Sunday, May 29, 2022
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‘कॉलेज में नहीं पहन सकेंगी हिजाब, चाहें तो कर लें ऑनलाइन क्लास’: उडुपी हिजाब विवाद पर बोले कर्नाटक के बीजेपी MLA भट

''सरकार द्वारा गठित उच्चाधिकार समिति ड्रेस कोड और यूनिफॉर्म के बारे में अतीत में अदालतों के विभिन्न आदेशों के संबंध में मौजूदा मानदंडों का अध्ययन करेगी। राज्य सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपने से पहले विभिन्न राज्यों में अपनाए जा रहे ड्रेस कोड के नियमों का भी अध्ययन किया जाएगा।''

कर्नाटक (Karnataka) के उडुपी जिले के प्री यूनिवर्सिटी कॉलेज की कुछ मुस्लिम छात्राओं के क्लास के अंदर भी हिजाब (Hijab) पहनने की माँग को लेकर जारी विवाद के मामले में उडुपी के विधायक के रघुपति भट (Raghupati Bhat) ने बयान दिया है। उन्होंने बुधवार (26 जवनवरी 2022) को कहा कि राज्य सरकार के आदेश के मुताबिक कॉलेज के अंदर हिजाब नहीं पहन सकते हैं। लेकिन इस विवाद के कारण शिक्षा प्रभावित न हो इसलिए इसके विकल्प के तौर पर ऐसी लड़कियाँ ऑनलाइन क्लास अटेंड कर सकती हैं। ताकि वो परीक्षा में शामिल हो सकें।

MLA भट ने कहा कि कर्नाटक सरकार उच्चाधिकार प्राप्त समिति के जरिए इस मामले का समाधान करने की कोशिश कर रही है। हालाँकि, जब तक समिति सरकार को अपनी रिपोर्ट पेश नहीं करती है तब तक सरकारी महिला पीयू कॉलेज में यथास्थिति बनाई रखी जाएगी। विधायक के मुताबिक, कॉलेज कैम्पस में साम्प्रादायिक सौहार्द को बिगाड़ने के लिए हिजाब के मुद्दे को जन्म दिया गया है। उन्होंने आगे कहा, ”सरकार द्वारा गठित उच्चाधिकार समिति ड्रेस कोड और यूनिफॉर्म के बारे में अतीत में अदालतों के विभिन्न आदेशों के संबंध में मौजूदा मानदंडों का अध्ययन करेगी। राज्य सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपने से पहले विभिन्न राज्यों में अपनाए जा रहे ड्रेस कोड के नियमों का भी अध्ययन किया जाएगा।” उल्लेखनीय है कि भट कॉलेज की विकास समिति की अध्यक्ष भी हैं।

बीजेपी विधायक ने अपने निर्वाचन क्षेत्र में दूसरे सरकारी और प्राइवेट इंस्टीट्यूट द्वारा ड्रेस कोड के पालन किए जाने का हवाला देते हुए कहा कि संबंधित कॉलेजों में विकास समितियाँ हिजाब या हेडस्कार्फ़ की अनुमति इसलिए नहीं देती हैं, क्योंकि ये ड्रेस कोड के खिलाफ होता है। भट के मुताबिक, पुलिस अधिकारी से कॉन्ग्रेस नेता बने जी ए बावा ने मुस्लिम यूनियनों के एक समूह को लीड करते हुए वास्तविक स्थिति से अवगत कराया है। उन्हें बताया गया कि हिजाब की इजाजत दी गई तो इससे कॉलेज परिसरों में साम्प्रदायिक तनाव पैदा हो सकते हैं।

हाल ही में इस मामले में हिजाब को मुस्लिम छात्राओं ने अपना मौलिक अधिकार बताया था। इसके बाद राज्य के प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा मंत्री बीसी नागेश (BC Nagesh) ने हिजाब के मुद्दे को पूरी तरह से राजनीतिक करार देते हुए छात्राओं से यूनीफॉर्म के संबंध में नियमों का पालन करने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि वर्ष 1985 से इस नियम का पालन अनवरत रूप से किया जा रहा है। कॉलेज और स्कूल धर्म का पालन करने की जगह नहीं है। मंत्री ने ये भी कहा था कि सिर्फ मुस्लिमों को ही नहीं केसरिया शॉल भी कक्षा में प्रतिबंध है।

क्या है मामला

उडुपी जिले के पीयू कॉलेज का यह मामला सबसे पहले 2 जनवरी 2022 को सामने आया था, जब 6 मुस्लिम छात्राएँ क्लासरूम के भीतर हिजाब पहनने पर अड़ गई थीं। कॉलेज के प्रिंसिपल रूद्र गौड़ा ने कहा था कि छात्राएँ कॉलेज परिसर में हिजाब पहन सकती हैं, लेकिन क्लासरूम में इसकी इजाजत नहीं है। प्रिंसिपल के मुताबिक, कक्षा में एकरूपता बनाए रखने के लिए ऐसा किया गया है।

भले ही इस विरोध प्रदर्शन को ‘हिजाब’ के नाम पर किया जा रहा हो, लेकिन मुस्लिम छात्राओं को बुर्का में शैक्षणिक संस्थानों में घुसते हुए और प्रदर्शन करते हुए देखा जा सकता है। इससे साफ़ है कि ये सिर्फ गले और सिर को ढँकने वाले हिजाब नहीं, बल्कि पूरे शरीर में पहने जाने वाले बुर्का को लेकर है। हिजाब सिर ढँकने के लिए होता है, जबकि बुर्का सर से लेकर पाँव। कई इस्लामी मुल्कों में शरिया के हिसाब से बुर्का अनिवार्य है। कर्नाटक में चल रहे प्रदर्शन को मीडिया/एक्टिविस्ट्स भले इसे हिजाब से जोड़ें, ये बुर्का के लिए हो रहा है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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