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भारत में पाकिस्तानी कलाकारों को बैन करने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, कहा- इतनी छोटी सोच मत रखो

अदालत ने याचिका को ख़ारिज करते हुए कहा कि अपने देश से प्रेम दिखाने के लिए किसी और देश से नफ़रत करना जरूरी नहीं है। सच्चे देशभक्त की पहचान के तौर पर सुप्रीम कोर्ट ने देश के लिए निस्वार्थ समर्पण की भावना होना जरूरी बताया।

सुप्रीम कोर्ट ने पाकिस्तानी कलाकारों के भारत में प्रदर्शन पर रोक लगाने की माँग को ले कर दायर याचिका को ख़ारिज कर दिया। सुनवाई के दौरान अदालत ने इसे याचिकाकर्ता की छोटी सोच बताया। मंगलवार (28 नवम्बर, 2023) सुनाए गए इस फैसले के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ता से ऐसा न करने के लिए भी कहा। यह याचिका एक स्वघोषित सिनेमा वर्कर फैज़ कुरैशी ने दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट से पहले मुंबई हाईकोर्ट से भी फैज़ कुरैशी की यही याचिका ख़ारिज हो चुकी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तानी कलाकारों पर बैन लगाने की याचिका की सुनवाई न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और एसवीएन भट्टी की बेंच में हुई। याचिकाकर्ता ने इस याचिका में सूचना और प्रसारण मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय को पक्षकार बनाया था। याचिका में कहा गया था कि संबंधित मंत्रालय पाकिस्तानी कलाकारों को न सिर्फ आने से रोकें बल्कि उनके द्वारा एप्लाई किया जाने वाला वीजा भी निरस्त कर दिया करें। फैज़ कुरैशी ने कहा था कि अगर ऐसा न किया गया तो इससे भारतीय कलाकारों के प्रति भेदभाव की भावना बढ़ेगी।

दोनों देशों की तुलना करते हुए याचिका में यह भी बताया गया था कि जो सुविधा और सहूलियत पाकिस्तानी कलाकारों को भारत में प्रदर्शन के लिए दी जाती है वो पाकिस्तान में भारतीय कलाकारों को नहीं मिलती। साथ ही कहा गया कि अगर पाकिस्तानी खिलाड़ियों को भारत में खेलने की अनुमति दी जाती है तो उसकी आड़ में पाकिस्तान अपने गायक आदि जैसे कई कलाकार भेज कर खेल के आयोजन का दुरूपयोग कर सकते हैं।

सुनवाई के दौरान ही जस्टिस खन्ना ने कहा, “क्षमा करें। ऐसा न कीजिए। ये आपको एक अच्छी सलाह है। छोटी सोच का प्रदर्शन मत कीजिए।” अदालत ने याचिका को ख़ारिज करते हुए कहा कि अपने देश से प्रेम दिखाने के लिए किसी और देश से नफ़रत करना जरूरी नहीं है। सच्चे देशभक्त की पहचान के तौर पर सुप्रीम कोर्ट ने देश के लिए निस्वार्थ समर्पण की भावना होना जरूरी बताया। अदालत ने यह भी कहा कि कला, संगीत, खेल, संस्कृति, नृत्य आदि शांति लाती हैं।

बताते चलें कि सुप्रीम कोर्ट से पहले मुंबई हाईकोर्ट भी फैज़ कुरैशी की यही याचिका खारिज कर चुका है। तब हाईकोर्ट ने याचिका में दम न होना बताते हुए इसे शांति और सद्भाव के खिलाफ बताया था। मुंबई हाईकोर्ट ने अपनी टिप्पणी में यह भी कहा था कि इस प्रकार के प्रतिबंध लगाने से भारतीय नागरिकों द्वारा किए जा रहे व्यापार आदि पर भी गलत असर पड़ेगा।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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