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‘पटाखा बैन पूरे देश में लागू, सिर्फ दिल्ली-NCR नहीं’: दीपावली से पहले सुप्रीम कोर्ट का फरमान, कहा – वायु एवं ध्वनि प्रदूषण कम करने के लिए उठाए जाएँ कदम

"न्यायालय ने याचिकाओं की सुनवाई के दौरान कई आदेश पारित किए हैं, जहाँ वायु के साथ-साथ ध्वनि प्रदूषण को कम करने और उससे बचने के लिए कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।"

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि दिल्ली-एनसीआर में पटाखों पर बैन को लेकर दिया गया आदेश पूरे देश पर लागू होता है, किसी भी अन्य जगह पर आदेश लागू करने के लिए नया आदेश निकालने की जरूरत नहीं है। इसका मतलब है कि पटाखों में इस्तेमाल होने वाले रसायनों और उसके पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को कारण बताते हुए पूरे देश में अब ये बैन लागू हो गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए पूरे देश में पटाखों पर बैन लगा दिया है। यह आदेश सिर्फ दिल्ली-एनसीआर तक सीमित नहीं होगा, बल्कि पूरे देश पर लागू होगा। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि पटाखों से होने वाला प्रदूषण गंभीर स्वास्थ्य समस्या है। पटाखों से होने वाला वायु प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण और प्रकाश प्रदूषण लोगों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।

‘लाइव लॉ’ की रिपोर्ट के मुताबिक, राजस्थान सरकार को निर्देश देने की माँग को लेकर ये याचिका जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस एमएम सुंदरेश की पीठ में दायर हुई थी। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि बेरियम पटाखों पर प्रतिबंध और वायु और ध्वनि प्रदूषण को कम करने के मामले में नए निर्देश देने की आवश्यकता नहीं है। उसका पिछला आदेश देश के सभी राज्यों के लिए बाध्यकारी हैं।

जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस एमएम सुंदरेश की पीठ ने कहा, “इस समय, किसी विशेष आदेश की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि इस न्यायालय ने याचिकाओं की सुनवाई के दौरान कई आदेश पारित किए हैं, जहाँ वायु के साथ-साथ ध्वनि प्रदूषण को कम करने और उससे बचने के लिए कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। इस मामले में भी वही आदेश लागू होंगे। ऐसे में हम स्पष्ट कहते हैं कि राजस्थान राज्य भी इस पर ध्यान देगा और न केवल त्योहारी सीजन के दौरान बल्कि पूरे साल वायु और ध्वनि प्रदूषण को कम करने के लिए सभी कदम उठाएगा।

बता दें कि साल 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने कई निर्देश पारित किए थे कि दिवाली से पहले पटाखों में प्रतिबंधित रसायनों का उपयोग न किया जाए। पीठ ने यह भी स्पष्ट किया था कि पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं है और केवल उन्हीं पटाखों पर प्रतिबंध लगाया गया है जिनमें बेरियम का इस्तेमाल होता है। वहीं, 2018 के एक अन्य आदेश के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी निर्देशों के बाद ग्रीन पटाखों को जलाने की अनुमति है।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि पटाखों से होने वाले प्रदूषण से लोगों को साँस की समस्या, दिल की समस्या, और अन्य स्वास्थ्य समस्याएँ हो सकती हैं। पटाखों से होने वाला ध्वनि प्रदूषण लोगों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक है। पटाखों का उपयोग केवल धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में किया जा सकता है। इन कार्यक्रमों में भी पटाखों का उपयोग सीमित मात्रा में किया जाएगा। पटाखों के निर्माण और बिक्री पर रोक लगा दी गई है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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