार्ड थे। कसाब को जिंदा रखना पहली प्राथमिकता थी। क्योंकि वो 26/11 मुंबई हमले का सबसे बड़ा और एकलौता सबूत था। उसे मारने के लिए ISI, लश्कर-ए-तैयबा और दाऊद इब्राहिम गैंग ने..."

जहाँ बहाया था खून, वहीं की मिट्टी पर सर रगड़ बोला भारत माता की जय: मुर्दों को देख कसाब को आई थी उल्टी

पुलिस कमिश्नर राकेश मारिया सुबह साढ़े चार बजे कसाब से कहते हैं कि वो अपना माथा ज़मीन से लगाए... और उसने ऐसा ही किया। इसके बाद जब कसाब खड़ा हुआ तो मारिया ने कहा, “भारत माता की जय बोल” कसाब ने फिर ऐसा ही किया। मारिया दोबारा भारत माता की जय बोलने के लिए कहते हैं तो...

‘माझ्या कक्कानी कसाबला पकड़ला’ – बलिदानी ओंबले के भतीजे का वो गीत… जिसे सुन पुलिस में भर्ती हुए 13 युवा

सामने वाले के हाथों में एके-47... लेकिन ओंबले बिना परवाह किए उस पर टूट पड़े। ट्रिगर दबा, गोलियाँ चलीं लेकिन ओंबले ने कसाब को...

‘कबीर असली अल्लाह, रामपाल अंतिम पैगंबर और मुस्लिम असल इस्लाम से अनजान’: फॉलोवरों के अजीब दावों से पटा सोशल मीडिया

साल 2006 में रामपाल के भक्तों और पुलिसकर्मियों के बीच हिंसक झड़प हुई थी जिसमें 5 महिलाओं और 1 बच्चे की मृत्यु हुई थी और लगभग 200 लोग घायल हुए थे। इसके बाद नवंबर 2014 में उसे गिरफ्तार किया गया था।
- विज्ञापन -

‘मैं नपुंसक नहीं.. हिंदुत्व का मतलब पूजा-पाठ या मंदिर का घंटा बजाना नहीं, फ़ोर्स किया तो हाथ धोकर पीछे पड़ जाऊँगा’: उद्धव ठाकरे

साक्षत्कार में उद्धव ठाकरे ने कहा कि उन्हें विरोधियों के पीछे पड़ने को मजबूर ना किया जाए। इसके साथ ही ठाकरे ने कहा कि हिंदुत्व का मतलब मंदिर का घंटा बजाना नहीं है।

देखिए 48 घंटों में द वायर ‘मोदी की रैली में कोई नहीं आता’ से ‘बिहार में मोदी को सब चाहते हैं’ कैसे पहुँच गया

द वायर सरीखे एजेंडापरस्त मीडिया समूहों के लिए इस श्रेणी का गिरगिटनुमा विश्लेषण या दावा कोई नई बात नहीं है। प्रोपेगेंडा ही इनका एकमात्र उद्देश्य है भले उसके लिए स्क्रीन पर कुछ अनर्गल ही क्यों न परोसना पड़े।

दिल्ली दंगा-2020: सार्वजनिक स्थानों पर दिल्ली पुलिस लगाएगी 20 दंगाइयों की तस्वीरें, जानकारी देने वालों को ईनाम

बहुत जल्द दिल्ली पुलिस द्वारा राजधानी के अनेक इलाकों में दिल्ली दंगों के इन 20 आरोपितों की तस्वीरें सार्वजनिक स्थानों पर लगा दी जाएगी।

पाकिस्तान: निकाह में सास ने दामाद को तोहफे में थमाई AK-47, शान से फोटो खिंचवाते Video वायरल

पाकिस्तान की एक शादी समारोह का वीडियो वायरल हुआ है। इसमें सास को दामाद को शगुन के तौर पर AK-47 थमाते देखा जा सकता है।

लालू यादव पर दोहरी मार: वायरल ऑडियो मामले में बीजेपी विधायक ने कराई FIR, बंगले से वार्ड में किए गए शिफ्ट

जेल से कथित तौर पर फोन करने के मामले में लालू यादव पर FIR हुई है। साथ ही उन्हें बंगले से रिम्स के वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया है।

कानपुर लव जिहाद SIT रिपोर्ट: आखिर वामपंथियों को 14 साल की बच्चियों का मुस्लिम द्वारा गैंगरेप क्यों नॉर्मल लगता है?

बात यह है कि हर मामले में मुस्लिम लड़का ही क्यों होता है? ईसाई या सिक्ख लड़के आखिर किसी हिन्दू लड़की को अपना नाम हिन्दू वाला बता कर प्रेम करते क्यों नहीं पाए जाते?

2008 में फार्म हाउस में पार्टी, अब कर रहे इग्नोर: 26/11 पर राहुल गाँधी की चुप्पी 12 साल बाद भी बरकरार

साल 2008 में जब पाकिस्तान के आतंकी मुंबई के लोगों को सड़कों पर मार चुके थे उसके कुछ दिन बाद ही गाँधी परिवार के युवराज अपने दोस्त की संगीत रस्म को इंजॉय कर रहे थे।

’26/11 RSS की साजिश’: जानें कैसे कॉन्ग्रेस के चहेते पत्रकार ने PAK को क्लिन चिट देकर हमले का आरोप मढ़ा था भारतीय सेना पर

साल 2007 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अजीज़ को उसके उर्दू भाषा अखबार रोजनामा राष्ट्रीय सहारा के लिए उत्कृष्ट अवार्ड दिया था। कॉन्ग्रेस में अजीज़ को सेकुलरिज्म का चमचमाता प्रतीक माना जाता था।

नाबालिगों से गैंगरेप, जबरन मुस्लिम बनाना, नाम बदल कर दोस्ती… SIT की वह रिपोर्ट जिसे वामपंथी नकार रहे हैं

ऑपइंडिया के पास मौजूद SIT रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा है कि यह ग्रूमिंग जिहाद के कुछ बेहद चर्चित मामले थे, जिनमें हिन्दू युवतियों को धोखा देकर उनके धर्मांतरण का प्रयास या उनका उत्पीड़न किया गया।

‘कबीर असली अल्लाह, रामपाल अंतिम पैगंबर और मुस्लिम असल इस्लाम से अनजान’: फॉलोवरों के अजीब दावों से पटा सोशल मीडिया

साल 2006 में रामपाल के भक्तों और पुलिसकर्मियों के बीच हिंसक झड़प हुई थी जिसमें 5 महिलाओं और 1 बच्चे की मृत्यु हुई थी और लगभग 200 लोग घायल हुए थे। इसके बाद नवंबर 2014 में उसे गिरफ्तार किया गया था।

हमसे जुड़ें

272,571FansLike
80,400FollowersFollow
358,000SubscribersSubscribe