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CJI रंजन गोगोई ने कहा- अभी अयोध्या केस की सुनवाई ज़रूरी, कश्मीर के लिए समय नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को राज्यसभा सांसद वाइको की उस याचिका को भी ख़ारिज कर दिया, जिसमें जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूख अब्दुल्ला को अदालत के समक्ष पेश होने के लिए माँग की गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर में संविधान के अनुच्छेद-370 के अधिकतर प्रावधानों को हटाने के फ़ैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं को सोमवार (30 सितंबर) को अपनी संविधान पीठ को भेज दिया और यह पीठ मंगलवार (1अक्टूबर) को सुनवाई करेगी। CJI रंजन गोगोई की अगुवाई वाली पीठ ने याचिकाओं को पाँच न्यायाधीशों की संविधान पीठ के पास भेजा है।

दरअसल, कश्मीर से जुड़े मामले संविधान पीठ को भेजने के संदर्भ में CJI ने कहा कि अभी हमारे पास बाकी मामले सुनने का समय नहीं है क्योंकि अभी अयोध्या मामले पर सुनवाई चल रही है, जोकि अंतिम चरण में है। इन याचिकाओं में कश्मीर में पत्रकारों के आवागमन पर लगाए गए कथित प्रतिबंधों का मामला उठाने वाली याचिकाएँ भी शामिल हैं। अब न्यायमूर्ति एनवी रमण की अगुवाई वाली संविधान पीठ कश्मीर मुद्दों से जुड़े मामलों की सुनवाई करेगी।

वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को राज्यसभा सांसद वाइको की उस याचिका को भी ख़ारिज कर दिया, जिसमें जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूख अब्दुल्ला को अदालत के समक्ष पेश होने के लिए माँग की गई थी। कोर्ट ने कहा कि एमडीएमके नेता सार्वजनिक सुरक्षा क़ानून (PSA) के तहत हिरासक को चुनौती दे सकते हैं।

अयोध्या मामले में सुनवाई के दौरान सीजेआई रंजन गोगोई ने कहा है कि अयोध्या केस पर 18 अक्टूबर तक सुनवाई ख़त्म होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि अगर चार हफ्ते में हमने फ़ैसला दे दिया, तो ये एक करिश्मा ही होगा। लेकिन, अगर सुनवाई 18 अक्टूबर तक ख़त्म नहीं हुई, तो फ़ैसला संभव नहीं हो पाएगा। साथ ही CJI ने कहा कि 18 अक्टूबर के बाद एक भी दिन अतिरिक्त नहीं है, इसलिए पक्षकार इसी समय सीमा में सुनवाई पूरी करें।

सुप्रीम कोर्ट में आज रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद की रोजाना सुनवाई हो रही है। सोमवार (30 सितंबर) को सुनवाई का 34वाँ दिन है। शुक्रवार (27 सितंबर) को मुस्लिम पक्ष की दलीलें जारी रही थीं, आज भी मुस्लिम पक्ष अपनी दलील रख रहा है। इसके बाद हिंदू पक्ष की ओर से उनका जवाब दिया जाएगा।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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